कारपोरेट की नौकरियों में काम के घंटे कम किए जाए

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इस समय कारपोरेट जगत की नौकरियों मैं लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को अधिकाधिक समय काम पर लगाने का चलन बढ़ रहा है कंपनियों के आंकड़ों में इसे केवल 8 घंटे का दिखाया जाता है जबकि वास्तविक रूप से यह 12 से 14 घंटे तक जा रहा है लेबर एक्ट के अनुसार कोई भी कंपनी 8 घंटे से अधिक की शिफ्ट में काम नहीं करा सकती परंतु कंपनियां इसे ताक पर रखकर अपने कर्मचारियों से 12 से 14 घंटे तक काम ले रही हैं साथ ही साथ उनकी अवकाश वाली दिनों में भी काम लिया जाता है उदाहरण के लिए कई सारी क्रेडिट कार्ड कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी अवकाश के दिनों में भी काम पर लगा दिए जा रहे है  तथा सुबह 10:00 बजे बुलाकर उन्हें रात को 10:00 बजे के बाद छोड़ा जाता है इससे समाज का ताना-बाना गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है पारिवारिक समस्याओं की वृद्धि हो रही है डिप्रेशन आदि तमाम बीमारियां बड़ी संख्या में बढ़ रही हैं इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी अपने परिवार को बमुश्किल ही समय दे पाते हैं उनका ऐसा जीवन न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि समाज में अच्छे नागरिक तैयार करने की दिशा में एक घातक कदम है अतः सरकार को चाहिए कि किसी भी प्रकार से कंपनियों की लाभ लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाए जिससे कर्मचारी कार्यालय समय के बाद अपने परिवार को भी समय दे सके यदि कोई कर्मचारी कंपनी में इस प्रकार की मांग रखता है तो उसकी नौकरी जाने का खतरा रहता है अतः शोषण की यह परिपाटी बहुत समय से चली आ रही है अतः सरकार से मेरा आग्रह है श्रम मंत्रालय ऐसी कंपनियों पर छापेमारी करके एवं हेल्पलाइन बनाकर कर्मचारियों की समस्या सुलझाए जिससे कि उनके पारिवारिक जीवन ठीक से चल सके