चुनाब मै बेलेट पेपर का इसतेेमाल हो

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Petitioning Supreme Court of India and 4 others
 
#Ban_EVM #Save_Democracy #Repoll_UP
 

 

Mohd Aadil
 
ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को बैन करने की मांग एवं वोटिंग के लिए बैलेट पेपर प्रणाली को वापस लाने के लिए लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं. इसके पीछे पर्याप्त कारण मौजूद हैं.

ईवीएम 'फ्री एंड फेयर' नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसमें 'पेपर ट्रेल' की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की बेहद सख्त़ आवश्यकता बताते हुए वीवीपीएटी (पेपर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) को ईवीएम से जोड़ने का आदेश दिया था. जैसे आपको एटीएम से पैसा निकालने के बाद पर्ची मिलती है वैसे ही, ताकि गड़बड़ी की शंका होने पर उसका फिजिकल वेरीफिकेशन किया जा सके.

यह लोकतंत्र को बचाने के लिए जरूरी है. लेकिन चुनाव आयोग इसे टालता रहा है. मनुस्ट्रीम मीडिया ने ईवीएम के विरूद्द संघर्ष को दबाने का ही काम किया है.

. जो लोग जानते हैं कि हां, ईवीएम में हेराफेरी किया जाना संभव है, 

अब सवाल है कि कैसे जांचेंगे?
कोई कागज तो है नहीं, जो फिजिकल वेरिफिकेशन किया जा सके. कागज होता तो पता चल जाता कि किस पर, कितना ठप्पा लगा है, दिख जाता, गिन लिय़ा जाता. लेकिन ईवीएम में कैसे देखोगे? किस पर कितना बटन दबाया गया और वोट कहां गया, नहीं पता चल पाएगा.

यह 'फ्री और फेयर' नहीं है, जिसका कि भारत का संविधान बात करता है.
EVM द्वारा चुनाव लोकतंत्र के पक्ष में नहीं है. पूरा का पूरा चुनाव भी मैनेज किया जा सकता है. चुनावों को मात्र दिखावा मत बनने दीजिए. व्यापारियों और नेताओं का इवेंट मत बनने दीजिए.

मैं Mohd Aadil EVM मशीन की कार्यप्रणाली व इससे जुड़े कुछ तथ्यों से आपलोगों को रूबरू कराना चाहुँगा जो पुर्ण रूप से वास्तवीक है तथा व्यहवारीक है ।
चुनाव के नतीजे आ गए और अब आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है. मायावती ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये बता दिया है कि नतीजे उनकी समझ के परे हैं और ईवीएम में छेड़खानी हुई है. अब ये पहले का दौर तो है नहीं कि पोलिंग बूथ लूटने की बात कह दी जाए, लेकिन हां हाई-फाई इलेक्शन रिजल्ट के लिए हाई-फाई ईवीएम में छेड़खानी का आरोप तो लगाया ही जा सकता है. खैर, सोशल मीडिया पर भी ये पहले ही वायरल हो रहा था कि ईवीएम में कोई भी बटन दबाओ बीजेपी को ही वोट जाता है. बात चाहें जो भी हो, लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि ईवीएम में छेड़खानी करने के लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है.!!!!!!!!!!!
आखिर काम कैसे करती है ईवीएम-???????
ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में एक कंट्रोल यूनिट होता है. एक बैलट यूनिट और 5 मीटर की केबल. ये मशीन 6 वोल्ट की बैटरी से भी चलाई जा सकती है. होता कुछ यूं है कि मतदाता को अपनी पसंद के कैंडिडेट के आगे दिया बटन दबाना होता है और एक वोट लेते ही मशीन लॉक हो जाती है. इसके बाद सिर्फ नए बैलट नंबर से ही खुलती है. एक मिनट में ईवीएम में सिर्फ 5 वोट दिए जा सकते हैं.
ईवीएम मशीनें बैलट बॉक्स से ज्यादा आसान थीं, उनकी स्टोरेज, गणना आदि सब कुछ ज्यादा बेहतर था इसलिए इनका इस्तेमाल शुरू हुआ. लगभग 15 सालों से ये भारतीय इलेक्शन का हिस्सा बनी हुई है. ये सब सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन ईवीएम मशीनें काफी असुरक्षित भी होती हैं.
क्या-क्या हैं खतरे-?????????
* ईवीएम मशीने आसानी हैक की जा सकती हैं.
* ईवीएम मशीनों के जरिए वोटर की पूरी जानकारी भी निकाली जा सकती है.
* इलेक्शन के नतीजों में फेरबदल किया जा सकता है.
* ईवीएम मशीन इंटरनली किसी इंसान द्वारा भी बदली जा सकती है. इसके आंकड़े इतने सटीक नहीं कहे जा सकते.
ईवीएम मशीनों को हैक करने के लिए कई बार धमकी दी जा चुकी है. सिर्फ भारत ही नहीं कई देशों में ये हुआ है. हैकरों ने ईवीएम रिजल्ट बदलने से लेकर वोटरों की जानकारी जगजाहिर करने तक की घमकी दी है. इसके अलावा, सिर्फ सिक्योरिटी के लिए ईवीएम का इलेक्शन सॉफ्टवेयर भी बदला जा चुका है. हालांकि, इसके बाद भी ईवीएम को हैक करना काफी आसान है..........
इन देशों में बैन कर दी गई है ईवीएम- ???????
* नीदरलैंड ने पारदर्शिता ना होने के कारण ईवीएम बैन कर दी थी.
* आयरलैंड ने 51 मिलियन पाउंड खर्च करने के बाद 3 साल की रिसर्च कर भी सुरक्षा और पारदर्शिता का कारण देकर ईवीएम को बैन कर दिया था.
* जर्मनी ने ईवोटिंग को असंवैधानिक कहा था क्योंकि इसमें पारदर्शिता नहीं है.
* इटली ने इसलिए ईवोटिंग को खारिज कर दिया था क्योंकि इनके नतीजों को आसानी से बदला जा सकता है.
* यूएस- कैलिफोर्निया और अन्य राज्यों ने ईवीएम को बिना पेपर ट्रेल के बैन कर दिया था.
* सीआईए के सिक्योरिटी एक्सपर्ट मिस्टर स्टीगल के अनुसार वेनेज्यूएला, मैसिडोनिया और यूक्रेन में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीने कई तरह की गड़बड़ियों के कारण इस्तेमाल होनी बंद हो गई थीं.
* इंग्लैंड और फ्रांस ने तो इनका उपयोग ही नहीं किया.
Most Important ????
सुब्रमनियन स्वामी ने भी एक MIT प्रोफेसर के साथ मिलकर ये दिखाया था कि ईवीएम मशीनों को कितनी आसानी से छेड़ा जा सकता है और नतीजे भी बदले जा सकते हैं. तो कुल मिलाकर जो मायावती जी कह रही हैं कि ईवीएम की जांच होनी चाहिए ।।।।

लोकतंत्र के पक्ष में आइए.
#Ban_EVM #Save_Democracy #Repoll_UP

Mohd Aadil
Social Researcher & RTI activities
This petition will be delivered to:Supreme Court of India
Election Commission of INDIA
Parliament
Parliament Of India
Civil Society



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