मिथिला मे बंद परे चीनी मील खुलवाने हेतु

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सेवा में,

प्रधान मंत्री भारत सरकार

प्रधान मंत्री कार्यालय

दक्षिण ब्लॉक, रायसीना हिल
नई दिल्ली -110011
फ़ोन नंबर: + 91-11-23012312
फैक्स: + 91-11-23019545, 23016857

 

महाशय,
सविनय निवेदन है कि हम बिहार के मिथिला प्रांत के छात्र है जो कि अपने संस्कृति, कला, और सभ्यता के लिए जानी जाती है  ।

मैं आपका ध्यान उतर बिहार के  मिथिला क्षेत्र के ओर दिलाना चाहुँगा पिछले कई सालों से शुगर इंडस्ट्री बंद परे है अगर राज्य सरकार या केंद्र सरकार प्रयास करे खोलने को तो ग्रामीण क्षेत्रों के रोजगार उपलब्ध एवं विकास में सुविधाएं भी प्रदान हो सकता है मिथिला के 89% लोग गाँव में रहते हैं और 70% लोग कृषि के कमाई पर ही निर्भर है | उपजाऊ मिट्टी और भरपूर पानी होने के बाबजूद कृषि बदहाल है | आजादी के समय मिथिला क्षेत्र में देश का 50% चीनी का उत्पादन होता था और आज वीरान पड़ी चीनी मिल की जमीन हमारी बर्बादी की दास्ताँ चीख चीख कर कह रहीं हैं | गाँव-गाँव में पलायन, गरीबी, कुपोषण ने जड़ जमा लिया है और आज के समय में मजदूरों की तो बात छोर दें, किसान के बच्चे भी शहरों में मजदुरी करने को अभिशप्त हैं पुरे बिहार में 28 चीनी मिल है जिसमें से वर्तमान में 18 बंद पड़ा है | रैयाम शकरी दरभंगा, लोहट मधुबनी, मोतीपुर मुजफ्फरपुर, गरौल वैशाली, बनमनखी पूर्णिया के ये पांच चीनी मिल हमारे यहाँ बंद पड़े हैं और तथा समस्तीपुर वाले मिल को राज्य सरकार ने बंद कर दुसरी उद्योग लगाने को दे दिया है | इन पांचो मिल को खोलने के लिए बिहार सरकार और केंद्र सरकार के लिए बहुत बारे चुनौती दिख रहा है पर मिथिला स्टूडेंट यूनियन बार बार मांग कर रहे है शुगर मिल खोलने के लिए जिसे छेत्र और छात्र को साथ ही किसान को लाभ मिले और मिथिला छेत्र को विकास हो   

चीनी मिल के खुलने से होने वाला फायदा: 
1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तक़दीर बदल जायेगी |
2. खेती के फायदेमंद होते ही हर घर की आमदनी बढ़ जायेगी |

3. किसानों और मजदूरों का पलायन रुकेगा |

4. FMCG के बाजार में नया जान आयेगा और व्यापार बढेगा |

5. नौजवानों में बेरोजगारी कम होगा और हर घर के बच्चे अच्छे स्कूल में पढेंगे |

6. प्रति बीघा खेती पर लाख रूपया का कमाई बढ़ेगी | 

7. महाराष्ट्र पंजाब के गाँवों के तरह हमारे गाँव में भी संपनता आयेगी |

क्या ये सच नहीं :


1. हम मज़बूरी में अपने बड़े घर को छोड़ बड़े शहरों के 10*10 के कमरे में दो -तीन लोग रहने को अभिशप्त हैं |

2. हमारी पूरी जवानी खप जाती है कुछ हजार रुपयों की नौकरी करने में |

3. आज भी हमारे मिथिला के 80% नौजवानों का " शिक्षा में लगने वाला खर्च " पूरी तरह कृषि के आमदनी पर ही निर्भर है और चीनी मिल खुलते ही हमारा तक़दीर बदल जायेगा | 

4. हमारी कमाई का आधा हिस्सा घर के किराये में खर्च हो जाता है |

5. आजादी के समय तक हमारा गाँव सुखी संपन था तो क्या आज ये संभव क्यूँ I

6. चीनी मिल के कमाई से ही महाराष्ट्र, यूपी, तमिलनाडु के गाँव गाँव में सम्पनता आयी है तो ये हमारे मिथिला में भी संभव है |

मिथिला स्टूडेंट यूनियन "MSU" छेत्र और छात्र के विकास के लिए प्रतिबधू है और हर संभव कोसिस करेंगे अपने देश, राज, शहर, गॉव, तथा किसान के विकास के लिए आशा करते है I केंद्र सरकार से निवेदन है कि MSU द्वारा दिया गया आवेदन पर धियान देने के कृपया करे I 

समास्त मिथिला वाशी 

भवदीय,
अमित झा

मिथिला स्टूडेंट यूनियन