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JUSTICE FOR BRAVE SOLDIERS

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*2010:जब आतंकी को मारने की सज़ा दी थी Congress ने,आज भी उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं वो जवान।* http://www.jagrukindian.com/2016/07/congress-sentenced-military-men-for-killing-terrorists.html#.V-S_cOhHl0g.whatsapp


2010:जब आतंकी को मारने की सज़ा दी थी Congress ने,आज भी उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं वो जवान।*

 30 अप्रैल 2010 में कश्मीर का मच्छिल सेक्टर की घटना है  !

हमारी सेना का कर्नल डी के पठानिया कश्मीर में अपने जवानों की एक एक कर के अपनी आँखों के आगे वीरगति देख रहा था !उसकी बटालियन के हाथ और पैर दिल्ली में बैठी दुर्दांत आतंकी संगठन समर्थक कांग्रेस की सरकार ने बाँध रखे थे !

वो बेचैन भारत माँ का लाल हर दिन अपने हाथों से अपने किसी शूरवीर जवान का अंतिम संस्कार कर रहा था, पर दिल्ली में बैठी आतंकी संगठन की सरकार बस एक आदेश देती थी: जो हो रहा है उसे होने दो ! ज्यादा देश भक्ति सवार है क्या ? वर्दी से नहीं तो कम से कम अपने परिवार से प्रेम करो और चुप रहो !

एक दिन उस से ना रहा गया !

30 अप्रैल 2010 को वो महावीर कर्नल पठानिया ने स्वयं को आतंकी संगठन कांग्रेस के हर आदेश, हर बाध्यता, हर नियम से मुक्त कर डाला ! उसके साथ इस पावन अभियान में उसका अधीनस्थ मेजर उपेन्द्र आया ! उसके साथ हवलदार देवेंद्र कुमार, लांस नायक लखमी व सिपाही अरुण कुमार भी आये और आतंकी संगठन समर्थक कांग्रेस के हर आदेश की धज्जी उड़ाते हुए इन महावीरों ने सेना  को तंग कर चुके शहज़ाद अहमद , रियाज़ अहमद व् मोहम्मद शफ़ी को अपने खुद के नियम और खुद के क़ानून से मार गिराया !

कर्नल पठानिया और मेज़र उपेन्द्र का खौफ़ हिमालय की घाटी में बन्दूक और तोपों की आवाज से भी ज्यादा गूँज गया! वहां खुद को आतंकी कहने वाला अपना हुलिया बदल कर बंदूक की जगह बुरका पहन कर घूमने लगा ! शांति के दूतों में छाया ये खौफ़ दुर्दांत आतंकी संगठन और उस समय की सत्ता के मालिक कांग्रेस को रास ना आया ! फिर शुरू हुआ कर्नल पठानिया और मेज़र उपेन्द्र, हवलदार देवेंद्र कुमार, लांस नायक लखमी व सिपाही अरुण कुमारकी अनंत प्रताड़ना का दौर !

रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने उनकी अपनी खाल से भी ज्यादा प्रिय वर्दी उतरवा कर उन्हें बर्खास्त कर दिया और याकूब के लिए रात में 12 बजे खुलने वाली कोर्ट ने मेजर उपेन्द्र, कर्नल डी के पठानिया, हवलदार देवेंद्र कुमार, लांस नायक लखमी व सिपाही अरुण कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई !

भारत माता के इन पाँचों वीर सपूतों को जल्द ही रिहा किया जाए।
भारतीय रक्षा सेनाओं के मनोबल को कम करने और उन्हें अपंग बनाने वाली गलत नीतियों को अविलंब खत्म किया जाए और सेना को आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने की खुली छूट दी जाए । 



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