ग्राहक सेवा केंद्र वाले कब तक गरीबों के पैसे लुटते रहेंगे

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भारत सरकार ने जन-जन तक बैंकिंग सुविधा प्रदान करने के लिए देश भर में लाखो ग्राहक सुविधा केंद्र (Banking Correspondent) की स्थापना NGO तथा विभिन्य कंपनीयों की मदद से किया है| ये सुविधा केंद्र ग्राहकों को बैंकिंग सुविधा प्रदान कर रहे है| 

समस्या यह है की इनके पास अधिकतर गरीब और मजदूरो का खाता है और जिस में अधिकतर पढ़े लिखे नहीं है| इनके मेहनत के पैसे को कुछ सुविधा केंद्र वाले लूट रहे है| अधिकांस को ये पासबुक नहीं प्रदान करते है जिस वजह से जमा और निकासी की सही रकम वो देख नहीं पाते है और फिर उनके मेहनत के पैसे को वो हजम कर जाते है| बैंक का सीधे तौर पर इन सुविधा केन्द्रों पर कोई नियंत्रण नहीं होता है इस स्थिति में आम जनता कुछ दिन परेसान होने के बाद भूल जाते है|

शैल देवी, जो मुजफ्फरपुर बिहार की है कहती है " हमने ऐसे ही एक सुविधा केंद्र में चार वर्षो तक पैसा जमा किया, जब भी मेरे पास कुछ पैसा होता मै वहां जाता और उसे दे कर आ जाता| इस तरह मैंने चार वर्षो में लगभग एक लाख बीस हजार रूपये जमा की| हर बार मै बोलती की पासबुक दो और उसमे दर्ज भी करो तो बोलता की मै कहीं भागने वाला नहीं हूँ आप चिंता ना करे| चार वर्ष के बाद जब भी मै उससे पैसा मांगती हर बार वो कुछ दिन बाद देने की बात कहके टालते रहा पर जब मै एक दिन अपने पास के ही एक पढ़े लिखे व्यक्ति को ले कर गई तो पता चला की उसने मेरे दिए हुए पैसे को कभी भी मेरे खाते में जमा किया ही नहीं था| मै आज भी अपने पैसे के लिए उसका चक्कर लगा रही हूँ"|

शैल देवी अकेली ऐसी महिला नहीं है| अगर पता किया जाये तो ऐसी लाखो घटनाएँ सामने आयेंगी जिसमे उन गरीब और मासूम लोगो की मेहनत की कमाई उनके हाथो में है| इस तरह की सामानांतर बैंकिंग की वजह से बैंक भी कुछ नहीं कर पाती है| सरकार को इसके लिए सख्त कानून बनाने की जरुरत है ताकि गरीबों की मेहनत की कमाई कोई और लूट ना ले|