MP's and MLA's post are public service not a job

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सम्मानित जनता
सांसद और विधायक का पद जनता की सेवा के लिए ना कि धन के लिए है, मेरा यह कहना है कि यह पद नौकरी नहीं है और यदि नौकरी है तो फिर समान्य कर्मचारी से अलग नियम में क्यो है । यह देश सेवा है। हम इस अंधे सिस्टम के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी।
1. भारत के महालेखा परीक्षक को सांसद और विधायक के वेतन ,भत्तो की कटौती व वृद्धि अधिकार होना चाहिए।
2. सांसद और विधायक के अनियमित भत्तो पर रोक लगना चाहिए जैसे - टेलीफोन भत्ता, वाहन भत्ता, हवाई भत्ता, विदेशो मेंं उपचार का भत्ता आदि।
३. पेंशन सिस्टम को सामान्य जनता की तरह एनपीएस सिस्टम में तबदील करना चाहिए।
४. रोलियों के लिए सरकारी खर्च मे कमी करना या पूर्णतःय प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
५. जिदंगी भर पेंशन देने के नियम में बदलाव होना चाहिए।
कृपया भारत की जनता का न्यायालय से अनुरोध है कि इस अंधाधुंध भ्रष्टाचार को रोका जाये क्योकि उपरोक्त समस्त सुविधाए हमारे दिये गये कर से पुर्ण की जाती है ।

 

Respected public
The post of MP and MLA is for the service of the public and not for the money, I say that this post is not a job and if it is a job then why is it in a different rule from the general employee. This is country service. We must raise our voice against this blind system.
1. The Auditor General of India should have the right to deduct and increase the salary, allowances of MPs and MLAs.
2. Irregular allowances of MP and MLA should be stopped like telephone allowance, conveyance allowance, air allowance, treatment allowance abroad etc.
3. Pension system should be converted into NPS system like the general public.
4. Government spending for rolls should be reduced or completely banned.
5. There should be a change in the rules for giving pension throughout life.
Please the people of India request the court that this indiscriminate corruption should be stopped because all the above facilities are fulfilled by our given tax.