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ईसा मसीह जब शरीर में वापस आ सकते हैं तो आशुतोष महाराज क्‍यों नहीं? Sundeep Dev Category: गुरु | ज्ञानPublished on Monday, 02 June 2014 19:21 <iframe id="twitter-widget-0" class="twitter-share-button twitter-tweet-button twitter-share-button twitter-count-vertical" style="margin: 0px; padding: 0px; width: 59px; height: 62px;" title="Twitter Tweet Button" src="http://platform.twitter.com/widgets/tweet_button.1401325387.html#_=1402059401136&count=vertical&id=twitter-widget-0〈=en&original_referer=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com%2Fspirituality%2Fguru-gyan%2F952-ashutosh-maharaj-ji-dead-or-alive1&related=%0A%20%3Cscript%20type%3D%27text%2Fjavascript%27%3E%0A%20%3C!--%0A%20var%20prefix%20%3D%20%27ma%27%20%2B%20%27il%27%20%2B%20%27to%27%3B%0A%20var%20path%20%3D%20%27hr%27%20%2B%20%27ef%27%20%2B%20%27%3D%27%3B%0A%20var%20addy85595%20%3D%20%27aadhiabadi%27%20%2B%20%27%40%27%3B%0A%20addy85595%20%3D%20addy85595%20%2B%20%27gmail%27%20%2B%20%27.%27%20%2B%20%27com%27%3B%0A%20(%27%3Ca%20%27%20%2B%20path%20%2B%20%27%5C%27%27%20%2B%20prefix%20%2B%20%27%3A%27%20%2B%20addy85595%20%2B%20%27%5C%27%3E%27)%3B%0A%20(addy85595)%3B%0A%20(%27%3C%5C%2Fa%3E%27)%3B%0A%20%2F%2F--%3E%5Cn%20%3C%2Fscript%3E%3Cscript%20type%3D%27text%2Fjavascript%27%3E%0A%20%3C!--%0A%20(%27%3Cspan%20style%3D%5C%27display%3A%20none%3B%5C%27%3E%27)%3B%0A%20%2F%2F--%3E%0A%20%3C%2Fscript%3EThis%20email%20address%20is%20being%20protected%20from%20spambots.%20You%20need%20JavaScript%20enabled%20to%20view%20it.%0A%20%3Cscript%20type%3D%27text%2Fjavascript%27%3E%0A%20%3C!--%0A%20(%27%3C%2F%27)%3B%0A%20(%27span%3E%27)%3B%0A%20%2F%2F--%3E%0A%20%3C%2Fscript%3E&size=m&text=%E0%A4%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%20%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%B9%20%E0%A4%9C%E0%A4%AC%20%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%B0%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8%20%E0%A4%86%20%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%87%20%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82%20%E0%A4%A4%E0%A5%8B%20%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%B7%20%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%20%E0%A4%95%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82%3F&url=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com%2Fspirituality%2Fguru-gyan%2F952-ashutosh-maharaj-ji-dead-or-alive1&via=Aadhiabadi" frameborder="0" scrolling="no" data-twttr-rendered="true"></iframe> <iframe id="fb_xdm_frame_http" style="margin: 0px; padding: 0px; border-style: none;" tabindex="-1" title="Facebook Cross Domain Communication Frame" src="http://static.ak.facebook.com/connect/xd_arbiter/V80PAcvrynR.js?version=41#channel=f102f321e&origin=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com" name="fb_xdm_frame_http" frameborder="0" scrolling="no"></iframe><iframe id="fb_xdm_frame_https" style="margin: 0px; padding: 0px; border-style: none;" tabindex="-1" title="Facebook Cross Domain Communication Frame" src="https://s-static.ak.facebook.com/connect/xd_arbiter/V80PAcvrynR.js?version=41#channel=f102f321e&origin=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com" name="fb_xdm_frame_https" frameborder="0" scrolling="no"></iframe>   <iframe style="margin: 0px; padding: 0px; position: absolute; border-style: none; visibility: visible; width: 49px; height: 61px;" title="fb:like Facebook Social Plugin" src="http://www.facebook.com/plugins/like.php?action=like&app_id=&channel=http%3A%2F%2Fstatic.ak.facebook.com%2Fconnect%2Fxd_arbiter%2FV80PAcvrynR.js%3Fversion%3D41%23cb%3Df398c459bc%26domain%3Daadhiabadi.com%26origin%3Dhttp%253A%252F%252Faadhiabadi.com%252Ff102f321e%26relation%3Dparent.parent&color_scheme=light&href=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com%2Fspirituality%2Fguru-gyan%2F952-ashutosh-maharaj-ji-dead-or-alive1&layout=box_count&locale=en_US&sdk=joey&send=false&show_faces=false&width=60" name="f38eef1844" width="60px" height="1000px" frameborder="0" scrolling="no"></iframe> <iframe id="I0_1402059402272" style="margin: 0px; padding: 0px; position: static; top: 0px; width: 50px; border-style: none; left: 0px; visibility: visible; height: 60px;" tabindex="0" title="+1" src="https://apis.google.com/u/0/_/+1/fastbutton?usegapi=1&size=tall&hl=en&origin=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com&url=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com%2Fspirituality%2Fguru-gyan%2F952-ashutosh-maharaj-ji-dead-or-alive1&gsrc=3p&ic=1&jsh=m%3B%2F_%2Fscs%2Fapps-static%2F_%2Fjs%2Fk%3Doz.gapi.en.QUTRkiKdOgk.O%2Fm%3D__features__%2Fam%3DEQ%2Frt%3Dj%2Fd%3D1%2Fz%3Dzcms%2Frs%3DAItRSTPkpqmjWd4lLcyQ65w51XP0b_wZoQ#_methods=onPlusOne%2C_ready%2C_close%2C_open%2C_resizeMe%2C_renderstart%2Concircled%2Cdrefresh%2Cerefresh%2Conload&id=I0_1402059402272&parent=http%3A%2F%2Faadhiabadi.com&pfname=&rpctoken=74874209" name="I0_1402059402272" width="100%" frameborder="0" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no" data-gapiattached="true"></iframe>

