हम मजदूर है, सरकार और उद्योगपतियों के गुलाम नही !

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हाल में जो खबरे आप पढ़ रहे है वही मेरी समस्या है, शायद आपकी ना हो लेकिन मेरी है क्यों की मै एक ऐसे समाज से आता हूँ जहाँ पर हर एक दिन की भूख मिटाने के लिए कुआँ खोदना पड़ता है, मै उस समाज का हिस्सा हूँ जो पुरे देश को चलाती है, हाँ मै उस मजदूर समाज का हिस्सा हूँ जो मजबूर तो है लेकिन कमजोर नही! 

कभी खबरे पढने को मिलती है की कोई घर पैदल हजारो हजारो किलोमीटर चलने के बाद घर से बस दस किलोमीटर पहले अपना दम छोड़ दे रहा है, तो कभी खबर मिलती है अँधेरी रातो में परिवार परिवार साफ़ हो गया या कभी खबर मिलती है की कोई भूखे बड़े शहर के चौराहे पर अपना दम तोड़ दे रहा है|

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जब सरकारे और उद्योगपतियों को जरुरत थी की उन्हें सहारा दे तो उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिए और आज जब लोग घर वापस लौट रहे है तो उन पर बंदिस लगा रहे है की आप घर नही जा सकते है तो फिर आपकी मानवता कहाँ गयी, कहाँ गया वो 5000 पुरानी सभ्यता का सिधांत! आज जो सरकार कर रही है क्या एक तरह से गुलाम बनाने की परिक्रिया नही है बिलकुल उस दुष्ट धनानंद और अंग्रेजो की तरह, अपने आप को समृध बनाये रखने के लिए दुसरो को गुलाम बनाये रखना|

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शहीद मजदूरों के लिए कोई कैंपेन नहीं चलेगा। हां, मैं उन्हें शहीद कहूंगी लेकिन यहां वजह सरकार है, हम है आप है। जिनके पसीने और खून से आपका सिटी स्मार्ट बना, इमारतें बनी क्या आपकी जिम्मेवारी कुछ नहीं थी। रेल की पटरियों पर एक उम्मीद के साथ सोए उन मजदूरों की सुबह क्या ऐसी होनी चाहिए थी। इतना डरावना माहौल इस देश का आजतक नहीं देखा। ये बाते कल श्रेया ने अपने फेसबुक वाल पर कही थी, हमसबके के लिए ये बहुत छोटी सी बात होगी लेकिन हम जैसे मजदूरो के लिए बहुत बड़ी बात है!

Karnataka government cancels specials trains for Migrant Laborers

ये एक आजाद भारत है जहाँ सबको अपने अधिकार है , आने का तो जाने का , खुद अपने मर्जी से काम करने को, सरकारे ऐसा कर रही तो कही ना कही वो मजदूरो का अधिकार छीन रही है! सरकार को चाहिए की जो भी मजदूर अब घर आना चाहते है उन्हें सारी व्यवस्था मुहया करायी जाए और जो भी उनके लिए स्पेशल ट्रेन्स और बसे चलायी जानी थी उन्हें चलाया जाए, ना की उद्योगपतियों के फायदे को एकतरफा देखा जाये|