Relief package for Practitioner Advocates due to Complete lock-down

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समक्ष - आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी, प्रधान मंत्री भारत सरकार

प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लाक,रायसीना हिल, नई दिल्ली 110011, भारत

विषय – भारत के लगभग 20 लाख अधिवक्ताओं के सम्मुख इस लॉक डाउन के समय विषम       आर्थिक परिस्थितियों से अवगत कराते हुए त्वरित सहायता उपलब्ध कराये जाने हेतु।

महोदय,  

      आज समूचे विश्व सहित हमारा देश इस वैश्विक कोरोना महामारी के संकट से गुजर रहा है और परिवार के संरक्षक की भांति देश के समस्त नागरिकों को इन संकट की घड़ी मे भी एकता के सूत्र मे पिरोया है आपका अपने नागरिकों से डिजिटल माध्यमों से व्यक्तिगत वार्तालाप निश्चित ही हम देशवासियों को सदैव मनोबल प्रदान करता है, हम सभी आपको हृदय से धन्यवाद देते हैं। भारत के जिम्मेदार नागरिकों की तरह हम सभी अधिवक्ता परिवार के भाई बंधु भी इस हेल्थ इमरजेंसी मे आपके साथ खड़े हैं, तथा अधिवक्ता होने के नाते समाज को इस महामारी मे सुरक्षित रहने के लिए सरकार के प्रयासों, सरकारी राहत योजनाओं की समुचित जानकारी देकर उन्हे जागरूक करने का दायित्व भी हम सब पर है जिसे हम सब बखूबी निभा रहें हैं।

मैं मर्म आहत हूँ इसलिए इस पत्र के माध्यम से सम्पूर्ण भारत मे लगभग 20 लाख अधिवक्ताओं  जिसमे कि सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश से हैं, उस अधिवक्ता परिवार की विषम और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था की धुरी होने के साथ ही विधि के शासन का भी आंतरिक सुरक्षा प्रहरी है जिसका एक ही मात्र ध्येय व उदेश्य है, समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय दिलाना, संक्षेप मे कहूँ- तो न्याय: मम धर्म: ।

अधिवक्ता वर्ग न तो दैनिक वेतनभोगी है, न पेंशनर, ऐसे मे देशभर के 20 लाख अधिवक्ताओं मे से लगभग तीन चौथाई संख्या समान्य परिवार से आए अधिवक्ता साथी हैं जो अपने बौद्धिक कौशल, विधिक ज्ञान से दैनिक अधिवक्तावृति से अपना जीवकोपार्जन करते हैं। और उनमे भी विशेष रूप से हमारे ऐसे युवा अधिवक्ता साथी जो कि जूनियर अधिवक्ता के रूप मे पंजीकृत होकर इस व्यवसाय से जुड़ कर अपने सीनियर्स ,वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ वकालत को सीखने व समझने के दौर मे अपने सीनियर्स की कृपा स्वरूप मिलने वाले पारिश्रमिक पर आश्रित हैं।

अब जबकि 3 सप्ताह तक सम्पूर्ण देश मे लॉकडाउन घोषित है, तब लगभग तीन चौथाई सामान्य अधिवक्ता वर्ग अत्यंत गंभीर आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है और लगातार गहराते इस सम्पूर्ण बंदी संकट ने उन सभी को ऐसे हालात पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिससे अधिवक्ता सपरिवार दैनिक जीवन की अति आवश्यक वस्तुओं, भोजन चिकित्सा आदि से भी वंचित होने को विवश हैं।

एडवोकेट एक्ट 1961 से शासित होने के कारण हम अधिवक्ताओं को केंन्द्र व राज्य सरकारों की लगभग सभी सरकारी योजनाओं जैसे कि आयुष्मान भारत, स्वास्थ बीमा व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पेंशन योजनाओं आदि की पात्रता सूची मे शामिल नहीं किया गया है, अतः ऐसी संकट कि घड़ी मे देश के प्रधानमंत्री होने के नाते अधिवक्ताओं के भरण-पोषण हेतु कोई त्वरित कदम नहीं उठाये गये तो कई अधिवक्ता साथी सपरिवार काल के इस विषम चक्र की भेंट अवश्य चढ़ जायेंगे।

दिनांक : 08-04-2020                                                               भवदीय

                                                                                    समस्त अधिवक्तागण