मूक-बधिर बच्चों के सिर से छत ना छीनी जाए, सुरक्षित पुनर्वास हो

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“65 खास बच्चों का भविष्य अधर में, टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर फॉर द डेफ(TTCD) को तोड़ने जा रहा बीएमआरसीएल(BMRCL)!”
 
ये बस एक खबर की हेडलाइन नहीं है, बल्कि उन मासूम बच्चों की चीख है, जिन्हें ठीक से सुनाई भी नहीं देता। उनका घर तोड़ दिया जाएगा अगर हमने उनके लिए आवाज़ नहीं उठाई।
 
आपको कैसा लगेगा जब दिनभर की थकान के बाद आप अपने घर लौटें और उसपर एक नोटिस लगा हो कि उसे तोड़ दिया जाएगा। इसलिए तोड़ दिया जाएगा क्योंकि वहाँ एक मेट्रो स्टेशन बनना है।
 
बेंगलुरू स्थित टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर फॉर द डेफ(TTCD) के मासूम बच्चों के साथ वही हो रहा है। उन मूक-बधिर बच्चों के सिर से उनकी छत छीनी जा रही है। बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) वहाँ एक मेट्रो स्टेशन बनाना चाहती है।

हमने ये पेटीशन शुरू की है ताकि BMRCL सार्वजनिक रूप से ये वादा करे कि वो टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर फॉर द डेफ(TTCD) के सभी 65 बच्चों का सुरक्षित पुनर्वास कराकर ही मेट्रो स्टेशन का काम आगे बढ़ाएगी।

हमारी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें ताकि इन मूक-बधिर बच्चों के सिर पर एक छत हो।

BMRCL के लिए ये सेंटर ज़मीन का एक टुकड़ा होगा पर ये ज़मीन इन बच्चों का एकमात्र घर है, उनका एकमात्र सहारा है।

टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर फॉर द डेफ(TTCD) में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों से आए गरीब बच्चे रहते हैं। अगर ये सेंटर नहीं होगा तो ये मासूम बच्चे सड़क पर आ जाएंगे, जहाँ इनके साथ कोई भी हादसा या अपराध होने की संभावनाएं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो TTCD में बेसिक सुविधाओं का आभाव है, टीचरों को महीनों से सैलरी नहीं मिली, लेकिन इस सबके बावजूद बच्चों ने इस आशियाने को अपने प्यार से बचाए रखा है। बच्चों ने इस्कॉन मंदिर से खाने का इंतेज़ाम किया है, टीचर बिना सैलरी के पढ़ा रहे हैं क्योंकि वो जानते हैं कि इन बच्चों का और कोई सहारा नहीं है।

लेकिन बच्चों से उनका ये आखिरी सहारा भी छिन जाएगा अगर पुनर्वास की योजना के बिना उनके घर को तोड़ दिया जाएगा।

कृपया हमारा साथ दें और इस पेटीशन पर हस्ताक्षर कर के इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें ताकि बच्चों का सुरक्षित पुनर्वास हो और उनके सिर की छत सलामत रहे।

#MakeOurFutureSound #StopOrShift