केन्द्रीय अधिकारियों को प्रजा अधीन के लिए "वोट वापसी पासबुक"

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रेको - नागरिको द्वारा केन्द्रीय अधिकारीयों को निकालने व दण्ड देने का प्रस्ताव
 
( Proposed Notification ; RECO - Right to Expel & Punish Central level Officers )

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इस कानून का सार : यदि प्रधानमंत्री इस क़ानून को गेजेट में छाप देते है तो प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर यह बता सकेंगे कि वे मौजूदा DD चेयरमेन, RBI गवर्नर, CBI डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन की नौकरी चालू रखना चाहते है, या उन्हें निकाल कर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है। इस वोट वापसी पासबुक में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, एसपी, जिला जज आदि के पन्ने भी जोड़े जा सकेंगे, ताकि जरूरत होने पर आप अपना वोट वापिस ले सके। साथ ही दूरदर्शन, रिजर्व बैंक, सीबीआई एवं सेंसर बोर्ड से सम्बंधित शिकायतों की सुनवाई करने तथा दंड देने की शक्ति जजो के पास नही, बल्कि आम नागरिको की जूरी के पास रहेगी। इस कानून को संसद या विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा सीधे गेजेट में छापा जा सकता है।  #Reco106 , #VoteWapsiPassBook , #P20180436106 

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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।

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भाग (I) सभी नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर आपको यानी प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक  मिलेगी।
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(02) तब यदि आप दूरदर्शन चेयरमेन, रिजर्व बैंक गवर्नर, CBI डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन के काम काज से संतुष्ट नहीं है तो उसे नौकरी से निकालने के लिए पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर अपनी स्वीकृति हाँ के रूप में दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दर्ज करवा सकेंगे।
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(03) आप पटवारी कार्यालय में जाकर अपनी स्वीकृति किसी भी दिन रद्द कर सकते है एवं किसी भी अन्य प्रत्याशी को स्वीकृत कर सकते है। जब आप किसी प्रत्याशी के लिए हाँ दर्ज करेंगे या अपनी स्वीकृति रद्द करेंगे तो पटवारी इसकी एंट्री आपकी वोट वापसी पासबुक में करेगा।
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(04) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के लागू होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आप आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत देखकर बहस सुनेंगे और सजा या रिहाई का फैसला देंगे।
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भाग (II) : नागरिकों एवं अधिकारियों के लिए निर्देश
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(05) योग्यताएं एवं आवेदन : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि DD चेयरमेन या RBI गवर्नर या CBI डायरेक्टर या सेंसर बोर्ड चेयरमेन या जूरी प्रशासक बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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(06) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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(6.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर DD चेयरमेन या RBI गवर्नर या CBI डायरेक्टर या सेंसर बोर्ड चेयरमेन या जूरी प्रशासक के उम्मीदवारों के समर्थन में “हाँ” दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशी के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है। कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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(6.2) स्वीकृति ( = हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(6.3) यदि कोई मतदाता स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(6.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कैबिनेट सचिव पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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टिप्पणी : रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(07) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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यदि किसी उम्मीदवार को देश की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) की 35% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा अधिकारी को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति सम्बंधित पद पर कर सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा।
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(08) दूरदर्शन, RBI , CBI व सेंसर बोर्ड के मामलो का नागरिको की जूरी द्वारा निपटान :
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[ टिप्पणी : प्रधानमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 9.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(8.1) जूरी प्रशासक दिल्ली राज्य की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(8.2) यदि DD चेयरमेन या RBI गवर्नर या CBI डायरेक्टर या सेंसर बोर्ड चेयरमेन या उनके स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत महाजूरी मंडल से कर सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है। यदि मामला किसी अन्य राज्य या जिले का है तो महा जूरी मंडल सम्बंधित जिले की मतदाता सूचियों से जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(8.3) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच कितने सदस्यों की जूरी बुलानी चाहिए। जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों को चुनते हुए एक जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(8.4) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु मृत्यु दंड या नार्को टेस्ट का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(09) जनता की आवाज :
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(9.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(9.2) कोई भी मतदाता पटवारी कार्यालय में 3 रूपये जमा करवाकर धारा 9.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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--------क़ानून ड्राफ्ट का समापन--------
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न जो इस क़ानून का प्रभाव समझने में सहायक है :
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(1) भारत को इस क़ानून की जरूरत क्यों है ?
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लगभग 240 साल पहले जब अमेरिका इंग्लेंड से आजाद हुआ, और वहां वोट देने का क़ानून आया तो नागरिको ने कहा कि अगर चुनाव जीतने के बाद नेता हमारी बात सुनना बंद कर देंगे तो हम उसे 5 साल से पहले कैसे हटायेंगे। इस समस्या के इलाज के लिए अमेरिका में वोट वापिस लेने का क़ानून भी लाया गया। वोट वापिस लेने का क़ानून होने से अमेरिका के नागरिक जब देखते है कि कोई नेता या अधिकारी एकदम निकम्मा हो गया है, तो वे उसे हटाने के लिए 5 साल तक इन्तजार नहीं करते, बल्कि अपना वोट वापिस लेकर उसे पहले ही बदल देते है। निकाले जाने के डर की वजह से अमेरिका के नेता एवं अधिकारी अपने काम में लगातार सुधार करते रहते है। जो काम नहीं सुधारता उसे वहां के नागरिक नौकरी से निकाल देते है। ठीक वैसे ही जैसे प्राइवेट कम्पनी में यदि कर्मचारी ठीक से काम नहीं करता तो मालिक उसे नौकरी से निकाल देता है।

