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Justice for tigress killed in Bhandavgarh and her cubs in India

Field Visit to Bandhavgarh Tiger Reserve regarding recent tigress mortality-Naresh Kadyan

The Forest Department is yet to find the vehicle, which hit a tigress resulting in her death in Bandhavgarh National Park premises two days ago. Park Deputy Director KS Alawa informed that a forensic team examined several tourist vehicles on Friday.

State PCCF (Wildlife) RS Negi said that the forensic samples received from the vehicles would be tested at CCMB Hyderabad or Veterinary College Jabalpur. He however declined to have more details on the happenings at the park of Friday.

Meanwhile, the death of the tigress inside Bandhavgarh National Park took a new turn on Friday, as Congress Janpad president Umaria Gyanwati Singh alleged that the vehicle which hit the tigress, belonged to the son of a State Minister. She has also demanded a CBI inquiry in the incident. Speculations are also making rounds that a forest official's vehicle was involved in the accident of the big cat.

However, PWD Minister and in charge Minister for Umaria Nagendra Singh's son Shyamendra Singh, in a statement on Friday rejected the allegations stating that he has not been to Bandhavgarh National Park for four months and has termed the reports of his involvement in the death of the tigress as baseless and wrong.

Gyanwati Singh, while talking to The Pioneer over telephone on Friday informed that she had received the information of the tigress' death from a senior party leader from New Delhi.

Singh further added that she went to the park immediately, but she was allowed to enter only after half an hour. She claimed that even mediapersons were allowed entry after a while and claimed that the tigress had died after being hit by a vehicle but the park staff tried to give a new twist to the incident, by putting the dead tigress inside the water source.

The Janpad president further added that a forest guard was also made to go in the water in the presence of forest and police officials but the water barely reached his knees, then how come a tigress could drown in the water as earlier claimed by the forest staff, she argued.

Singh categorically alleged that the park had tried to hush up the matter, as Minister Nagendra Singh's son was involved in the incident. "Agar koi gharib ka beta hota to usko turant jail me daal dete," she said. She dragged park security under scanner by alleging that a vehicle entered inside the park before them without making any official entry in the register. She even claimed that according to her, police has been involved in tigress' death at the park for the first time and also demanded for a CBI inquiry into the matter.

However, speculations were also making rounds that a forest official's vehicle was also seen at the spot, where tigress was seen before death. Locals claimed that forest official's vehicle was showing damage and the damage was also visible in trees and a ladder at the site
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बांधवगढ़ राष्ट्रीय पार्क में बुधवार को हुई बाघिन की मौत पर अभी भी रहस्य बना हुआ है। घटना के तीसरे दिन भी प्रबंधन कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं है। शक- सुबह के इस दौर में अलग-अलग कहानियां गढ़ी जाने लगी हैं। बाघिन की मौत पर बने रहस्य से पर्दा कब उठेगा, अभी भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल फोरेंसिक विशेषज्ञ डा.सीबी सिंह विभागीय वाहन और पर्यटकों के वाहनों की जांच में जुट गए हैं।

