Wave off the Fees for Jawahar Navodaya Vidyalaya Samiti Schools

0 have signed. Let’s get to 100!


प्रतिष्ठा में
मानव संसाधन विकास मंत्री,
भारत सरकार,नई दिल्ली।

विषय:- जवाहर नवोदय विद्यालयों में शुल्क व्यवस्था समाप्त करने के क्रम में ज्ञापन।

महोदय,

प्रत्येक देश अपनी सामाजिक- सांस्कृतिक अस्मिता को अभिव्यक्ति देने तथा समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी विशिष्ट शिक्षा प्रणाली विकसित करता है। शिक्षा नागरिकों को सुसंस्कृत बनाने का माध्यम है। यह हमारी संवेदनशीलता और सोच को प्रखर करती है, जिससे राष्ट्रीय एकता विकसित होती है, वैज्ञानिक समझ बढ़ती है और चिंतन में स्वतंत्रता आती है। इसके साथ ही शिक्षा हमारे संवैधानिक लक्ष्यों व मूल्यों की प्राप्ति में हमारी सहायता करती है। सार रूप में कहें तो शिक्षा देश के वर्तमान और भविष्य के निर्माण का प्रमुख साधन है। हमारे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में " सबके लिए शिक्षा" हमारे भौतिक और आध्यात्मिक विकास की बुनियादी आवश्यकता है। इसीलिये प्राथमिक स्तर पर सभी को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना हमारे संविधान की मौलिक भावना रही है

महोदय, संविधान की इस मौलिक भावना को उच्च माध्यमिक स्तर तक विस्तार देते हुये 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत देश में नवोदय विद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया। आज ये विद्यालय न केवल भारत, बल्कि विश्व में कहीं भी दी जाने वाली विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में अनूठा प्रयोग हैं। इस प्रयोग का महत्व ग्रामीण प्रतिभाशाली बच्चों को लक्ष्य मानकर किये गए चयन तथा उन्हें उच्च कोटि की ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराने में निहित है जो यहाँ के विधार्थियों को उनके परिवार की सामाजिक- आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना पूर्णत: निशुल्क देय है। अर्थात जहाँ विधार्थी को बिना सामाजिक- आर्थिक भेदभाव के निशुल्क शिक्षा के साथ आवास,भोजन, पोशाक एवं खेलकूद सामग्री भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। अनेक ऐसे उदाहरण हैं कि यदि नवोदय विद्यालय न होते तो राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले और देश व समाज को गौरवान्वित करने वाले अनेक युवा आज गुमनामी का जीवन जी रहे होते।
नवोदय विद्यालयों की विशिष्टता यह भी है कि इन विद्यालयों में 30 प्रतिशत विद्यार्थियों को अंतरप्रांतीय माईग्रेशन पॉलिसी के तहत एक प्रान्त से दूसरे प्रान्त के नवोदय विद्यालयों में अध्ययन के लिए भेजा जाता है, जिसके चलते ये विद्यालय देश की बहुसांस्कृतिक राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली भावना का प्रसार करने वाले केंद बन गए हैं।

(1) महोदय, नवोदय विद्यालयों की स्थापना के समय से ही यह प्रतिपादित किया गया था कि इन विद्यालयों की स्थापना इसलिए की जा रही है ताकि ग्रामीण अंचल के होनहार विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली आवासीय शिक्षा पूर्णत: निशुल्क प्रदान की जा सके। आज शिक्षा के ऐसे विशिष्ट मॉडल के मूल स्वरूप में अगर कोई भी परिवर्तन किया जाता है तो वह अपनी मौलिक विशिष्टता खो देगा। इस क्रम में श्रीमान जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं कि केंद्र की पूर्व सरकार द्वारा नवोदय विद्यालयों में "विद्यालय विकास निधि" के नाम पर न्यूनतम शुल्क का प्रावधान करने का फैसला करके नवोदय विद्यालयों की मूल भावना को प्रभावित करने का काम किया था और अब वर्तमान सरकार द्वारा उस शुल्क में भारी वृद्धि कर देने से नवोदय विद्यालय की मौलिक अवधारणा ही ख़त्म हो जाएगी।

