Justice for Dr. Payal Tadvi

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डॉ. पायल तडवी एक आदिवासी समूदाय के माता पिता की एकलौती लडकी थी जो मुंबई के नायर हॉस्पिटल में PG के फर्स्ट इअर में Gynecologist (स्त्री रोगतज्ञ) के रूप में काम करती थी. डॉ. पायल के साथ हि काम करणे वाली सिनियर डॉ. हेमा अहुजा, डॉ. भक्ती महिरे और डॉ. अंकिता खंडेलवाल इन तिनों ने डॉ. पायल को टॉर्चर, रॅगिंग, व्हाट्सअँप ग्रुपपर भगोडी बुलाकर, धमकी देकर और सभी के सामने हमेशा अपमानित करके डॉ पायल को आत्महत्या करणे पर मजबूर किया. और ये तीनो दोषी डॉक्टर एक प्रोफेशनल गुंडे कि तरच पुलिस को झाँसा देकर भाग गयी.  

डॉ. पायल की सिनियर डॉ. हेमा आहुजा, डॉ. भक्ती महिरे और डॉ. अंकिता खंडेलवाल ये तीन डॉक्टर डॉ. पायल को हमेशा कहती थी की जब तक हम हैं तब तक तुझे ऑपरेशन थिएटर में पैर नहीं रखणे देंगे, तुझे डिलिव्हरी नहीं करणे देंगे, 'तेरी कम्प्लेन्ट HOD, Lecturer और Dean से करेंगे, तुझे प्रॅक्टिस नहीं करणे देंगे, तुझे निकाल देंगे ये बोलकर डॉ. पायल को इन तीन डॉक्टरोंने दिनरात टॉर्चर किया था. डॉ. पायल कभी कभी 3-4 दिन नहाने के लिये भी समय नहीं देती थी इसलीये उसे ऍलर्जी हो गयी थी फिर भी उसे परेशान किया जाता था. ये सभी बाते डॉ पायल अपनी माँ से शेअर करती थी, जब माँ ने पायल को अपने डीन से शिकायत करणे के लिये कहा तो पायल ने कहा की अगर वो शिकायत करेगी तो उसे और टॉर्चर किया जायेगा इसलीये उसने शिकायत करने से मना कर दिया. पर फिर भी डॉ हेमा, डॉ, भक्ती और डॉ. अंकिता ने उसे लगतार नीचा दिखाकर, उसे पेशन्ट और अन्य लोगों के सामने अपमानित करके, व्हाट्सएप ग्रुप पर 'भगोडी' कहकर, ओपरेशन करणे से मना करके, खाणे के लिये भी समय न देकर उसे टॉर्चर किया.

उसी हॉस्पिटल मे डॉ. पायल की माँ का तीन महिने तक कॅन्सर का इलाज चल रहा था. डॉ. पायल भी उसी कॅम्पस में रहती थी. पर अपनी माँ से मिलने के लिये ऊसे एक भी बार समय नहीं दिया गया. अपनी माँ से पायल बिलकुल नहीं मिली. जब पायल की माँ  खुद उससे मिलने गयी तो सभी पेशन्ट के सामने हेमा, भक्ती और अंकिता डॉ. पायल का जोर जोर से बोलकर इन्सल्ट कर रही थी. तो उसकी माँ को बहोत बुरा लगा था. उसके बाद भी डॉ पायल को मेस मे खाना खाते समय बिच मे जबरदस्ती उठाकर उसे काम करणे के लिये भेज दिया जाता था. उसे ठीक से खाना खाणे नहीं दिया जा रहा था इसलीये उसकी तबियत खराब हो रही थी.  इन सभी टॉर्चर की कम्प्लेन्ट उसकी माँ ने डीन से की थी और उसकी कॉपी मुंबई के भायखळा पुलिस थाना और आरोग्यमंत्री को भी यह कहकर भेज दी की अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ तो उसके लिये डॉ हेमा, डॉ, भक्ती और डॉ. अंकिता जिम्मेदार होगी.

फिर भी किसीने डॉ. पायल कि माँ का नहीं सुना. आखिरकार उन तीनो डॉक्टरो के टॉर्चर कि वजह से डॉ. पायल ने खुडखुशी कि. रिपोर्ट ये भी बता रहें हैं कि पायल कि पहले हत्या करके फिर उसे लटकाया गया है, पर अभि जांच शुरु है.

दरअसल डॉ. पायल आदिवासी समुदाय से होणे कि वजह से उसकी न केवल रॅगिंग हुई है बल्की कास्ट डिस्क्रिमिनेशन कि वजह से उसे टॉर्चर किया गया है. इसीलिये ये केस गंभीर रूप से ऍट्रॉसिटी ऍक्ट में शामिल करके डॉ. हेमा अहुजा, डॉ. भक्ती महिरे और डॉ. अंकिता खंडेलवाल इन तिनों पर सक्त से सक्त कारवाई होनी चाहिये. डॉ. पायल को न्याय दिलाने के लिये सभी स्तर के विद्यार्थी संघटन, राजकीय पार्टीयां, महिला संघटन रास्ते पर उतरकर आंदोलन कर रहें हैं. पुलिस अधिकारी, आरोग्य मंत्री और नायर हॉस्पिटल के डीन इन सबको डॉ. पायल को न्याय दिलाने के लिये घेरा गया है. सभी लोगों कि यही मांग है कि दोषींयों को ऍट्रॉसिटी ऍक्ट कि तहत मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी दि जाए. नहीं तो डीन और आरोग्य मंत्री को इस्तीफा देना पडेगा.

आदिवासी समुदाय जो अभि अभि शिक्षा लेकर आगे बढ रहा है ऐसे हाल मैं उन्हें प्रोत्साहित करणे के अलावा उन्हे जातीसुचक टॉर्चर करके जातीभेद को बढावा दिया जा रहा है. और डॉ. पायल एक महिला होणे के नाते ये केस और भी गंभीर होकर महिला अत्याचार दरशा रही है. तो आवो हम सभी जातीवाद, महिला अत्याचार और रॅगिंग जैसे समाज को कलंक लगाने वाले अपराध को हमेशा को मिटाकर डॉ. पायल तडवी को न्याय देणे के लिये साथ चले.

Justice for Dr. Payal Tadvi