संदीप देव। 28 जनवरी 2014 को पंजाब के नूर महल आश्रम के कई साधकों से उनके पूज्‍य गुरुदेव आशुतोष महाराज जी अलग-अलग मिले और उन्‍हें कुछ निर्देश दिया। उन्‍होंने दिल्‍ली सहित अपने अनेक आश्रमों में मौजूद अपने कई निकटवर्ती साधकों को टेलीफोन किया और उन सबको भविष्‍य के  नए निर्माण के लिए बिना घबराए तैयारी करने को कहा। सबके लिए उनका एक ही संदेश था कि अब भारत में ' क्रांति' का वक्‍त आ गया है! तुम लोग घबराना नहीं, बल्कि अपने ध्यान को गहन से गहनतम करते चले जाना! धर्मक्षेत्र भारत बहुत बड़े परिवर्तनों से गुजरने वाला है!

 

सुबह से शाम तक अपने कुछ प्रमुख साधकों को वह कई तरह के निर्देश देते रहे और जब रात 11 बजे का वक्‍त सामने आया तो उन्‍होंने सबको अपने से दूर चले जाने को कह दिया। उन्‍होंने कहा, मैं शीघ्र ही लौटूंगा। तुम सभी को धैर्य बनाए रखना है और देश में होने वाले एक बड़े परिवर्तन का साक्षी बनना है। 11.45 में श्री आशुतोष महाराज जी गहन समाधि में जा चुके थे। उस गहन समाधि में रहते हुए उन्‍हें आज चार महीने से ऊपर हो चुके हैं और आश्रम में सबकुछ पहले की ही भांति सामान्‍य है। राजनैतिक परिवर्तन के रूप में देश एक बड़े परिवर्तन का गवाह भी बन चुका है। एक राष्‍ट्रवादी हिंदू के रूप में भगवा क्रांति के वाहक नरेंद्र मोदी आज देश के प्रधानमंत्री हैं।

अब सवाल उठता है कि इस परिवर्तन के बाद श्री आशुतोष महाराज जी अपने शरीर में वापस क्‍यों नहीं लौटे? उनके साधकों से पूछिए, लेकिन वो तो अपने गुरू श्री आशुतोष महाराज को पल-पल अपने साथ, अपने समक्ष देख रहे हैं! आशुतोष महाराज जी अपने शिष्‍यों को पिछले करीब 12 साल से मानसिक रूप से इस गहन समाधि के लिए तैयार कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद जब कुछ साधक अपने गुरू से मिलने के लिए अधीर हो उठते हैं तो वह उनके समक्ष प्रकट हो जाते हैं, उन्‍हें दुलारते हैं और उनसे बातें कर उन्‍हें खुद द्वारा नियत तिथि पर लौटने का आश्‍वासन देते हैं!