(2) महोदय, प्रस्तावित शुल्क संरचना में SC,ST/ छात्रा/ गरीब बनाम सरकारी सेवा वर्ग व अन्य वर्ग के बच्चों के बीच का विभाजन भविष्य में छात्रों की चेतना में वर्गीय भेदभाव पैदा करके नवोदय विद्यालयों की मूल भावना (सामाजिक- सांस्कृतिक- आर्थिक भेद से रहित होकर सबको निशुल्क शिक्षा देना) को ही ख़त्म कर देगा। जिससे विद्यालय परिसर का मौलिक स्वरूप ही ख़त्म हो जाएगा।

(3) महोदय, आज नवोदय विद्यालय मेडिकल,
इंजीनियरिंग, प्रशासन, सेना, खेलकूद इत्यादि क्षेत्रों में देश में सबसे ज्यादा मानव संसाधन भेजने वाला रिजल्ट ओरिएंटेड संस्थान बन गया है, क्योंकि यहां के होनहार छात्रो और उनके अभिभावकों पर शुल्क देने का दबाब नही होता है, छात्र किसी सामाजिक- आर्थिक परिस्थितियों के दबाब के बिना निर्बाध रूप से अपनी पढ़ाई करते है। किन्तु नवोदय विद्यालयों में शुल्क पद्दति की नीति अपनाने से छात्रों के एक वर्ग पर अतिरिक्त दबाव आएगा, इससे एक तरफ प्रभावित छात्रों का मनोबल टूटेगा, वहीं दूसरी केम्पस में शुल्क देने वाले और शुल्क मुक्ति पाने वाले छात्रों के मस्तिष्क में वर्गीय भेद की भावना उत्पन्न होगी, जो कि कालांतर में नवोदय विद्यालय की मूल अवधारणा - सामाजिक- सांस्कृतिक - आर्थिक सद्भावना को ही नष्ट कर देगी।

(4) महोदय, नवोदय विद्यालय का मॉडल सरकार के "सर्व शिक्षा अभियान" के उद्देश्य को ही आगे बढ़ा रहा है। आज यह मॉडल हमारे शिक्षा जगत में अनुकरणीय माना जाता है। अत: नवोदय विद्यालयों में शुल्क नीति लागू कर नवोदय विद्यालय मॉडल को हतोत्साहित करने के बजाय और ज्यादा मजबूती देने, व्यापक बनाने तथा विस्तारित करने के लिए सरकार द्वारा इसे और अधिक आर्थिक संबल देने की जरुरत है।

(5) महोदय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2016) में इस संस्था के शिक्षण परिवेश को सामाजिक तौर पर अनुकरणीय बताया गया है तथा अन्य राज्यों को इसे अपनाने के लिए कहा गया है। जबकि दूसरी तरफ इन विद्यालयों में शुल्क का प्रावधान कर देने से इन विद्यालयों की मूल प्रवृत्ति व अवधारणा दोनों ही परिवर्तित होती दिखाई दे रही है।

अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि जनहित व व्यापकता में देखते हुए नवोदय विद्यालयों में शुल्क पद्दति को लागू करने के पुराने निर्णय को समाप्त कर छात्रों को अनुगृहित करने का श्रम करें। आप जैसे चिन्तक , शिक्षाविद और शिक्षण संस्थाओं के संरक्षक व्यक्तित्व के समक्ष हम अपनी भावना को अभिव्यक्त करते हुए पूर्णत: आशान्वित हैं कि आप नवोदय विद्यालयों की मूल प्रवृत्ति और अवधारणा को संरक्षित करेंगे।

भवदीय



Today: Navaodya Alumni is counting on you

Navaodya Alumni needs your help with “minister.hrd@gov.in: Wave off the Fees for Jawahar Navodaya Vidyalaya Samiti Schools”. Join Navaodya Alumni and 39 supporters today.