प्रियांशु को बचा लीजिए : एक मासूम की ज़िंदगी अब आप के हाथों में है

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प्रियांशु, एक दिहाड़ी मज़दूर का बेटा है, जो मध्य प्रदेश के भोपाल का निवासी है। प्रियांशु अभी 3 महीने का ही था कि उसे एक ऐसी बिमारी हो गई, जिससे उसकी जान को खतरा है। दरअसल ये एक दिल की बीमारी है, जिसमें गंदा और साफ खून मिल जाता है, जिसके कारण फेफड़ों को भी भारी नुकसान पहुँचता है।

प्रियांशु का इलाज कर रहे डॉ राकेश मिश्रा बताते हैं कि ये बीमारी कितनी दुर्लभ है। पूरी दुनिया में करीब 0.5% लोगों को ही ये बीमारी होती है। डॉ साहब कहते हैं, “ प्रियांशु के दिल के दोनों आउटलेट बेहद करीब हैं, जिसके कारण साफ और गंदा खून मिल जाता है।”

2015 में एक सर्जरी की मदद से प्रियांशु को नया जीवन मिला, जिसके कारण वो अभी तक ज़िंदा है। इस सर्जरी में उसके दिल की पल्मूनरी आर्टरी की बैंडिंग की गई, जिससे प्रियांशु के फेफड़े में खून के बहाव के प्रेशर को कम किया गया ताकि उसका फेफड़ा खराब ना हो। इसी सर्जरी की वजह से वो आज साँसे ले रहा है पर ये स्थायी इलाज नहीं है और प्रियांशु की जान को अभी भी खतरा है।

प्रियांशु की जान बचाने के लिए जितनी जल्दी हो सके, एक रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी करनी होगी पर इसमें भी उसकी जान को खतरा है। प्रियांशु के माता-पिता ने दिल्ली के ऐम्स और फोर्टिस अस्पताल, बेंगलुरू के नारायण हृदयालय और पुणे के रूबी और जहाँगीर अस्पताल की भी मदद लेनी चाही पर हर जगह यही कहा गया कि देश में ये सर्जरी संभव नहीं है।

इस सब के बाद भी प्रियांशु के माता-पिता ने बेटे की जान बचाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया और कुछ ज़िम्मेदार और भले लोगों की मदद से उन्हें अमेरिका स्थित डॉ सीताराम एमानी का पता चला। डॉ सीताराम, बॉस्टन चिल्ड्रेन अस्पताल के हार्ट सेंटर में काम करते हैं। इस अस्पताल ने पहले इस दुर्लभ बीमारी का सर्जरी द्वारा सफल इलाज किया है। डॉ सीताराम को पूरी उम्मीद है कि प्रियांशु की जान बचाई जा सकती है।

लेकिन इस उम्मीद तक पहुँचने के लिए प्रियांशु के माता-पिता सक्षम नहीं हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि अपने लाडले को बॉस्टन तक ले जा सकें।

2017 में बॉस्टन के इस अस्पताल में प्रियांशु का इलाज 1.65 करोड़ में हो जाता लेकिन तब तक पैसों का इंतेज़ाम नहीं हो सका और प्रियांशु की हालत और बिगड़ गई। इसकी वजह से अब प्रियांशु की 2 सर्जरी करनी होगी, जिसका अनुमानित खर्च 2.2 करोड़ के करीब आएगा।

अच्छी बात ये है कि कुछ लोगों ने प्रियांशु के पिता की मदद का बीड़ा उठाया और उनकी आर्थिक मदद की। आम नागरिकों के सहयोग से 60 लाख की राशि जुटाई जा सकी पर इतने पैसों से उसका इलाज नहीं हो पाएगा, वो बॉस्टन नहीं जा पाएगा।

ये पेटीशन लिखते समय हमें इसी बात का डर है कि कहीं प्रियांशु को कुछ हो ना जाए। हर गुज़रता लम्हा प्रियांशु और उसके माता-पिता के लिए अग्नि परीक्षा की तरह है। प्रियांशु को जल्द से जल्द इलाज के लिए बॉस्टन भेजना होगा वर्ना आम नागरिकों द्वारा दी गई इस राशि का भी कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

आपको तो पता ही होगा कि किसी गरीब को सर्दी-बुखार भी हो जाए तो वो सोच में पड़ जाता है कि उसकी दवा कैसे करे। लिखने की ज़रूरत नहीं है कि इतनी बड़ी बीमारी के इलाज का खर्च तो प्रियांशु के परिवार के लिए उठाना असंभव है। प्रियांशु के माता-पिता बस इसी उम्मीद में जी रहे हैं कि कहीं से मदद आ जाएगी तो उनके बेटे की जान बच जाएगी।

अगर आम नागरिक मिलकर 60 लाख जुटा सकते हैं तो सरकार और उसके नुमाइंदे भी तो प्रियांशु की मदद कर सकते हैं।

इसलिए हमारा साथ दीजिए और इस पेटीशन पर हस्ताक्षर कर के इसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी तक पहुँचाइये। हम उनसे माँग करते हैं कि वो अपने राज्य के इस गरीब परिवार की मदद करें। आम नागरिकों ने प्रियांशु के लिए 60 लाख जुटाए और अब हम चाहते हैं कि सरकार बाकी के 1.60 करोड़ का इंतेज़ाम कर के प्रियांशु की जान बचा ले।

इस पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे घर-घर पहुँचा दें ताकि प्रियांशु और बॉस्टन के चिल्ड्रेन अस्पताल के बीच की दूरी को कम किया जा सके और वहाँ जाकर उसका इलाज हो और वो स्वास्थ होकर अपने देश लौट आए।

#SavePriyanshu