करोनाकालीन सामाजिक संकट: Government must urgently transfer money to the Indian citizens!

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[याचिका को हिंदी में पढ़ने के लिए कृपया नीचे देखें]

We are facing an unprecedented and colossal health, social, economic and humanitarian crisis caused by the COVID-19 attack. We are experiencing a sudden loss of income on account of unforeseen break from employment or occupation for all people in India. The impact will be unimaginably severe on the informal workers and the self employed who constitute more than 95% of Indian working population and on all those of the population who are dependent on them.

The situation calls for massive mobilisation of resources and establishment of health infrastructure as has been set up by Chinese government in Wuhan. Government may have to allow private hospitals to test for COVID-19 and take extraordinary measures to create spaces for treating those who are affected by the virus. Government will also have to ensure unhindered supply of essential commodities to avoid contingent starvation. We also see the urgent need for mobilising volunteers to take care of the emerging humanitarian needs of very large section of our people as well as to ensure unhindered supply of water, electricity, internet etc.

However, on a priority basis people will have to find financial resources to address the unfolding sudden health emergencies, particularly in the the context of absence of universal public health care system for its citizens. In India, in the absence of adequate public healthcare system, people spend from their pocket to meet regular or emergency medical expenses. There should be mechanism to compensate for the sudden acute loss of income, to take care of emerging medical exigencies.

People will also have to be compensated for the sudden loss of income which will have implications on inability to find money to buy daily food items, paying for rent, electricity, water, mobile charges, clothing and other essential daily expenses. People will also not have financial resources to meet regular health related expenses on those medical exigencies other than the COVID-19 related.

We want to emphasise here that Social Security is basic human right and it is a right of each and every citizen of India. We also feel that impact of the COVID-19 attack could have been minimised if we had in India a Universal Health Care and Universal Social Security system.

This is the time for Government to act. Corona Virus attack provides an extraordinary situation to take decisive action. Government should take steps to overhaul the fundamental assumptions of social security system in India and its method of delivery. Government must now accept the principle of non-discriminatory Universal Social Security for those who are living and working in India. It will be impossible to do a means test based screening of who is eligible and who is not eligible for social security delivery at this point of time.

Therefore, Social Security Now (SSN) demands Government of India to

1.   Declare that Corona virus test be made free of cost for everyone.

2.   Transfer Rs.15,000 per month for next three months to the account of every adult individual in the country. Banks can be authorised to deposit the same amount monthly to the account of the account holders, which in turn be reimbursed from the consolidated fund of India.

3.   Declare that all people irrespective of BPL status will be allowed to procure essential food items from Public Distribution Systems.

4.   Mobilise the financial resources required for this purpose by compulsorily asking companies to deposit at least 50% of the CSR funds in an account earmarked for the purpose.

These small but critical governmental action will help millions of our people to survive the COVID-19 crisis.


दुनिया भर में लोग कोविड -19 महामारी के कारण अभूतपूर्व और व्यापक स्वास्थ्य, सामाजिक, आर्थिक और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।  रोजगार एवं व्यवसाय में अप्रत्याचित ब्रेक आने के कारण लोग एकाएक अपनी आय का स्त्रोत खो रहे हैं। इसका सबसे भयावह असर अनौपचारिक श्रमिकों एवं स्वयं-नियोजित मेहनतकशों  पर होगा, जो भारतीय कामकाजी आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा यानि 95 फीसदी से भी अधिक है।  इसका भयावह असर उन लोगों  पर भी होगा जो इन मेहनतकशों के आमदनी पर निर्भर हैं।

इस स्थिति में चीन के वुहान जैसे संसाधनों का विशाल नियोजन एवं व्यापक स्वास्थ्य सरंचनाओं के फैलाव की जरुरत है। सरकार को निजी अस्पतालों को कोविड -19 का परीक्षण करने और वायरस से प्रभावित लोगों के इलाज के लिए अनुमति देनी पड़ सकती है। सरकार को अपने देशवासियों को भुखमरी से बचाने के लिए आवश्यक वस्तुओं की निबार्ध आपूर्ति भी सुनिश्चित करनी होगी। इस स्थिति में जनता की उभरती मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए  एवं पानी, बिजली, खाना, इंटरनेट आदि के निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वालंटियर्स तैनात करना भी जरुरी हो सकता हैं।  

