हमें दया नहीं अधिकार चाहिये

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मैं एक नेत्रहीन व्यकती हूं। और मैं जब कभी रोड़ पर खड़ा होता हूं या कभी जा रहा होता हूं तो बहुत बार मुझे ऐसे व्यकती मिलते हैं जो मेरी मदद तो कर देते हैं लेकिन उनकी शब्दाबली बहुत ही दुःखी करने वाली होती है। उनके शब्दों से हमारे दिल को बहुत ठेस पहुंचती है। मैं आज चेंज.ोआरजी के जरिये लोगों तक यह बात पहुंचाना चाहता हूं कि हमे आपके साथ की जरूरत है, लेकिन जो सोच आपके मन में हम लोगोॆं के लिये है उस सोच को खत्म करने की जरूरत है। क्योंकि आज के जमाने में हम भी बहुत कुछ कर सकते हैं। बस हमें आपका एक सहारा मात्र चाहिये मैं आशा करता हूं कि आगे से जब आप किसी नेत्रहीन व्यकती को देखेंगे तो आपका दृशटीकोण एक सही तरीके का होगा



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