Review of policy on reservation in Jobs and Education.वर्तमान में जारी आरक्षण की समीक्षा ।

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आजादी के सत्तर साल बाद भी जातिगत आरक्षण से अपेक्षित लाभ नहीं हुआ बल्कि कुछ मुठ्ठीभर लोग पीढ़ी दर पीढ़ी इसका लाभ लेती रहीं जबकि वास्तविक रूप से कमजोर, दलित और गरीब इससे वंचित रहे । राजनीतिक पार्टियां वोट की खातिर न तो इस व्यवस्था की समीक्षा करने की हिम्मत कर पाती हैं न ही इसे बदलने का प्रयास। नतीजा यह है कि कुछ जातियां जो की वास्तव में सम्भ्रान्त और समृद्ध हैं और साजिश कर आरक्षण की सूची में डाली गईं वह लगातार आरक्षण का लाभ ले कर और समृद्ध होती जा रहीं है जबकि वास्तविक जरूरतमंद आज भी वहीं के वहीं हैं। मैं जातिगत आरक्षण के पूर्णता खिलाफ नहीं पर चाहता हूं कि आरक्षण वास्तव में जरूरतमंद दलितों को मिले न कि उनके नाम पर समृद्ध लोगों को।इसलिए आवश्यक है कि आरक्षण हेतु पात्रता की समीक्षा हो।



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