हालांकि, कोविड-19 जैसी  हेल्थ इमरजेंसी से जूझने के लिए सबसे पहले लोगों को आर्थिक संसाधनों की जरुरत होगी।  भारत जैसे देश में - जहाँ यूनिवर्सल स्वास्थ्य व्यवस्था हैं ही नहीं – यहाँ यह बात और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता हैं। यहाँ जनता अपने जेब से ही स्वास्थ्य सम्बन्धी ज्यादातर खर्चा (आम एवं आपातकालीन) उठाती आई हैं।  रोजगार में पैदा हुई क्षति की भरपाई के लिए और आपातकालीन चिकित्सा खर्चों  को उठाने के लिए आज एक  सुनियोजित प्रक्रिया की ख़ास जरूरत हैं।

इस आपदा में लोगों की आय के नुकसान  के चलते, उनके लिए दैनिक खाद्य सामानों को  खरीदने, किराया भरने, बिजली, पानी, मोबाइल बिल, कपड़े और अन्य आवश्यक खर्चों का भुगतान कर पाने की असमर्थता की स्थिति सामने आएगी. कोविड -19 के अलावा होने वाली आम एवं आपातकालीन चिकित्सा खर्चों के लिए भी लोगों के पास  आर्थिक संसाधनों  की कमी होगी। इन सभी पक्षों की भरपाई करने की जिम्मदारी सरकार को लेनी होगी।

हम इस बात पर जोर देना चाहते हैं कि सामाजिक सुरक्षा बुनियादी मानव अधिकार है और यह भारत के प्रत्येक नागरिक/व्यक्ति  का अधिकार है। हमें यह भी लगता है कि अगर  भारत में  एक यूनिवर्सल स्वास्थ्य सेवा एवं यूनिवर्सल सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही होती,  तो कोविड-19  महामारी के  प्रकोप को कम किया जा सकता था।

यह समय सरकार के लिए ठोस कदम उठाने का समय हैं।  कोरोना वायरस के हमले से एक असाधारण  स्थिति पैदा हो गयी हैं और आज जरुरत हैं निर्णायक फैसलों की। अब वक्त आ गया हैं कि  सरकार भारतीय सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के आधारभूत मानकों में सुधार लाने के लिए पहलकदमी लें और डिलीवरी व्यवस्था में भी परिवर्तन लायें। आज सरकार को बिना भेदभाव वाले यूनिवर्सल सामाजिक सुरक्षा वाली सिद्धांत को मान लेना चाहिए और भारत में रहने वाले (या काम करने वाले) सभी लोगो को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के बारे में सोचना चाहिए। आज के समय  में  मीन्स टेस्टेड  वाली व्यवस्था बेकार लगती है  क्योंकि  कौन  सामाजिक सुरक्षा   के लिए  उचित पात्र है  और कौन  नहीं  - यह तय करना आज लगभग नामुमकिन है। 

इसलिए, सोशल  सिक्यूरिटी  नाउ (SSN) भारत सरकार से मांग करता है :

1. सरकारी या प्राइवेट – हर जगह   कोरोना वायरस टेस्ट सभी के लिए मुफ्त घोषित किया जाए ।

2.  सरकार देश के प्रत्येक वयस्क व्यक्ति के खाते में अगले तीन महीने के लिए 15,000 रुपए प्रति माह डालें। खाताधारकों के खाते में मासिक रूप से उस राशि को जमा करने के लिए बैंकों को प्राधिकृत किया जा सकता है, और यह राशि कंसोलिडेट फण्ड ऑफ़ इंडिया से प्रतिपूर्ति की जा सकती है ।

3. सरकार घोषणा करें कि बीपीएल या गैर-बीपीएल – सभी लोग पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम से आवश्यक खाद्य पदार्थों की खरीद कर सकते हैं।

4. इस प्रयोजन के लिए जरुरी वित्तीय संसाधनों के एकत्रीकरण हेतु सरकार सभी कंपनियों को अपने सीएसआर फण्ड से कम से कम 50% एक अलग खाते में जमा करने के लिए कहें।

ये छोटी लेकिन जरुरी सरकारी कार्रवाई हमारे लाखों लोगों को कोविड -19 के संकट से बचने में मदद करेगी।