Revive Sanskrit in Punjab

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1- संस्कृत क्या है?

संस्कृत भारत की प्राचीन भाषा है। इसमें साहित्य, अध्यात्म, विज्ञान और जीवन जीने का तरीका शामिल है । यह दर्शन व्याकरण और ज्ञान की परंपरा का  मूल स्रोत है। यह लोगों के दिन-प्रतिदिन के जीवन तथा संस्कृति से जुड़ी भाषा है । यह संपूर्ण मूल्यों का खजाना है जो मानव जीवन के लिए आवश्यक है। यह भाषा प्रौद्योगिकी में प्रवीणता प्राप्त करने के लिए भी फायदेमंद है और यह विभिन्न नौकरियां तथा रोजगार प्राप्त करने में सहायक है।

2-संस्कृत और पंजाब का इतिहास-

- संस्कृत बहुत लंबी अवधि के लिए पंजाब की पहली भाषा रही है।

- वेदों के संपूर्ण विचारों  का विकास  पंजाब में ही हुआ है।

- प्रसिद्ध व्याकरणकार पाणिनी ने व्याकरण ग्रन्थ पंजाब में हि लिखा था। उस दौरान पंजाब को सप्त सिंधु के नाम से जाना जाता था।

3-संस्कृत और इस क्षेत्र की अन्य भाषाओं के परस्पर संबंध-

- संस्कृत में इस क्षेत्र की अन्य भाषाओं के साथ काफी घनिष्ठता है । लगभग 94% पंजाबी शब्दों की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है।

- हिंदी में बहुत सारे शब्द हैं, जिनकी उत्पत्ति संस्कृत से हुई है।

- डोगरी, पहाड़ी में भी कई ऐसे शब्द हैं, जिनकी उत्पत्ति संस्कृत से हुई है।

4-पंजाब में संस्कृत के संरक्षक-

- महाराजा नरिंदर सिंह (1824-1862) पंजाब में संस्कृत भाषा के महान संरक्षक थे। वह 1846-1862 से पटियाला के महाराजा थे। वह पंजाब के वर्तमान सी.एम.  कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्वज थे । उन्होंने समनिया गेट पटियाला के पास संस्कृत कॉलेज की स्थापना की।

- महाराजा रिपुदमन भी संस्कृत के महान संरक्षक थे, उनके नेतृत्व में, नाभा संस्कृत के महान केंद्र के रूप में उभरा । इस छोटे से शहर को पंजाब की मिनी काशी के नाम से जाना जाता था।

5-पंजाब में संस्कृत की स्थिति आज-

- वर्तमान में पंजाब में संस्कृत की स्थिति दयनीय है। पंजाब सरकार द्वारा संस्कृत की संस्थाओं की उपेक्षा की जा रही है।

- पंजाब में कई संस्कृत कॉलेज ऐसे थे, जिन्हें सरकार ने बिना किसी कारण के बंद कर दिया । ये कॉलेज हैं संस्कृत कॉलेज पटियाला, संस्कृत कॉलेज नाभा, संस्कृत कॉलेज सुनाम, संस्कृत कॉलेज बठिंडा आदि।

- स्कूल स्तर पर भी संस्कृत के रिक्त पदों में कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप कई छात्र उच्च कक्षाओं में संस्कृत को भाषा के रूप में नहीं चुन पा रहे हैं ।

- पंजाब में अब जीरो (0) गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज है । पिछला संस्कृत कॉलेज (पटियाला) 2012 में बंद हो चुका है।

6-पंजाब में संस्कृत के माध्यम से रोजगार- (घर घर नौकरी परियोजना में सहायक)

- संस्कृत हिंदी, पंजाबी, डोगरी पहाड़ी आदि सभी संबंधित भाषाओं में छात्र को निपुण कराएगी।

- हिमाचल और उत्तराखंड में यह दूसरी भाषा है। हरियाणा और राजस्थान ने किसी भी नौकरी के लिए 10वीं क्लास तक संस्कृत को अनिवार्य कर दिया है। हरियाणा और राजस्थान संस्कृत के लिए हर साल बड़ी संख्या में रिक्तियां निकालते हैं ।

-ये सभी पंजाब के पड़ोसी राज्य हैं इसलिए पंजाब के छात्र संस्कृत सीखकर और इन पड़ोसी राज्यों में संस्कृत के माध्यम से रोजगार प्राप्त करके नौकरी का लाभ प्राप्त कर सकते हैं ।

पंजाब में संस्कृत के माध्यम से रोजगार के अन्य क्षेत्रों- (स्वरोजगार प्रदान करने में सहायक)

