#twochildpolicy

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यह सर्वविदित तथ्य है कि भारत  की जनसंख्या जिस तेजी से बढ़ रही है उतने ही संसाधन  घटते जा रहे है| शहरीकरण ने वनों को लील लिया है| प्रकृति की नियत व्यवस्था में हस्तक्षेप  करने का दंड हम भुगत रहे है| वैश्विक तापक्रम वृद्धि, भूजल का गिरता स्तर, अनियमित  वर्षा, प्रदूषण में वृद्धि जैसे अनेकों दंड हमें मिल रहे है पर हम अब भी अचेत है| क्योंकि  तेजी से अब भी वनों को काट रहे है| कृषि योग्य भूमि व चरागाह तो नाममात्र के रह गये  है| नए वृक्ष लगाना तो दूर, वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है| मनुष्य जीवन के सोलह  संस्कारों में वृक्ष की उपस्थिति अनिवार्य है| वनों को नष्ट करने से पूरी व्यवस्था  दुष्प्रभावित होती है|

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