I request a strict law which prohibits Bhojpuri Singers to produce vulgar & cheap songs.

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सेवा में ,

आदरणीय मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार जी ,

विषय- भोजपुरी गानों में फ़ैल रही अश्लीलता के विरुद्ध में एक कानून लाने के लिए

एक जिम्मेदार युवा नागरिक की तरह मै आपका ध्यान इस मुद्दे पे आकर्षित करना चाहता हूँ। इस आशा और उम्मीद के साथ की आप इस जागरूकता का संज्ञान लेते हुए कुछ तत्परता दिखाएंगे।

मैं अपने समाज को मानसिक रूप से इस गंदगी , का शिकार नहीं होने दूंगा। ये एक प्रयास है उन सभी युवा वर्ग के लोगों को इस जंजाल से मुक्त करने का।

मैं एक युवा हूँ, युवा वर्ग की मानसिकता एवं physchology बहुत नजदीक से समझता हूँ। समाज के वो युवा जो अभी अभी युवा हो रहे हैं 10 से 25 साल के लोग , teenagers group, इनके दिमाग में अगर बचपन में जहाँ ऐसी बात चली जाए, तो कैसा समाज निर्माण हो रहा है,

भोजपुरी हमारी एक सांस्कृतिक विरासत है

एक ऐसा समाज जो की मानसिक रूप से खोखला है,

अतः आपसे आदरपूर्वक निवेदन है कि जिस तरह की तत्परता एवं इच्छाशक्ति आपने शराबबंदी , दहेज़ मुक्त बिहार के लिए बनाया है वैसी ही एक चेतना आप इस अश्लीलता के विरुद्ध भी लाएं।
शास्त्रों में नारी की गरिमा का विस्तृत उल्लेख है
ये अश्लीलता समाज को एक गलत दिशा में ले जा रही है, जहाँ नारी के सम्मान को आहत पहुच रहा है,

हमारे यहाँ आज समाज में हर दिन अख़बार में रेप जैसी वारदात हो रही है। इसके पीछे बहुत सारे कारक हैं जिनमे प्रमुख है अश्लीलता।

भोजपुरी की अस्मिता आज खतरे में है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं और बहुत खेद के साथ लिखूंगा की, "भोजपुरी सिनेमा एवं गाना आज एक फूहड़ता का पर्याय बन चूका है।" दो अर्थ वाले , बेहद आपत्तिजनक गाने जब सड़क पे चलते सुनता हूँ, तो शर्म से नजरें नीची हो जाती है, स्थिति और भी बुरी हो जाती है जब आप परिवार के साथ कहीं जा रहे हो तो। एक मर्यादायुक्त समाज के लिए ये बहुत ही शर्मनाक और खेद प्रकट करने वाली बात है। भोजपुरी में बनी एक फिल्म आज की तारीख में हम पुरे परिवार के साथ बैठ कर नहीं देख सकते।

आजकल के भोजपुरी गाने जिस प्रकार से अश्लीलता का प्रचार कर रहे हैं मुझे बहुत दुख और अफ़सोस होता है जब मै इसका दुष्प्रभाव आने वाले पीढ़ियों पे होता देख रहा हूँ।

पिछले साल की ही बात है। पद्म विभूषण सम्मानित आदरणीय शारदा सिन्हा जी को लाइव सुन रहा था, मेरे सबसे अजीज गानों में से एक है छठ में शारदा सिन्हा जी के लोकगीत। लेकिन जानकार ये हैरानी हुई की आजकल के नए गायक जो की नए नए प्रयोग कर रहे हैं। छठ जैसी पवित्र महापर्व के लोकगीतों में भी अश्लीलता का समावेश कर रहे हैं।

अब सोचिये। रोड पे चलते चलते अगर आपको कुछ ऐसे दो अर्थों वाले गाने सुनने को मिले तो सहसा मन चौक जाता है।

मैं एक अपील बिहार के आवाम से भी करना चाहूंगा कि आप सभी ऐसे फूहड़ गीतों का बहिष्कार करें। जनता वैसे गीत सुनेगी ही नही तो ये उन गीत लिखने वालों और भद्दे गाने बनाने वालों के लिए सबसे बड़ा जवाब होगा जो की उन्हें अपना स्तर सुधारने को प्रतिबद्ध करेगा।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस हेतु कुछ ठोस कदम उठाएं । बिहार का गौरव बढ़ाने वाले इस साहसिक फैसले के लिए बिहार की जनता दिल से आपका सदा आभारी रहेगी।

अभिषेक रंजन

एक जिम्मेदार नागरिक
पूर्वी चंपारण , मोतिहारी

845401

बिहार।