see photographs of open postmortem

बांधवगढ़ रा‌र्ष्ट्रीय उद्यान में बुधवार की सुबह हुई बाघिन की मौत से विभागीय अधिकारी हलाकान हैं, क्योंकि उसकी मौत किस गाड़ी के टकराने से हुई, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। अलबत्ता घटना को लेकर कहानियां गढ़ी जाने लगी हैं। कुटप्पन महावत के लड़के बबलू ने रेंजर जेएन शुक्ला को सूचना दी कि झुरझुरा डेम में घायल बाघ बैठा है, जो पर्यटक के वाहनों को चार्ज कर रहा है। सूचना मिलते ही रेंजर श्री शुक्ला वहां पहुंचे और उसके साथ ही कहानियाें का सिलसिला शुरू हो गया। प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों द्वारा पहले यह कहा जाने लगा कि झुरझुरा एरिया का बाघ और भोखा शेर के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें झुरझुरा एरिया का बाघ घायल हो गया है। घायल होने के कारण वह वाहनों को चार्ज कर रहा है। इस दौरान घटना स्थल पर उपस्थित रेंजर जेएन शुक्ला ने पर्यटकों के लिए रूट बंद कर दिया। रेंजर शुक्ला जब घटना स्थल पर पहुंचे और महावत को वहां बुलाया तो पता लगा कि घायल बाघ नहीं, बाघिन है। घायल बाघिन डेम के पानी में बैठी हुई थी। बाघिन पर नजर रखने के लिए हाथियों को वहां बुला लिया गया। इस बीच ताला सेंचुरी के अपर संचालक आरपी पांडेय वहां पहुंचे। उन्होंने बाघिन के उपचार के लिए एक डाक्टर को सूचित कर उसे बुलवाया। इस बीच पनपथा के एसडीओ डीसी घोरमारे अपनी बंद जीप को लेकर वहां पहुंच गए। सूत्रों का कहना है कि जब घोरमारे के वाहन पर घायल बाघिन ने चार्ज किया तो वह जीप बैक कर भागने की कोशिश की। बैक करते वक्त श्री घोरमारे की जीप एक मचान से टकराई और वह गिर पड़ी। बताया जाता है कि मचान घायल बाघिन के ऊपर गिरी। इस बीच चोटिल बाघिन मचान से निकलकर डेम में चली गई। जब बाघिन काफी देर तक पानी से बाहर नहीं निकली, तब ताला सेंचुरी के अपर संचालक श्री पांडेय ने हाथी के महावत को बुलाया। महावत ने बांस डालकर पता लगाया तो बाघिन की मौत की पुष्टि हुई। बाघिन की मौत होने पर पहले किंग्स लाज की जीप की टक्कर लगने से बाघिन की मौत की कहानी गढ़ी गई। जब किंग्स लाज की जीप से टक्कर लगने की पुष्टि नहीं हुई तो फिर एक और कहानी सुनाई देने लगी कि अपर संचालक आरपी पांडेय की जीप की टक्कर लगने से बाघिन की मौत हुई है। स्वयं के संदेह के घेरे में आने के बाद श्री पांडेय ने बांधवगढ़ पार्क के संचालक सीके पाटिल को लिखित में आवेदन देकर उनके वाहन का फोरेंसिक विशेषज्ञ से जांच कराने का आग्रह किया। इसके लिए शहडोल के फोरेंसिक विशेषज्ञ डा. सीबी सिंह को बुलाया गया। डा.सिंह ने जांच में श्री पांडेय को क्लीन चिट दे दी। अब पर्यटकों को झुरझुरा डेम तक ले जाने वाली 11 वाहनों की जांच की बारी है। कल से फोरेंसिक विशेषज्ञ श्री सिंह पर्यटकों के वाहनों की जांच करेंगे। उधर प्रबंधन सूत्रों का कहना है कि मंगलवार रात में ही बाघिन को जीप से टक्कर मारी गई होगी। बाघिन रात से घायल थी, जिसकी दूसरे दिन बुधवार सुबह 9 बजे के लगभग मौत हो गई। फिलहाल बाघिन की मौत पर रहस्य बना हुआ है। बांधवगढ़ में इसके पहले सीता नाम की एक बाघिन की मौत हुई थी, जिसकी मौत पर बने रहस्य का खुलासा आज तक नहीं हो पाया।

Tigress death: MP orders CID probe

Bandhavgarh resort sealed by dist admn

The Bandhavgarh National Park could pay a heavy price for the recent tigress death as the central government is reportedly pondering over discontinuing financial assistance to the park. This was discussed at a Secretary-level meeting of the Forest and Tourism Department at New Delhi on Friday. Besides, the tigress death case report was not submitted to the State PCCF on Friday.

Officials of the Central Gvernment have taken the matter of tigress death very seriously. Sources claimed that the matter was discussed in the Secretary-level meeting of Union Tourism and Forest Ministries on Friday. It was decided at the meeting that as a stringent measure, the central assistance given to the Bandhavgarh National Park could also be scrapped.

Besides, it was also discussed that certain guidelines had been issued for tourism activities inside tiger reserves but it was said that the guidelines were flouted at Bandhavgarh and a caution was also issued for sticking to the guidelines. Besides, the officials reportedly also discussed that the park officials have been negligent in the tigress death case.

Meanwhile, the report of the inquiry conducted by the Additional PCCF Dharmendra Shukla could not be handed to State PCCF AK Dubey on Friday. Interestingly, both the officers remained tight lipped about the matter.

Dubey late in the evening claimed that he was yet to receive the report and Shukla at the same time claimed that he was busy preparing the report. However, sources of the Forest Department informed that Shukla had met the PCCF afternoon on Friday and had briefed him about the contents of the report. However sources close to the park administration at Bandhavgarh have claimed that the recent probe has zeroed in on the culprits and things would be made clear within few days.

