#AllKidsNeedParents : गोद लेने वाले माता-पिता के साथ ना हो भेदभाव, मिले बराबर का हक

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मैं जितनी बार भी अपने बच्चों के साथ घर से बाहर निकली हूँ, किसी ने मुझसे ये नहीं कहा कि मैंने अपनी बेटी को गोद लिया है और अपने बेटे को मैंने जन्म दिया है। 2 साल की मेरी बेटी इनाया अपने भाई लक्ष्य से इतना प्यार करती है कि कोई उसे डांट दे तो वो उसे आँखें दिखाती है।

मेरी लाडली कभी भी अपने भाई को अकेला नहीं छोड़ती है। 8 साल का लक्ष्य भी अपनी बहन को उतना ही प्यार करता है। अगर कोई उसे टॉफी या चॉकलेट देता है तो वो अपनी बहन का हिस्सा माँगना नहीं भूलता, कभी भूल भी गया तो अपनी चॉकलेट के दो हिस्से करना नहीं भूलता है।

इनाया हमारे घर की रानी है, उसकी किलकारियों से हमारा पूरा घर गूँजता है। कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरे घर की हर चीज़ में इनाया बसती है। पर 6 महीने पहले ऐसा नहीं था।

6 महीने पहले जब हमने इनाया को गोद लिया तो वो खामोश रहती थी। तब तक वो थोड़ा बहुत बोल लेती थी पर घर पर लाने के बाद मैं उसकी आवाज़ सुनने के लिए तरस गई थी। मुझे अच्छे से याद है कि गोद लेने के 15 दिन तक मेरी बच्ची मुस्कुराई तक नहीं थी।

वो डरी और सहमी हुई थी। अनाथालय में उसका ख्याल रखने वाले ही उसका परिवार थे, वहीं पर उसके भाई-बहन थे, जहाँ उसने अपने जीवन के 1.5 साल बिताए थे। मुझे अच्छे से याद है कि कैसे जब हम उसे घर ले आए तो वो मुझे ‘माँ’ नहीं, ‘दीदी’ कहती थी। इनाया ने दो महीने मुझे दीदी ही कहा, जैसे अनाथालय में वो हर महिला या लड़की को दीदी कहती थी।

इस समय इनाया को मेरी ममता, मेरी देखभाल की ज़रूरत थी और मैं खुशकिस्मत हूँ कि जिस कंपनी में मैं काम करती थी, वहाँ मुझे 4 महीने का मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) मिल पाई। इन्हीं छुट्टियों में मैंने इनाया की दीदी से उसकी माँ बनने का सफर तय किया।

वो जब अपने अनाथालय को याद कर के रोती तो मैं उसके आंसू पोछती, उसे हर जतन कर के हँसाती। इन्हीं छुट्टियों की बदौलत मैंने उसकी पहली मुस्कान देखी, उसको अपने सीने से लगाए रखा, उसे अपनी गोद में सुलाया। और सबसे ज़रूरी बात कि मैंने उसे एहसास दिलाया कि मैं उसकी माँ हूँ।

अफसोस ये है कि हमारे देश में हर गोद लेने वाली महिला या पुरुष मेरे जितना खुशकिस्मत नहीं होता है। मेरी दोस्त नेहा और शरद को एडॉप्शन लीव (गोद लेने के बाद छुट्टी) नहीं मिली।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें ताकि श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय गोद लेने वाले माता-पिता को भी छुट्टी (पैरेंटल लीव) देने का प्रावधान करे। अपने अनुभव से बता रही हूँ कि गोद लेने की प्रक्रिया में बहुत कम ऐसा होता है कि आपको 3 महीने से कम उम्र की संतान मिले। जब माता-पिता एक बड़े उम्र के बच्चे को गोद लेते हैं तो उन्हें बड़े संयम से आगे बढ़ना होता है। बच्चे के साथ संघर्ष भी आते हैं, जिनके लिए माता-पिता को तैयार होने के लिए अवकाश मिलना उनका और बच्चे का भी हक है।

मातृत्व लाभ अधिनियम (मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट) में पर्याप्त जगह ना मिलने के कारण मौजूदा समय में गोद लेने वाले माता-पिता की छुट्टी, कंपनी की इच्छा पर निर्भर करती है। कंपनी चाहेगी तो छुट्टी मिलेगी, नहीं चाहेगी तो उन्हें अपने बच्चे को अकेला छोड़ना पड़ेगा।

गोद लेने वाले माता-पिता को छुट्टी के लिए बाकायदा मोल-भाव करना पड़ता है, कुछ कंपनियां तो जोड़-घटा करती हैं और कुछ तो ऐसे लोगों की एक ना सुनकर उन्हें काम से ही निकाल देती हैं। अपने बच्चे के लिए माता-पिता जान दे सकते हैं तो नौकरी क्या चीज़ है पर ज़रा बैठकर सोचिए कि ये कितना बड़ा अन्याय है। ऐसा होता रहा तो मुझे डर है कि लोग अनाथ बच्चों को गोद लेना ही बंद कर देंगे। ये माता-पिता के साथ ही नहीं बल्कि उन अनाथ बच्चों के साथ भी अन्याय है।

हाल ही में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्सेस अथॉरिटी (CARA) ने 40 की उम्र के ऊपर की अकेली महिलाओं को गोद लेने की प्रक्रिया में प्राथमिकता देने का फैसला किया। इस फैसले के बाद बहुत ज़रूरी हो जाता है कि गोद लेने वाली माओं को भी मातृत्व के लाभ मिल सकें। और बहुत सी कंपनियां तो पैटरनिटी लीव बेनेफिट भी नहीं देतीं, इस पहल के ज़रिए पुरुषों को भी उनका हक मिलना चाहिए।

गोद लेने वालों को असमान मातृत्व लाभ (Unequal Maternity Benefit) का सामना करना ना सिर्फ उनके साथ अन्याय है बल्कि गोद लिए गए बच्चे के साथ भी घोर अन्याय है।

गोद लिए बच्चों और गोद लेने वाले माता-पिता, दोनों को शुरुआती दिनों में मानसिक और जज़बाती सहारे की बहुत ज़रूरत होती है। भारत सरकार सकारात्मक कदम उठाकर बताएं कि वो जन्म देने वाले माता-पिता और गोद लेने वाले माता-पिता में भेद नहीं करती है।

कृपया मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे शेयर कर के मेरा साथ दें ताकि हम मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जहाँ किसी माता-पिता के साथ भेदभाव ना हो। मेरा साथ दें ताकि अनाथ बच्चों को उनका हक मिले। मेरा साथ दें क्योंकि हर बच्चे को उसके माता-पिता प्यारे होते हैं। #AllKidsNeedParents



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