याचिका बंद हो गई

I am Vikas Shukla S/O late Mr. Ram Kumar .i am struggling for justice for my father death

यह मुद्दा 220 हस्ताक्षर जुट गये


निवेदन निम्न प्रकार है :-

१. यह कि प्रार्थी गोविन्द नगर भिंड (म.प्र.) के निवासी है |

२.यह कि , स्वर्गीय श्री रामकुमार शुक्ला  प्रधान आरक्षक ८६५ वर्तमान में पुलिस थाना रौन जिला भिंड में पदस्थ थे |

३.यह कि, पिछले ५-६ महीने से प्रार्थिया के पति लिवर , पेट से संक्रमण से पीड़ित थे |

४.यह कि, प्रार्थी के पिता को रौन थाने के टी.आई.  एस.एस.गौर द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा था , जिसके बारे में वह कई बार प्रार्थी को बताते रहे थे |

५.यह कि, प्रार्थी के पिता का दिनांक ०२.१०.२०१७ को सुबह ९:१९ बजे फ़ोन आया था तब उनके द्वारा बताया गया था कि मुझे टी.आई. एस.एस.गौर ने कुल्हाड़ी के बेंत से मारा है ,यह मुझे मार डालेगा, तुम लोग एस. पी. साहब से परिवार सहित जाकर उनसे बात करो | 

६.यह कि , उक्त फ़ोन पर ऐसा सुनने के बाद  आकाश एस. पी. साहब के बंगले पर गया और वहां पर गार्ड से बात की तो उन्होंने व स्वयं एस.पी.साहब ने  बंगले पर मिलने से मना किया |

 ७.यह कि ,उक्त फ़ोन पर ऐसा सुनने के बाद आकाश रौन थाने गया तो वहां पर प्रार्थी के पिता थाना परिसर में अर्धबेहोशी हालत में थे | वहां से पुत्र आकाश शुक्ला अपने पिता को रौन अस्पताल ले गया, वहां से उन्हें भिंड अस्पताल रेफर कर दिया गया तथा फिर भिंड अस्पताल से ग्वालियर अस्पताल रेफर कर दिया गया | उक्त दोनों स्थानों पर श्री मान एस.पी.महोदय और टी.आई के दबाव कि वजह से इलाज के पूर्व कोई बयान नहीं लिए गए | ग्वालियर रात्रि ८:३० बजे उनकी मृत्यु हो गई |

८.यह कि, प्रार्थी के पिता ने पुलिस अधीक्षक महोदय भिंड से रौन टी.आई. एस. एस. गौर की शिकायत की थी किन्तु उन्होंने भी टी. आई. का ही साथ दिया और प्रार्थिया के पति को ही उल्टा शांत कर दिया और फ़ोन पर  ही लाइन आने के आदेश दे दिए |

९.यह कि, प्रार्थी के पिता ने मृत्यु से पूर्व पत्रकार को दिए साक्षात्कार में यह बात कही कि आरक्षक आशीष यादव, ऐ.एस.आई. मिश्रा व मुनीम चंद ने टी.आई. के साथ मिलकर हमारे साथ मारपीट की व अभद्रता की | मृतक के मृत्यु पूर्व कथन के ऑडियो एवं वीडियो इस बात कि पुष्टि करते है|  

१०.यह कि, प्रार्थी के पिता की मौत के जिम्मेदार पूर्णतः टी.आई.एस.एस. गौर ,पुलिस अधीक्षक भिंड अनिल सिंह कुशवाह व अन्य पुलिस कर्मी ही है | इसलिए उक्त आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर उचित कार्यवाही किया जाना तथा दौराने जाँच उक्त आरोपियों को निलंबित कर न्यायहित में आवश्यक है ताकि उक्त आरोपी विवेचना को प्रभावित न कर सके |

११.यह कि, आज एक महीना पूरा होने के बाद भी जांच के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया है या कोई कार्यवाही नहीं हुई है | आज दिनांक तक प्रार्थी के पिता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र भी प्रशासन के दवाव के कारण प्राप्त नहीं हो सके है |

 

अतः माननीय महोदय से निवेदन है कि उक्त आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किये जाने व प्रकरण कि विवेचना किसी वरिष्ठ निष्पक्ष एजेंसी को दिए जाने की कृपा करे | प्रार्थी के दिए हुए आवेदन , सुसाइड  नोट व इतने सारे साक्ष्यों के आधार पर एक निश्चित समयावधि के अंदर निराकरण कर इंसाफ दिलाया जाये |  आपकी अति कृपा होगी |



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