Remove SC/ST Act, Stop Dalit Appeasement and bring equality

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना कहती है कि भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है?

आरक्षण के नाम पर अवसर की समानता और योग्यता की हत्या हो रही है। जो आरक्षण सिर्फ दस वर्ष तक के लिए दिया गया था उसे सरकारें वोट बैंक के लालच में 70 वर्षों से असंवैधानिक ढंग से बढाती जा रही हैं। अब दलित वोटोंं के लिए प्रमोशन में भी आरक्षण के लिए विधेयक लाए जा रहे हैं (जबकि सुप्रीम कोर्ट प्रमोशन में आरक्षण पर रोक लगा चुका है), SC/ST एक्ट (जो कि एक विशेषाधिकार है) के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट ने गैर संवैधानिक घोषित कर दिया तो सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए विधेयक ले आई है, जिसके अनुसार किसी भी जनरल/ओबीसी के व्यक्ति को बिना किसी जांच के सीधा गिरफ्तार किया जा सकेगा तथा उसे 'अग्रिम जमानत' के न्यायिक अधिकार से भी वंचित कर दिया जाएगा। यानी कोई भी sc/st का व्यक्ति जब मर्जी आए आपको फंसा कर अंदर करवा सकता है तथा भारतीय न्यायपालिका की न्याय प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए आप अंदाजा लगा लीजिए कि कितने वर्षों तक आपको बिना किसी अपराध के जेल भुगतनी पड़ सकती है। यह एक्ट सवर्णों के लिए कितना घातक है इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

जब संविधान के समक्ष सब बराबर हैं तो फिर कुछ जाति विशेष को हर जगह विशेषाधिकार क्यों? स्कूलों में, कॉलेजों में, नौकरियों के लिए आवेदन फीस में, कोचिंग में, नौकरी के लिए सीटों में, प्रमोशन में, पोस्टिंग में यहां तक कि तीर्थ यात्रा में.. हर जगह सवर्णों के साथ यह संवैधानिक भेदभाव क्यों? वोटों के लिए दलित तुष्टिकरण बंद हो, सुप्रीम कोर्ट का सम्मान हो।

आईए मिलकर इस भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएं।  



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