#CAA2019- सर्वधर्मो मे एकता एंव अखण्ता बनी रहे इस लिए CAA 2019 समाप्त हो

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1 .हम जमीयत उलमा - ए - हिंद और  मिजाने हक  के सदस्य और समर्थक विनम्रतापूर्वक महामहिम एव  प्रधानमंत्री का ध्यान नागरिकता संशोधन विधेयका 2019 की ओर दिलाना चाहते हैं जोकि प्रत्यक्षतः सांप्रदायिकता से प्रेरित है हम इस कानून को निन्दा करते है क्योंकि यह विधेयक भारत की नागरिकता के लिए धर्म को कानूनी आधार बनाताहै ।इसकाउद्देश्यहीन पड़ोसी देशों पाकिसान यांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले उत्पीडित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकमा देगा बसाया गया है लेकिन यह विधेयक धर्म के आधार पर उनमें भेदभाव करता है ।इस से धर्म के आधार पर नागरिकता को विभाजित करने की मंशा स्पाट प्रतीत होतर है ।इस तरह यह देश के बहुलवादी ताने - बाने का उल्लघन करता है ।2 हमारेदेशका चित्र जो हमारे स्वतंत्रता आंदोलन , राष्ट्र के निर्माताओं के विचारों और हमारे संविधान में निहित उसो से निकला है .वह एक ऐसे देश का है जो सभी धर्मों के लोगों के साथ समन व्यवहार करने पर यचनबद है ।संबंधित विल में नागरिकता के लिए एक मानदंश के रूप में धर्म का उपयोग देश के इस इतिहास में पिराम को चिनिए करेगा जो कि कट्टरपंथ पर आधारित है ।यह विराम संविधान की मूल भावना और संरचना के साथ असंगत होणा ।।
3 भारतीय संविधान के अनुछेद 14 और 15 में हर व्यक्ति को कानून के सामने समानता दी गई है और राज्यको किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके धर्म , जाति या पंच के आधार पर कानून के समने भेदभाव करने से रोका गया है ।ऐसा सिद्धांत के विरुद्ध है ।संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित यह विधेयक संविधानको भावना और इसकी मूल संरचना का उल्लंघन करता है।
4 .यह बिल असम समझौरी 1905 का भी उल्लंघन करता है जो अराग में अवैध रूपसेआ बसने वाले विदेशियों का पता लगाने के लिए कट - ऑफ तारीख के रूप में 25 .03 .1971 तय करता है ।इस प्रकार मनमाने वेग से इस समझौते की अनदेखी से उत्तर - पूर्वी क्षेत्रों में शांिपूर्ण माहौल में खलल पड़ रहा है ।
5 .हम इस असंवैधानिक और अमानवीय बिल को अस्वीकार करते हैं और अपने महान देश के सभी प्याय - पेयी और ।धर्मनिरपेदा नागरिकों से अपील करते है कि ये सामूहिक रूप से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाए और इसकेक्रियान्वयनको रोकने के लिए हर संभव कानूनी तरीके से इस का विरोध करें ।
6 .हम भारत के माननीय राष्ट्रपति से अपील करते है कि वे इस कानून के माध्यम से लोगों के साथ अन्याय और सांप्रदायिकता के लक्ष्य को रोकने के लिए अपने गरिमापूर्ण पद के प्रभाव का उपयोग करें ।हम भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय से भी अपील करते है कि वह निंदनीय कानून का स्वंय संज्ञान ले , जिस के लागू हो जाने से संविधान की मूल संरचना नष्ट होजाएगी। 
भारत का संविधान क्या कहता है? और इस कानून का विरोध करना संविधान के दायरे में। 

भारत के संविधान अनुच्छेद 51 व उस के सभी खण्डों का पालन करना हर भारतीय का मूल कर्तव्यों में से है ।
विशेष रूप से अनुच्छेद 51 ( ख ) के अधीन भारत की स्वतंत्रा के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने वाले आदर्शों को अपने दिल में संजोए रखना एंव उनका पालन करने का अधिकार देता है ।
एवं अनुच्छेद 51 ( ग ) के तहत भारत की प्रभुता एकता एवं अखंडता की रक्षा करना हर भारतीय का अधिकार एवं कर्तव्य का पालन करने की अनुमति देता है । 
एवंअनुच्छेद51 ( ङ ) भारत के सभी लोगों में समरसता तथा समान भातृत्व की भावना का निर्माण करना है एवं धर्म , भाष .एवं प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हेने चाहिये ।
भारत का संविधान अनुच्छेद 14 जो भारत राज्य क्षेत्र के अन्तर्गत विधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण को प्रात्याभूत करता है ।व्यक्ति को लागू है जिसके अन्तर्गत गैर नागरिक भी होगा ।अनुच्छेद 15 धर्म मूलवंश जाति लिंग या जन्म - स्थल के आधार पर कोई विभेद नही कर सकता है तो भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून 2019 को बनाते समय उपरोक्त अनुच्छेदों को सामने रखकर क्यो नही बनाया गया है ।
CAA 2019 पूर्ण रूप से असंवेधानिक है इस कारण से इस कानून को तुरन्त वापस लिया जाये ।क्यो की इस कानून को बनाते समय उपरोक्त संविधान के खण्डों , अनुच्छेदों का ध्यान नही रखा गया है ।