मैंने एक नहीं, बल्कि कई शिष्‍यों से ऐसे-ऐसे अनुभव सुने हैं, जो हमें अचंभित करते हैं, लेकिन यदि हमें भारत की सनातन परंपरा का जरा भी ज्ञान है तो ये शिष्‍य हमें विश्‍वास दिलाते हैं कि आज भी उस परंपरा का एक गुरू वर्तमान भारत में अपनी गहरी समाधि से चेतना की क्रांति पैदा करने में जुटा है! पश्चिम की मीडिया व लोग इसे नहीं समझना चाहते और भारत की मीडिया तो केवल पश्चिमी मीडिया की पिछलग्‍गू भर है इसलिए वह केवल उनका अनुशरण कर रही है। लेकिन पश्चिमी देश शायद यह भूल रहे हैं कि उनकी पूरी ईसायत का आधार ही इस पर टिका है कि सूली के बाद जीसस ईसा मसीह फिर से जीवित हो उठे थे! और ईसा को शरीर में वापस आने का यह ज्ञान यहीं, इसी भारत में मिला था!

बाइबल कहती है कि ईसा को केवल 33 साल की उम्र में सूली पर चढ़ा दिया गया था, लेकिन बाइबल इस बात पर प्रकाश डालने से डरती है कि ईसा मसीह अपनी उम्र के 13 से 30 साल के बीच कहां रहे? ईसायत के मसीह ईसा उस दौरान भारत में रहे थे, क्‍योंकि उन्‍होंने यहूदी धर्म के उलट जिस शिक्षा का प्रसार किया वह गौतम बुद्ध व महावीर की शिक्षाओं का सार था। ईसा से पूर्व यहूदी धर्म के सभी पैगंबरों जैसे- इजेकिएल, इलिजाह, मोसेस ने ईश्‍वर की परिकल्‍पना हिंसक और दंड देने वाले के रूप में की है, लेकिन इसके उलट ईसा कहते हैं कि परमात्‍मा प्रेम करता है और वह अहिंसक है। परमात्‍मा को प्रेम और अहिंसक कहने का आंदोलन ईसा के जन्‍म से करीब 500 साल पहले महात्‍मा बुद्ध ने पैदा किया था, जिसकी आग तब भी पूरी दुनिया में जल रही थी जब ईसा भारत आए थे। ईसा की मृत्‍यु भी भारत में हुई थी और आज भी कश्‍मीर के पहलगांव में उनकी कब्र पर लिखा है, ' जोशुआ'। हिब्रू भाषा में 'जोशुआ' का मतलब होता है 'जीसस'!

कहने का तात्‍पर्य यह है कि भारत की वैदिक और सनातन परंपरा में अपने शरीर का लंबे समय तक त्‍याग कर उससे बाहर रहने अर्थात गहन समाधि में जाने के अनेकों उदाहरण हैं, जिसका ज्ञान सूली से पहले ईसा मसीह को भी था। यही कारण है कि जब ईसा को सूली दी गई तो उसके बाद उनके शिष्‍यों के बीच ईसा पुन: जीवित हो उठे और वह जूडिया छोड़कर भारत के पहलगांव में आकर रहने लगे थे। बाइबिल इस सब पर मौन है, क्‍योंकि इससे उसे भारत के ज्ञान की उस परंपरा को मानना पड़ेगा, जो दिव्‍य और अलौकिक है।

ईसा मसीह को दोबारा शरीर में लौटने की घटना की व्‍याख्‍या करने वाला बाइबल पूरब के ज्ञान को मान्‍यता देकर अपने 'जीसस' को सर्वोच्‍चता के पद से उतारना नहीं चाहता है। इसलिए पश्चिम ने तब भी झूठ बोला था और आज भी आशुतोष महाराज जी को लेकर उनकी मृत्‍यु की झूठी घोषणा कर रहा है। जबकि सच्‍चाई यह है कि योगबल से न केवल अपने शरीर को त्‍याग कर गहन समाधि में जाने, बल्कि दूसरों के शरीर में प्रवेश करने का सबसे बड़ा उदाहरण आदि गुरू शंकराचार्य के रूप में इस देश में मौजूद है।

आदि गुरू शंकराचार्य के 'परकाया प्रवेश' पर अगले लेख में चर्चा करूंगा, लेकिन इस लेख में केवल आशुतोष महाराज जी को नमन करते हुए अपनी बात समाप्‍त करता हूं कि उन्‍होंने एक निश्चित अवधि के लिए अपने शरीर का त्‍याग कर भारत की लुप्‍त सनातन विद्या के जरिए न केवल यहां के मानस को झकझोर कर एक नए परिवर्तन और मौन क्रांति की आधारशिला रखी, बल्कि भारत से ज्ञान हासिल कर चुके ईसा मसीह की सच्‍चाई पूरी दुनिया को बताने के लिए पश्चिम को भी प्रेरित किया! पश्चिमी मीडिया और विद्वानों को कश्‍मीर के पहलगावं में आकर पहले ' जोशुआ' के कब्र की सच्‍चाई दुनिया को बताना चाहिए, फिर उन्‍हें आशुतोष महाराज जी की गहन समाधि के राज का पता स्‍वयं ही चल जाएगा!



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