- कंप्यूटर एनएलपी के लिए संस्कृत ज्यादा नेचुरल लैंग्वेज है।

- आईटी कंपनियों को हमेशा पंचांग (कैलेंडर) मेकर्स, कंटेंट राइटर, स्पीकर, स्टोरी टेलर आदि की जरूरत होती है।

- संस्कृत भाषा के अध्ययन से आयुर्वेद, योग, शिक्षण, सेना (जेसीओ), सरकारी मंदिरों और पारंपरिक क्षेत्रों में पुजारी आदि के क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध हैं ।

-हिंदी क्षेत्र के उच्च ज्ञान कौशल को प्राप्त करने के लिए संस्कृत के अध्ययन की आवश्यकता है ।

--------- हमारी मांगें क्या हैं-----------                              

7- माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर हम क्या चाहते हैं?

ए- पंजाब के  हर सरकारी तथा निजी स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए, संस्कृत के अंकों को छात्रों के अंतिम परिणाम में शामिल किया जाना चाहिए ।

बी- पंजाब के सभी स्कूलों में योग्य संस्कृत शिक्षक नियुक्त किया जाने चाहिए ।

सी- संस्कृत के पाठ्यक्रम को एन.सी.ई.आर.टी. के पैटर्न के अनुसार अपडेट किया जाना चाहिए।

डी- सेकंड्री स्तर पर संस्कृत की स्थिति में सुधार के लिए पंजाब में प्रिंसिपल सीक्रेटरी आफ सेकेंड्री एजुकेशन के चेयरमैनशिप में पंजाब संस्कृत सलाहकार कमेटी की नियुक्ति की जानी चाहिए।  

ई-संस्कृत शिक्षकों के साथ अनुचित व्यवहार समाप्त किया जाना चाहिए और उन्हें अन्य कर्तव्यों जैसे-चपरासी, डाक कैरी और क्लर्क आदि को करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए ।

8- उच्च शिक्षा के स्तर पर हम क्या चाहते हैं?

ए-  पंजाब के निजी  तथा सरकारी कॉलेजों में संस्कृत पढ़ाई जानी चाहिए।

बी- सभी संस्कृत कॉलेजों को जल्द से जल्द पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।

ग- विश्वविद्यालयों में संस्कृत की रिक्तियों को अन्य विषयों में परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए और परिवर्तित रिक्तियों को विभाग में वापस कर दिया जाए ।

घ- आयुर्वेद कॉलेजों में संस्कृत के रिक्त पदों को बिना किसी देरी के भरा जाए।

ई- पंजाब के सभी सरकारी कॉलेजों में योग्य संस्कृत प्रोफेसरों की नियुक्ति में की जानी चाहिए ।

एफ- उच्च शिक्षा स्तर पर संस्कृत की स्थिति में सुधार के लिए पंजाब में उच्च शिक्षा के मुख्य सचिव के अध्यक्षता में पंजाब संस्कृत सलाहकार समिति की नियुक्ति की जानी चाहिए। तथा उनकी सिफारिशों को लागू किया जाए ।

जी- संस्कृत प्राध्यापकों के साथ अनुचित व्यवहार को समाप्त किया जाना चाहिए और उन्हें अन्य कर्तव्यों जैसे-चपरासी, डाक कैरी और क्लर्क आदि को करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए ।

एच- पंजाब के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर संस्कृत सेमिनारों और संस्कृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए ।

---------------एक संगठन के रूप में हम क्या मांग करते हैं?-------------

ए-  उर्दू अकादमी की तर्ज पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के लिए पंजाब संस्कृत अकादमी की स्थापना होनी चाहिए।

बी - रोजगार, उच्च कौशल आदि की संभावनाओं को खोजने के लिए संस्कृत, पाली, प्राकृत और पंजाबी के लिए पंजाब भाषा अनुसंधान संस्थान की स्थापना की जानी चाहिए ।

सी- यहां राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान का एक क्षेत्रीय परिसर होना चाहिए- (कैंट्रल संस्कृत विश्वविद्यालय ऑफ इंडिया)

पढ़ने के लिए धन्यवाद

1-What is Sanskrit  ?

            Sanskrit is the ancient language of India. It contains literature, Spirituality, Science & way of life. It is source of all phillosophy grammar and entire tradition of knowledge. It is associated with day to day life of the people. It is treasure of the entire values which are essential of human life. This language is also beneficial to attain proficiency in technology and it is helpful to obtain different jobs by perusing different careers.

2-History of Sanskrit & Punjab-

-Sanskrit has been the First language of Punjab for a very long duration.

-The entire thought instructors of Vedas have developed in Punjab.

-The renowned grammarian Panini had hailed from Punjab. During that time Punjab was known as Sapta Sindhu.

