एसपी एवं जज को प्रजा के अधीन करने के लिए "वोट वापसी पासबुक"

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रेडो : थानों-अदालतों-स्कूलों-अस्पतालों को सुधारने के लिए प्रक्रिया 
 ( REDO - Right to Expel & Punish to District level Officers )
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प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट का सारांश : निचे दिए गए क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद भारतीय नागरिक यह बता सकेंगे कि वे मौजूदा एस. पी. , जिला शिक्षा अधिकारी, जिला चिकित्सा अधिकारी एवं जिला जज की नौकरी चालू रखना चाहते है, या उन्हें निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को नौकरी देना चाहते है। साथ ही पुलिस-शिक्षा-चिकित्सा विभाग एवं जिला न्यायालय से सम्बंधित मामलो की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की ज्यूरी के पास रहेगी।

इस कानूनी ड्राफ्ट को संसद या विधानसभा से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री इसे राजपत्र अधिसूचना के रूप में राज्य सरकार के गेजेट में छाप सकते है। यह ड्राफ्ट प्रधानमंत्री द्वारा भी केंद्र सरकार के गेजेट में छापा जा सकता है।  
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कोड : #P20180436109 , #Redo105 , #VoteWapsiPassbook       
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----क़ानून ड्राफ्ट का प्रारंभ----
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[ टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। ]
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भाग (I) - सभी नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर आपको यानी प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी।
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(02) तब यदि आप अपने जिला पुलिस प्रमुख, जिला जज, जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के काम काज से संतुष्ट नहीं है तो उसे नौकरी से निकालने के लिए पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर अपनी स्वीकृति हाँ के रूप में दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दर्ज करवा सकेंगे।
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(03) आप अपनी स्वीकृति किसी भी दिन रद्द कर सकते है एवं किसी भी अन्य प्रत्याशी को किसी भी दिन स्वीकृत कर सकते है। जब आप किसी प्रत्याशी के लिए हाँ दर्ज करेंगे या अपनी स्वीकृति रद्द करेंगे तो पटवारी इसकी एंट्री आपकी वोट वापसी पासबुक में करेगा।
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(04) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश
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(05) इस क़ानून में अभिभावक शब्द का अर्थ होगा - 0 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चो के लिए उसका पिता या उसकी माता, जो उस जिले का मतदाता भी हो। जब तक अभिभावको की सूची नहीं बनती, प्रत्येक मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच है, इस राजपत्र अधिसूचना के लिए अभिभावक माना जायेगा। अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी की नौकरी चालू रखने या निकाल दिए जाने के लिए "हाँ" दर्ज कर सकेंगे।
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(06) एसपी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज के लिए योग्यताएं 
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(6.1) पुलिस प्रमुख : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।

[ टिप्पणी - राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पुलिस प्रमुख की नियुक्ति इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेगी। ]
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(6.2) चिकित्सा अधिकारी : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए आवश्यक जैसे MBBS, BAMS या इसके समकक्ष डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष पूर्ण हो चुके हो, तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.3) जिला जज : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जज पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(6.4) शिक्षा अधिकारी एवं जूरी प्रशासक : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला न्यायवादी ( जूरी प्रशासक ) पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(07) धारा 6 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(08) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए "हाँ" दर्ज करना 
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(8.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, जिला जज, जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को उम्मीदवारो के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के उम्मीदवारों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(8.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(8.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(8.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।

टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100) से -100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता कोई स्वीकृति दर्ज नहीं करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता अंक दर्ज करता है तो उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ] 
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(09) पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति 
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(9.1) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 50% से अधिक मतदाता पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख या शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है। इस बारे में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा।
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(9.2) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला चिकित्सा अधिकारी, जिला जूरी प्रशासक के किसी उम्मीदवार के पक्ष में "हाँ" दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(9.3) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला जज के किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति की विनती के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी लिख सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश करेंगे।
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(9.4) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी अभिभावकों के 35% से अधिक अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी के किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री उसकी नियुक्ति कर सकते है।
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(10) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त मतदान की अतिरिक्त प्रक्रिया 
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(10.1) मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि, जब भी जिले में कोई आम चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, ग्राम पंचायत चुनाव, तहसील पंचायत चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, सांसद का चुनाव, विधायक का चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव करवाया जाएगा तो इन चुनावों के साथ राज्य चुनाव आयुक्त एस.पी. के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखेगा, ताकि जिले के मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा एस.पी. की नौकरी चालू रखना चाहते है या किसी अन्य व्यक्ति को एस.पी. की नौकरी देना चाहते है।
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(10.2) यदि कोई उम्मीदवार जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है ) के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे सकते है, या 50% से अधिक मत प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(11) यदि कोई व्यक्ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे । किन्तु यदि पुलिस प्रमुख गुप्त मतदान की प्रक्रिया में जिले के 50% से अधिक मत प्राप्त कर लेता है तो मुख्यमंत्री उसे पद पर बनाए रख सकते है।
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(12) विशिष्ट परिस्थितियों में राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 50% से अधिक मतदाताओं की स्पष्ट स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री किसी जिले में पुलिस प्रमुख के लिए नागरिको द्वारा स्वीकृत करने की इस प्रक्रिया एवं उसके स्टाफ पर जूरी ट्रायल प्रक्रियाओ को 4 वर्ष के लिए हटाकर अपने विवेकाधिकार से उस जिले में नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है। किन्तु मुख्यमंत्री जिला शिक्षा अधिकारी, जिला जज एवं जिला चिकित्सा अधिकारी को स्वीकृत करने की प्रक्रियाए तब भी जारी रख सकते है।
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(13) मतदाताओ या अभिभावकों की स्वीकृति से नियुक्त हुआ शिक्षा अधिकारी एक से अधिक जिलो का भी शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का, और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिलो का शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता, बोनस आदि मिलेगा।
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(14) पुलिस-शिक्षा-न्यायालय-चिकित्सा विभाग के मामलो का जूरी ट्रायल 
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(14.1) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने पर आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई तय करनी होगी।
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(14.2) जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महा जूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महा जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(14.3) यदि पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, चिकित्सा अधिकारी या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(14.4) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(14.5) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु मृत्यु दंड में 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(15) जनता की आवाज 
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 20 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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----ड्राफ्ट का समापन----