Enforcement of labour Court's judgement

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Ashok Aditya ने Rajasthan Govt. और को संबोधित करके ये पेटीशन शुरू किया

मेरा नाम है अशोक आदित्य। मैं अलवर राजस्थान का रहने वाला हूँ। मेरे पिता श्री निरंजन सिंह अलवर में ही मॉडर्न सूटिंग्स नाम की कंपनी में सैम्पल डिपार्टमेंट में स्थाई श्रमिक के तौर पर  कार्यरत थे। सन् 1994 में मेरे पापा को गैर कानूनी तरीके से बिना किसी कारण फैक्ट्री से निकाल दिया गया। जिसको लेकर मेरे पिता ने श्रम न्यायालय अलवर मे वाद दायर किया, जिसका फैसला मार्च 2017 में मेरे पिता के हक में आया जिसके तहत मेरे पिता को  पाँच लाख रुपय का मुआवजा और 2 माह में भुगतान ना होने की स्थिती में 9% वार्षिक दर से ब्याज पाने का हकदार बनाया। 

सन् 1994में वाद दायर करने से लेकर 2017 के बीच 27 वर्षों में मॉडर्न सूटिंग्स के क्रियाकलाप बंद हो गए। और कर्ज ना चुका पाने की वजह से IFCI ने उसे नीलाम कर दिया।जिसे नीलामी में सत्यतेज मर्कनटाईल ने खरीदा।

कोर्ट का फैसला आने के बाद उसकी पालना के लिए श्रम विभाग जयपुर  में अर्जी लगाई गई जिसके तहत श्रम विभाग जयपुर ने मॉडर्न सूटिंग के साथ-साथ सत्यतेज मर्कनटाईल को भी नोटिस जारी किया। नोटिस के जवाब में मॉडर्न सूटिंग्स  ने यह कहा की उसकी सारी Assets or liabilities अब सत्यतेज मर्कनटाईल की हो चुकी हैं और अब उसकी किसी के भी तरफ कोई देनदारी नहीं बची है।वहीं दूसरी तरफ सत्यतेज ने यह जवाब दिया की श्रमिक को उस को उसका पूर्ण मुआवजा अवॉर्ड के द्वारा पहले ही दिया जा चुका तथा श्रमिक ले चुका है जबकी हमें आज तक एक भी रुपया किसी ने भी किसी भी प्रकार से नहीं दिया है। जिसके बाद श्रम विभाग ने यह बयान दिया की न तो मॉडर्न सूटिंग्स की तरफ से कोई उपस्भाथित हुआ और न ही उनकी तरफ से कोई जवाब आया। जबकी मॉडर्गन सूटिंग्स के जवाब की कॉपी हमें वहीं से मिली हैै।श्रम विभाग  के उच्च अधिकारीयों ने लापरवाही बरतते हुए न तो मॉडर्न सूटिंग्स के जवाब पर ध्यान दिया और न ही सत्यतेज के प्रतिनिधी से यह जानने की कोशिश की कि अवॉर्ड के पैसे उसने कब, किसे और किस माध्यम से दिये। 

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है की श्रम विभाग ने मैसर्स सत्यतेज मर्कनटाईल  और मॉडर्न सूटिंग्स की श्रमिक यूनियन के मध्य समझौता करवाकर लगभग 500 श्रमिकों का भुगतान करवाया लेकिन जब श्रम न्यायालय द्वारा हमारे पक्ष में किए गए फैसले की बारी आई तो सत्यतेज मर्कनटाईल के कुछ अधिकारीयों के साथ मिलकर हमारे न्याय को अंधेरे में धकेल दिया।

पिछले 13 माह से पीड़ित परिवार अपनी व्यथा लेकर श्रम मंत्री श्री टीकाराम जूली जी से व्यक्ीगत रूप से मिलकर गुहार लगा रहा है। पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। हर बार सिर्फ झूठे आश्वासन और झूठे दिलासे ही मिले। और हर बार उसे फिर से न्यायालय जाने की हिदायत दी जा रही हैं। पीड़ित परिवार की हालत ऐसी नहीं है की फिर से सालों-साल अदालतों के चक्कर काट सके। 

कोरोना की वजह से पीड़ित परिवार की  आर्थिक हालत बहुत दयनीय हो चुकी है। बता दें  पीड़ित परिवार किराए के मकान में रहता है। लगातार लॉकडाउन की वजह से पीड़ित परिवार बेरोजगार हो चुका है मकान मालिक भी आए दिन झगड़ा और अभद्र व्यवहार करता है। तथा मकान खाली करने के लिए दवाब बना रहा है।

13 माह से श्रम मंत्री से गुहार लगा कर जब कुछ नहीं हुआ तो मजबूर होकर मेरे पिता ने ज़िंदा हुए भी पूरे परिवार की शव यात्रा निकाली ताकी उनकी मजबूरी को समझ कर  शायद कोई उन्हें उमके हिस्से का हक दिला सके। लेकिन हमारी पीड़ा समझने के बजाए मंत्री जी ने हमारी पीड़ा को नौटंकी बताकर जनता में उनकी छवी धूमिल करने और उनकी साख को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया और जेल में डालने की धमकी दी।

पीड़ित परिवार अब इतना टूट चुका है की अब वह आखरी उपाय के तौर पर दिनांक 4 जुलाई 2021 से मृत्यु के दर्शन होने तक भूख हड़ताल पर बैठेगा। अगर अब भी पीड़ित परिवार के सैथ न्याय नहीं हुआ तो पीड़्त परिवार के पास मृत्यु को गले लगाने के अलावा और कोई उपाय नहीं बचेगा।  

               

 

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