3-Interrelations of Sanskrit & other Languages of this area-

-Sanskrit has much communality with other languages of this area Such as – 94 % Punjabi words have been originated from Sanskrit.

 -Hindi has lot of words which have been originated from Sanskrit.

 -Dogri, Pahari, have also many words which have been originated from Sanskrit.

4-Patron of Sanskrit in Punjab-

-Maharaja Narinder Singh (1824-1862) was great patron of Sanskit in Punjab. He was Maharaja of Patiala From 1846-1862. He was ancestor of Present C.M of Punjab Captain Amrinder Singh. He Established a Sanskrit College Near Samania Gate Patiala.

-Maharaja Ripudaman was also great patron of Sanskit Under his Leadership, Nabha emerged as a Great Center of Sanskrit in Punjab. This Small city was known as Mini Kashi of Punjab.

5-Situation of Sanskrit in Punjab today-

-At present situation of Sanskrit is pathetic in Punjab. Institutions of Sanskrit are being neglected by the govt. of Punjab.

-There were many Sanskrit Colleges in Punjab which have been closed by the govt. without any rational; these colleges are Sanskrit College Patiala, Sanskrit college Nabha, Sanskrit College Sunam, Sanskrit college Bathinda etc.

-Even at school level vacancies of Sanskrit have been decreased. As a result of it many Student are not opting Sanskrit as a language. 

-Punjab has Zero (0) Govt. Sanskrit College Now. Last Sanskrit College (Patiala) has been Closed In 2012.

6-Employment through Sanskrit in Punjab- (Helpful in Grh Grh Noukri Project)

-Sanskrit would make a student skillful in all related languages such as Hindi, Punjabi, dogri Pahari, etc.

-It is 2nd language in Himachal & Uttrakhand. Haryana & Rajsthan have made Sanskrit compulsory up to 10th class for any job. Haryana & Rajasthan provides every year a large number of vacancies for Sanskrit.

-All these are neighboring states of Punjab so the Student of Punjab can get the benefit of job by learning Sanskrit & getting employment through Sanskrit in these neighboring States.

-Other areas of Employment through Sanskrit in Punjab- (Helpful to provide Swa-Rojgar)

-Sanskrit is more natural language for Computer NLP.

-IT Companies are always required Panchang (Calendar) Makers, Content Writer, Speaker, Story Teller etc.

-By the study of Sanskrit language employability can be sought in the field of Ayurveda, Yoga, Teaching, Army (JCO), Priest in govt. Temples and Traditional Fields etc.

-Employment opportunities are available through the study of Sanskrit in the field of traditional knowledge of Hindi sphere of life.

 ---------WHAT ARE OUR DEMANDS-----------                               

7- What we want on Secondary education level?

A- Sanskrit should be taught in every govt. as well as in private schools in Punjab, the marks of Sanskrit should be included in the final result of the students.

B- The Qualified Sanskrit teacher should be appointed in all the school s of Punjab (govt. as well as private)

C– The syllabus of Sanskrit should be updated in accordance with pattern of N.C.E.R.T

D- To improve the situation of Sanskrit at secondry level Punjab Sanskrit advisory committee should be appointed under the chairman ship of principal secretory secondary education in Punjab.   

E- Ill-ntreatment with Sanskrit teacher should be ended and they should not be compelled to perform other duties like – peon, postal carries & clerk etc.

8- What we want on Higher education level?

A- Sanskrit should be taught in every govt. as well as in private colleges in Punjab.

B- All Sanskrit colleges should be revived at the earliest.

C- Vacancies of Sanskrit in Universities should not be converted in other Subjects & Converted Vacancies should return to the department.

D- The vacant posts of Sanskrit in the Ayurveda Colleges should be filled without any delay.

E- The Qualified Sanskrit professors should be appointed in all the Govt. Colleges of Punjab (govt. as well as private)

F- To improve the situation of Sanskrit at higher education level Punjab Sanskrit advisory committee should be appointed under the chairman ship of chief secretory of higher education in Punjab.  

G- Ill-ntreatment with Sanskrit professors should be ended and they should not be compelled to perform other duties like – peon, postal carries & clerk etc.

H- Time to time to improve the stranded of Sanskrit Seminars and Sanskrit training campus should be organized by Department of Higher education in various colleges and universities of Punjab. 

  ---------------As an organization what we demand?-------------

Punjab Sanskrit Academy Should established for the propagation and promotion of Sanskrit on the pattern of Urdu academy.

Punjab Research institute for SANSKRIT, PALI, PRAKRIT & PUNJABI should be established to find the possibilities of Employment, Higher Skills etc.

Here should be a regional campus of RASHTRIYA SANSKRIT SANSTHANM- (cantral sanskrit University of India)

                                     Thank you for Reading