सड़क के मानसिक विछिप्ततों को आश्रय

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आज सड़कों पे मानसिक विछिप्त सड़े गले हालत में मिल जाते हैं। जिनको भोजन, चिकित्सा, कपड़े और आश्रयगृह कि नितांत आवश्यकता है। पर समाज और सरकार की स्थिलता की वजह से इन्हें पशुवत जिंदगी का सामना करना पड़ता है।

और जब मैं आज़ाद पाण्डेय स्वयं "Smile Roti Bank" के बैनर तले बेसहारा मानसिक विछिप्तों के दो अलग अलग पुरुषों हेतु "स्माईल होम" और माताओं के लिए "मातृछाया" के संचालन में लगा हूँ। तो तमाम समस्याओं से जूझते हुए टीम को देखता हूँ। विकट परिस्थिति में इन मानसिक मन्दित मानवों की सेवा में लगी है स्माईल टीम।

आप महोदय से अनुरोध है कि, मानसिक रुप से मन्दित बेसहारा लोगों के लिए न्यायगत व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि भारत के गौरवशाली इतिहास पे मानवता को  शर्मिंदा न होना पड़े।

स्माईल रोटी बैंक ट्रस्ट के अध्यक्ष के रुप में हम आपके आभारी रहेंगे।।