Save 181 Delhi Women Helpline

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दिल्ली सरकार द्वारा 181 महिला हेल्पलाइन के निजीकरण के खिलाफ़ एक समाजिक अभियान। 

दिल्ली सरकार ने 181 महिला हेल्पलाइन क़ो बेच दिया है. वह भी उस कंपनी के हाथों, जिसका महिला मसलों को लेकर कोई काम नहीं है. ऐसा फैसला लेने से पहले आयोग ने उन महिलाओं को नोटिस तक नहीं दिया. इसी आयोग के नेतृत्व में पिछले दिनों महिलाओं की सुरक्षा को लेकर महिला सुरक्षा यात्रा निकली थी, जिसमें तेजाब हमले की शिकार महिलाओं की पीड़ा और जद्दोजहद दिखी थी लेकिन ऐसा लगता है वो एक केवल ढोंग था।

देखा जाए तो बदलाव की एक शुरुआत निर्भया कांड के बाद देखने क़ो सामने आई थी जिसमे समाज के इस सकारात्मक सहयोग ने निर्भया के परिजनों का भी मनोबल बढ़ाया लेकिन आज उसी निर्भया हेल्पलाइन को बचाने और उसे संचालित करने वाली महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए लोग सामने नहीं आ रहे. निर्भया कांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने वाले मीडिया की भूमिका भी कठघरे में है.

अपने साथ हुए इस व्यवहार की जानकारी मुख्यमंत्री और आयोग अध्यक्ष को मेल के जरिए दी. इसी के साथ अपनी मांगें रखीं, लेकिन आज 58 दिन बाद भी मुख्यमंत्री को इन महिलाओं से मिलने की फुरसत नहीं मिली. हालांकि आयोग के सदस्य सचिव ने उनके प्रतिनिधि मंडल को मिलने के लिए बुलाया तो वहां भी दो टूक कह दिया गया कि आयोग अब इस हेल्पलाइन को नहीं चला सकता, इसलिए इसे केयरटेल के हवाले कर दिया गया है. अब वहीं काम करना होगा. इसका विरोध करते हुए तब से महिलाएं आंदोलनरत हैं. लेकिन महिला सुरक्षा के नाम पर सत्ता में आए मुख्यमंत्री केजरीवाल इन महिलाओं से मिलना नहीं चाहते. वह चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं.

एक तरफ हेल्पलाइन की महिलाओं की पीड़ा है तो दूसरी तरफ केजरीवाल का चुनावी रैलियों में किए जा रहे महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे. सवाल उठता है कि जिस हेल्पलाइन के जरिए दिल्ली और एनसीआर की महिलाओं को सुरक्षा का एक आधार मुहैया कराया गया, उसे संचालित करने वाली महिलाओं से मिलकर समस्या का समाधान करने के बजाए वो महिला सुरक्षा के मसले पर सिर्फ राजनीति कर रहे हैं.

दिल्ली में समाजिक कार्यकर्ता साजिद मोजीब के नेतृत्व मे अब पूरे दिल्ली मे इस मूव्मेंट क़ो लोगों के बीच नुक्कड़ नाटक एवं साइलेंट प्रोटेस्ट के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है।

181 महिला हेल्पलाइन मे पहले से कार्यरत महिलाएं जिनमें पवित्रा, छाया, चांदनी ,सविता और पूजा ने बताया कि इस हेल्पलाइन क़ो सिर्फ बेचा ही नही गया बल्कि इससे जुड़ी तमाम महिलाओं कि उम्मीदों और उनकी प्राईवेसी तक क़ो बेच दिया गया। वहीं गीता, अनीता, मुनीरा, मोनिका, स्वेता और पूनम ने अपनी बात रखते हुए बताया कि जब हमारे पास किसी रेप विक्टिम का कौल आता तो हमसे ये पूछा जाता था कि विक्टिम से क्या बाते हुई ये हमे बताओ। वहीं इस मुहिम से जुड़े जाकिर इमाम और कैफ ने बताया कि हम इस मुहिम क़ो अपना पूरा समर्थन दे रहें हैं और मुहिम क़ो जन जन तक पहुंचाने मे एक बड़ा योगदान निभा रहें हैं। क्योंकि ये मुहिम पूरे देश का है।

इस मुहिम के साथ पिछले 59 दिनों मे कई समाजिक संघठन एवं देश के भिन्न भिन्न जगहों से समाजिक कार्यकर्ता जुड़ चुके हैं।

इस मुहिम क़ो अपना समर्थन दें कर दिल्ली सरकार के गलत नीति के खिलाफ़ आवाज बुलंद करें।