बंद करे मीडिया आतंकियों का गुणगान

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पूरी दुनिया में संभवत: भारत इकलौता देश है

जहाँ मुख्यधारा के मीडिया के कुछ देशद्रोही तत्वों द्वारा जवानों के बलिदान की अपेक्षा, आतंकियों के फोटो, विडियो, इंटरव्यू और कहानियां ऐसे दर्शायी जाती हैं जैसे वे आतंकी न होकर कोई महापुरुष हों.

बेगुनाह निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या करने वाले आतंकियों को मीडिया में महिमामंडित करना बेहद शर्मनाक है.

दुनिया भर में कहीं भी भी ऐसी व्यवस्था नहीं है जहाँ आतंकियों का महिमामंडन होता हो.

हाल ही में न्यूज़ीलैंड में हुए आतंकी हमले में वहां की सरकार ने आतंकी का नाम तक नहीं बताया और कहा था कि किसी भी न्यूज़चैनल या अखबार पत्रिका द्वाराआतंकी का नाम किसी को भी नहीं बताया  जाना चाहिये.

बच्चों पर दुष्प्रभाव

मीडिया की इस कारगुजारी का नकारात्मक प्रभाव आतंकग्रसित क्षेत्रों के बच्चों पर भी पड़ता है, जो टीवी पर आतंकियों को देख कर, बिना सोचे समझे, बन्दूक उठा कर आतंकवाद की राह पकड़ लेते हैं.

देशद्रोही तत्वों की कारगुज़ारी

सोशल मीडिया में इन दुर्दांत आतंकवादियों के साथ मीडिया के जाने माने पत्रकार भी दिखते रहते हैं.

सामान्य अवधारणा है कि ऐसे पत्रकारों को भारत विरोधी विदेशी ताकतों से कुछ न कुछ ज़रूर मिलता है जो देशद्रोह को देशभक्ति से ऊपर दिखाने की पुरज़ोर मुहिम चलाते रहते हैं.

यह अवधारणा और भी पुख्ता हो जाती है जब हाफिज़ सईद जैसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकी बरखा दत्त जैसी पत्रकार को पाकिस्तान का हितैषी बताते हैं.

इसे पाकिस्तान के उस अजेंडे के साथ जोड़कर देखना बेहद ज़रूरी हो जाता है जिसके तहत मीडिया के कुछ लोगों को खरीदकर वह सब प्रसारित किया जाता है जो भारत को कमज़ोर करने के काम आये.

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इस याचिका के द्वारा अनुरोध करते हैं कि मीडिया को उचित निर्देश देकर आतंकियों को महिमामंडित करने की कुचेष्टा तुरंत प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए जायें.

वन्दे मातरम्, जय हिन्द