इसके अलावा जब किसी नेता या अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की कोई शिकायत आती है तो मुकदमे की सुनवाई जज की जगह नागरिको की जूरी करती है। जूरी सिस्टम के कारण भ्रष्ट नेताओं-अधिकारियो को तुरंत दंड मिलता है और वे सलीके से काम करते है। जब भारत आजाद हुआ और वोट देने का कानून आया, तो भारतीय नागरिको ने भी यह मांग की थी कि वोट वापिस लेने का क़ानून भी बनाओ, ताकि निकम्मे एवं भ्रष्ट नेता-मंत्री-अधिकारी को हम छांट कर नौकरी से निकाल सके। पर उस समय के नेताओ ने इस क़ानून को गेजेट में छापने से मना कर दिया। तो भारतीयों के पास भ्रष्ट एवं निकम्मे नेताओं-अधिकारियो को नौकरी से निकालने का कोई तरीका नहीं होने के कारण चुनाव जीतने के साथ ही नेताओं को 5 साल की और सरकारी अधिकारी को 30 साल की पट्टेदारी मिल जाती है। अत: वोट वापसी क़ानून लाये बिना नेताओं एवं अधिकारियों के काम काज में सुधार नहीं लाया जा सकता।
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(2) यह क़ानून गेजेट में आने से किस तरह के परिवर्तन आयेंगे ?
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2.1. इस समय CBI डायरेक्टर पीएम एवं नेताओं के नियन्त्रण में काम करता है, अत: वह चाह कर भी रसूख दार एवं उच्च पदस्थ लोगो के खिलाफ जाँच नहीं खोल सकता। यह क़ानून आने के बाद CBI डायरेक्टर नेताओं के चंगुल से आजाद होकर जनता के प्रति जवाबदेह हो जाएगा और सिर्फ 6 महीने के भीतर ही नेताओं, मंत्रियो, जजों, और शीर्ष अधिकारियो के संगठित भ्रष्टाचार में 70% तक की गिरावट आ जायेगी। इस समय CBI डायरेक्टर मंत्रियो को खुश रखने के हिसाब से ही काम करता है। जब सांसद, मंत्री एवं प्रधानमन्त्री CBI डायरेक्टर को ट्रांसफर और सस्पेंड करने की शक्ति खो देंगे सिर्फ तब ही CBI डायरेक्टर इनके खिलाफ जाँच कर सकेगा।

2.2. इसी तरह से दूरदर्शन चेयरमेन प्राइवेट चेनलो को पछाड़ने के लिए दूरदर्शन के प्रसारण को सुधारना शुरू करेगा, जिससे विदेशी मीडिया चेनलो का दबदबा कम हो जायेगा, और इनके द्वारा प्रसारित की जा रही पेड न्यूज, फर्जी खबरों, अपसंस्कृति, नग्नता में गिरावट आएगी। सेंसर बोर्ड चेयरमेन के कारण यही सुधार टीवी एवं फिल्मो में आयेंगे। सामाजिक, धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाली और भारतीय इतिहास-संस्कृति का विद्रूप चित्रण करने वाली फिल्मों एवं सीरियलों में भी गिरावट आएगी।

2.3. महंगाई बढ़ने और सरकारी बैंको द्वारा धनिकों को दिए जा रहे लोन के घपलो के लिए मुख्य रूप से जवाबदार रिजर्व बैंक का गवर्नर है। जब गवर्नर को नौकरी से अधिकार जनता के पास रहेगा तो देश के सभी बैंक ठीक से काम करने लगेंगे।
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(3) वोट वापसी पासबुक मिलने के बाद हम किन किन अधिकारियो एवं नेताओं का वोट वापिस ले सकते है ?
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इस क़ानून के गेजेट में आने के बाद आम भारतीय को DD चेयरमेन, RBI गवर्नर, CBI डायरेक्टर एवं सेंसर बोर्ड चेयरमेन को नौकरी से निकालने का अधिकार मिल जाएगा। लेकिन एक बार हम भारतीयों को यदि वोट वापसी पास बुक मिल जाती है तो बाद में इसमें एसपी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला चिकित्सा अधिकारी, जिला जज, विधायक, सांसद, सरपंच, प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री आदि के पन्ने भी जोड़े जा सकते है।
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