वाकई यह एक दुखद घटना है। बांधवगढ़ में एक 20 माह की बाघिन की मौत हो गई। कुछ दिनों पहले वह लंगड़ाती हुई दिखी थी, लेकिन कल तालाब के पास मृत पाई गई। बाघों की जान को वैसे भी खतरा है और उनकी संख्या तेजी से घटती जा रही है, ऐसे में इस बाघिन की मौत से लोगों में गुस्सा स्वाभाविक है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर यही कहा जा रहा है कि, वहीं, किसी अन्य बाघिन के साथ लड़ाई के दौरान वह घायल हुई, लेकिन जिस बात पर ज्यादा भरोसा किया जा सकता है वह यह है कि पार्क के अंदर लापरवाही से चलाई जा रही जीप से उसे टक्कर लगी। ऐसा शक है कि यह लापरवाह ड्राइवर कोई और नहीं, बल्कि राज्य सरकार के एक मंत्री का बेटा है। खैर, चाहे जो भी हो, दुखद सचाई तो यही है कि एक बेहद ही खूबसूरत जानवर की मौत हो गई और और उससे भी दुखद बात यह है कि यह घटना उस जगह घटी है, जिसे बाघों के लिए देश की सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है। मेरे पास बांधवगढ़ की कुछ बेहतरीन यादें भी हैं। बाघों के लिए मशहूर इस जगह पर मैं बस दो महीने पहले ही गया था और उस फॉरेस्ट गार्ड चंदरभान सिंह की अविश्वसनीय कहानी ‘एक मां, उसके बच्चे और कुछ जंगली इंसान’  आपको सुनाई भी थी। उस पोस्ट में मैंने यह भी स्पष्ट किया था कि वहां के अधिकारी कितने प्रफ़ेशनल तरीके से पार्क की देखभाल में जुटे हैं, जहां कहीं भी कोई प्लास्टिक का सामान या पॉलिथीन लाना और ले जाना सख्त मना था और पार्क डायरेक्टरों के लिए भी कोई वीआईपी नियम-कानून नहीं। लेकिन, इस मौत के लिए यदि मंत्री का बेटा जिम्मेदार है और यह रिपोर्ट सही है तो इसने मेरे उस विश्वास को आघात पहुंचाया है कि एक अच्छे व्यक्ति से बहुत फर्क पड़ता है। माफी चाहता हूं। लेकिन एक अकेला आदमी कोई भी बदलाव नहीं ला सकता। बल्कि, यदि आप इसके रास्ते में आना चाहेंगे तो यह बेकार सिस्टम आप पर ही हावी हो जाएगा। दुखी मन यही कह रहा है कि शायद वह डायरेक्टर, जिनके लिए मेरे मन में इतनी इज्ज़त थी, उनका भी कुछ ऐसा ही हश्र हुआ हो। चलिए हम उस विशाल बिल्ली की मौत की खबर पर वापस आते हैं। चाहे आप जिस भी नजरिए से देखना चाहें, आप पाएंगे कि इंसानों के ही हाथ इस खून से रंगे हैं। अगर यह मौत गाड़ी से टक्कर लगने की वजह से हुई है तो इस मामले से इंसानों का डायरेक्ट संबंध है और यदि यह दो बाघिनों के बीच की लड़ाई की वजह से है तो भी वास्तव में दोषी इंसान ही हैं। सिर्फ बांधवगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में जहां भी ऐनिमल सैंच्युरीज़ हैं, खासकर वहां जहां विलुप्त होते जा रहे जानवरों का रहना है, वहां प्राइवेट बिल्डर्स रिज़ॉर्ट बनाने के चक्कर में लगे होते हैं और लोकल अथॉरिटीज़ पीछे से ऐसा करने की अनुमति भी दे देती है। इससे जानवरों के मूवमेंट पर असर पड़ता है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। मैंने यह आवाज़ अपनी पोस्ट 'राम और कमल की तकरार में मैं राम के साथ'  में भी उठाई है। यह पोस्ट जयराम रमेश और कमलनाथ के बीच मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से गुजरते नैशनल हाईवे को चौड़ा करने को लेकर चल रही लड़ाई पर था। मैंने बांधवगढ़ के बारे में यह चर्चा भी की थी कि कैसे मेन जोन और बफर जोन के बीच तेजी से शहरीकरण बढ़ता जा रहा है। ताला गांव में कभी सिर्फ एक फॉरेस्ट गेस्ट हाउस और दो छोटे-छोटे होटेल हुआ करते थे। आजकल तो यहां बड़े-बड़े रिजॉर्ट्स बन गए हैं और खूब चहल-पहल रहती है। इसका मतलब यह है कि शहरीकरण जानवरों के उस रास्ते को काट रहा है, जहां वे मौज़-मस्ती करते रहे हैं। इसकी वजह से जानवरों की आवाजाही पर गंभीर असर हुआ है और वे खतरे की जद में आ गए हैं। अंतत: वे जो इन प्यारे जानवरों की वजह से पैसे कमाने की चाहत रखते हैं, उन्हें यह सोचने और सममझने की ज़रूरत है कि यदि जानवर ही जिंदा नहीं बचेंगे तो... और इससे आगे क्या कहा जाए। वे वीआईपी, जो यह सेचते हैं कि वे कानून से भी ऊपर हैं उन्हें सबक देने के लिए हमें कोर्ट के कुछ कठोर फैसलों की ज़रूरत है। नहीं तो वे फिर चाहे वे मंत्री के बेटे हों, सलमान खान या मंसूर अली पटौदी जैसे लोग हों, अपने शौक और रोमांच के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे।

