#JaanSastiNahin : यमुना एक्सप्रेस-वे को सुरक्षित बनाने के लिए उठाएं ठोस कदम

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वो दिल्ली में नौकरी करता था और अकेले घर चलाता था। सालों पहले उसके पिता गुजर चुके थे, घर पर केवल माँ थी और एक बहन। सफर पर निकलने से पहले उसने बहन से वादा किया था कि रक्षाबंधन पर ज़रूर आएगा, वो नहीं आया, उसकी मौत की खबर आई।
 
अब वो बहन किसकी कलाई पर राखी बांधेगी? अब वो परिवार कैसे चलेगा?

यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए ताज़ा हादसे ने ना जाने कितने परिवारों से ऐसे बेटे और बेटियों को छीना है। 
 
हादसे में 29 लोगों की मौत हुई थी। इसमें किसी के घर का इकलौता चिराग बुझ गया तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। पहली नौकरी के लिए निकलने वालों के लिए ये आखिरी सफर बन गया।

हादसे बताकर नहीं आते पर जब एक ही जगह ये हादसे बार-बार हों तो वो हादसे नहीं लापरवाही कहलाते हैं।

मीडिया के अनुसार यमुना एक्सप्रेस-वे पर अब तक 700 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 7000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इसपर 5000 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं तभी तो मीडिया में इसे "मौत का हाईवे" भी कहा जाने लगा है।

अगर हम अब भी चुप रहे तो आज नहीं तो कल हम और हमारे अपने इस "मौत के हाईवे" के शिकार हो सकते हैं।

इसलिए मैंने उत्तर प्रदेश सरकार के नाम ये पेटीशन शुरू की है ताकि यमुना एक्सप्रेस-वे पर तुरंत क्रैश बैरियर लगाए जाएं और एक्सप्रेस-वे पर हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे ज्यादा ये ज्यादा शेयर करें ताकि फिर किसी परिवार का अकेला कमाने वाला अपनी जान ना खोए, ताकि फिर बच्चों से माता-पिता का साया ना उठे।

आपको बता दूँ कि सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) की टीम का भी सुझाव था कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर क्रैश बैरियर लगाए जाएं ताकि हादसों में कोई वाहन सड़क के दूसरी तरफ न जा सके।

अभी उसकी जगह कटीली तार का प्रयोग होता है, जो कि बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्रैश बैरियर लग जाने से बसों के हादसों पर लगाम लगेगी।

मैंने खुद यमुना एक्सप्रेस-वे से गुजरते हुए कुछ हादसों को करीब से देखा है। ऐसे हादसों में जान केवल एक व्यक्ति की नहीं जाती, उसके साथ एक तरह से उसके परिवार की भी जान चली जाती है।

मैं जानती हूँ कि लोगों की एक मानसिकता बन गई है कि ऐसे हादसों का कुछ किया नहीं जा सकता। पर सच कहूँ तो ये टाले जा सकते हैं, जानें बचाई जा सकती हैं। ज़रूरत है तो बस मिलकर आवाज़ उठाने की।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और सरकार से कहें कि हम भारतीयों की जान इतनी सस्ती नहीं। हमें "मौत का हाईवे" नहीं "ज़िंदगी का हाईवे" चाहिए।

#JaanSastiNahin