Petition Closed

Bring Back Old Classic Nagraj

This petition had 26 supporters


मेरा खुद का यह मानना है कि ओरिजिनल प्रताप मुलिक जी और चंदू जी के आर्टवर्क से सजा, संजय गुप्ता जी के कलम से लिखा Classic Nagraj जिसने शुरुवाती 10 सालों में भारतीय कॉमिक्स जगत पर राज़ किया, वही असली नागराज था. आज के नागराज में वह बात नहीं जो फैंस को नागराज का दीवाना बना देती थी.

विसर्पी की शादी कॉमिक्स के बाद, जब प्रताप मुलिक जी ने नागराज को बनाना छोड़ दिया तब अलग अलग आर्टिस्टों ने नागराज पर तरह तरह के प्रयोग करके उस ओरिजिनल नागराज को एक तरह से मार दिया, लेकिन जो बुलंदियां उस Classic Nagraj को मिली वह बाद में नागराज को कभी नहीं मिली, जो खतरनाक विलेन्स Classic Nagraj के वक़्त आये वैसे विलेन्स फिर कभी नहीं रचे गए.
Classic Nagraj, जो हमेशा सफर में होता, जिंदगी की रंगीन ख्वाहिशो से दूर, अपने काम पर फोकस, वो सिर्फ जिंदगी की बुनियादी जरूरतों के साथ ही जीता था। अकेला सा थोड़ा शर्मीला सा… उसके चेहरे पर हमेशा एक विनर स्माइल होती और उसके आस-पास के लोग उसे नज़र अंदाज़ नहीं कर पाते थे. चाहे अब तक नागराज की ढेरो कॉमिक्स आ चुकी हो मगर खुनी खोज की 2 situation भुलाए नही भूलती। पहली जिसमे नागराज डबल सेवन को, टाइगर और डेन्गो से बचाता हे और वो डायलॉग “आठ आदमी मिलकर अकेले आदमी को विलियम की ताकत दिखा रहे हे ?” जैसे चेतावनी, आगाज़ कि पाप का घड़ा भर चुका है… और चन्द सेकंडो में सब का सफाया। Classic Nagraj की फाइटिंग स्टाइल भी बेजोड़ थी जैसे वो हर दुश्मन को एक मौका देता कि मुझे खतम कर सको तो कोशिश कर लो, पर में जनता हूँ कि तुम भी मुझे नहीं मार सकते।
नागराज हर फाइटर की आर्ट का सम्मान करता, और उसे इस्तेमाल करने का पूरा मौका भी देता। उनके सारे दाव सारी ताकत ख़त्म हो जाने देता और फिर फाइनल वार करता, जैसे वो अपने दुश्मन को नहीं उसके अंदर बसी बुराई को मार रहा हो. जेसे वो दुनिया को ये बताना चाहता हे कि बुराई की शक्ति कितनी ही विकराल क्यो ना हो, सच्चाई की ताकत से कभी नहीं जीत सकती। कई दुश्मन उसे परलोक पहुँचाने की सोचते लेकिन खुद मरते मरते भी उसकी तारीफ करते जाते थे. निरीह जानवरो से प्रेम, बच्चो से प्यार करना, कमजोरो मदद करना, उन्हें हिम्मत देना, अपना काम खत्म कर वहाँ से गुमनाम सा चला जाता। कुछ के दिलो में बस कर, किसी और जगह पर, किसी और रास्तो पर (जैसे कोई संत या पीर). नागराज ने अपना पूरा जीवन मानवता को सौंप दिया था, उसकी कोई व्यक्तिगत निजी जिंदगी नहीं थी और वो सही मायनो में इंसानियत का पाठ सिखाता था. वो सारे मजहब, जाति को एक तार से जोड़ता, सिखाता की एकता में कितना सुकुन, शक्ति और शांति है.
आज भी नागराज की क्लासिक चित्रकथाओं को पढ़ने के बाद जज़्बातों पर काबू रख पाना बड़ा मुश्किल है, दृश्य बड़े लुभावने लगे, बड़ा अच्छा लगा नागराज इतना बड़ा अपराध विनाशक होने के बाद भी कितनी सादगी से रहता है. एक आम इंसान की तरह टेक्सी की सवारी करता है. अपने युद्ध कौशल जिसमें वो निपुण है उन कलाओं का उपयोग करता है , मार्शल आर्ट, कुंग-फू, स्नेक हेण्ड इत्यादि कलाओं का इस्तेमाल करके दुश्मनों का खात्मा करता है, जो आजकल के नागराज की तरह फालतू की बातें नहीं करता, जिसकी शक्तियां ही इतनी घातक है के उसे दिमाग का इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं पड़ती।
सच कहूँ तो मुझे भी क्लासिक नागराज बहुत पसंद है और मैं भी चाहता हूँ की नागराज की क्लासिक स्टोरीज वापिस आ जाए।



Today: Kishan is counting on you

Kishan Harchandani needs your help with “Sanjay Gupta: Bring Back Old Classic Nagraj”. Join Kishan and 25 supporters today.