http://www.complaintsboard.com/complaints/madhya-pardesh-police-and-chief-wild-life-warden-c340778.html

Complaint has been lodged with the HE the President of India office and Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2010/08216 dated 20-5-2010...PWD Minister of Madhya Pardesh Sh. Nagendra Singh Son is responsible for the death of the Tigress in Bandhavgarh National Park. He violated the law of the land and Police failed to lodge FIR ... against all offenders for the violation of the section 9 read with 51 of the Wild Life Protection Act, 1972 along with 428-429 IPC with 120-B, criminal conspiracy against wild animals or any relevant legislation's, where as the guardian of wild animals Chief Wild Life Warden failed to perform his official duties.
Notice issued as per section 55 of the Wild Life Protection Act, 1972 to the Chief Wild Life Warden of Madhya Pardesh...being an Master Trainer of the Animal Welfare Board of India and representative of the International Organisation for Animal Protection - OIPA in India.
Further investigations are going on, let us wait for conclusion.

Naresh Kadyan

Sukanya Kadyan

Abhishek Kadyan

NAGPUR: In a new twist to the controversy over the death of a tigress in Bandhavgarh Reserve, TOI learns the incident occurred after a vehicle hit the wild cat. Sources confirmed that the vehicle that hit the tigress was allegedly owned by a resort run by PWD minister of MP, Nagendra Singh.

A close relative of the minister's son was in the vehicle when it inadvertently hit the tigress. Park officials have detained three vehicles. A tourist had told TOI that the death happened due to a collision with a vehicle. Naresh Kadyan, master trainer of Animal Welfare Board of India and a representative of International Organisation for Animal Protection in India, has issued notice to the chief wildlife warden of MP under section 55 of the Wildlife Protection Act, 1972.

He has also demanded the sacking of the minister. Kadyan claims that it was Singh's son who was in the vehicle that dashed against the tigress.

"Officials are trying to hush up the matter," he said from Delhi. "The minister's son and others have violated the law. Yet the police failed to lodge an FIR against them for violation of section 9, read with 51 of Wildlife Protection Act along with section 428-429 of IPC specifying criminal conspiracy against wild animals or any relevant legislations. The chief wildlife warden has failed to perform his duties."

This petition was delivered to:
  • Prime Minister of India, New Delhi
    Hon'ble Sardar Manmohan Singh
  • Joint Secretary (Coordination and Public Grievances)
    Shri K.C. Jain
  • General Secretary, AICC
    Shri Rahul Gandhi
  • Additional Director, Wildlife Crime Control Bureau
    Smt. Rina Mitra, IFS
  • Member Secretary , Central Zoo Authority of India, New Delhi
    Mr.B.S.Bonal, IFS
  • Union Minister for Environment and Forest
    Shri Jairam Ramesh
  • Chairperson, UPA / AICC
    Smt. Sonia Gandhi
  • Secretary to the Ministry of Environment and Forest
    Shri Vijai Sharma
  • Speaker Lok Sabha
    Smt. Meira Kumar


Abhishek Kadyan started this petition with a single signature, and now has 2,508 supporters. Start a petition today to change something you care about.