Adultery (व्यभिचार) संबंधी कानून IPC की धारा 497 पर पुनः विचारणा

0 व्यक्ति ने हसताकषर गये। 100 हसताकषर जुटाएं!


हमारी संस्कृति बचाने के हित में इस पोस्ट के अंत में लिंक पर क्लिक कर #याचिका_साइन करने की विन्नति। 

���यह पोस्ट पूर्णतः पढ़े।���

आपसे नम्रतापूर्वक विन्नति है की दिनांक 27.9.2018 को नामदार सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 497 जो #Adultery #व्यभिचार_को_प्रत्यक्ष_या_परोक्ष_रूप_से_कानूनी_मान्यता प्रदान करता हुआ अपना फैसला सुनाया है।

यह हमारी भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संस्कार पर सीधा प्रहार है।

आप इस धारा 497 बाबत Google पर खोज कर या अपने वकील मित्रसे इसके प्रावधन के विषय मे जानकर इस का पूरजोश विरोध इस पिटीशन को समजकर आपकी सहमति रूप साइन करें और अपने मित्रों से इस विघटनकारी धारा 497 पर कोर्ट पुनःविचारणा करे ऐसा सरकार पर दबाव बनाने में सहयोग करें।

#मुझे_इस_पोस्ट_पर_like_नही_आपका_समर्थन_चाहिए_जो_आप_नीचे_लिंक_पर_क्लिक_कर_साइन_के_द्वारा_कर_सकते_है।

मित्रो मेरी इस पिटीशन को गलत अर्थ में न ले !

मैं आज यह निर्णय सुनाने वाले जज साहब, पैरवी कर रहे वकील और याचिकाकर्ता से पूछना चाहता हूँ कि आप दिनभर परिवार के भरण पोषण के लिए काम करके जब आप घर पर लोटेंगे तो आपकी लाइफ पार्टनर, आपकी पत्नी किसी परपुरुष के बाहों में होगी #तब_आप_पर_क्या_गुजरेगी.??

मुझे समझ नहीं आता कि हम दिन भर बीवी बच्चों के शौक मौज के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं। और अब आपकी पत्नी या पति कानूनी तौर से शारीरिक सुख दूसरों के साथ लेंगे। विवाह के पवित्र बंधन से आजीवन बंधने के बाद अब इस तुगलकी फरमान के बाद हमारा परस्पर पर कोई अधिकार या रोकटोक नहीं ??? इस नये प्रावधान के बाद परपुरुष या परस्त्री को हम कानून अपने जीवनसाथी से दूर भी नही कर सकेंगे !!!

वाह जज साहब !!! क्या कानून बनाया है !!! आधुनिकता के नाम से आपके इस कानून से घर परिवार टूटेंगे साथ ही हमारी संस्क्रति का भी हनन होगा। भारत की हालत पश्चिम से भी बदत्तर हो जायेंगी। फिर मानव और जानवर में फर्क क्या रहेंगा ???

न्यायतंत्र द्वारा वामपंथी विचारधारा के तहत हमारे नैतिक मूल्यों का पतन करने की और भारतीय संस्कृति और सभ्यता को तहस नहस करने के सोची समजी षड्यंत्र कारी साजिस के तहत कानूनी मान्यता के रूप में हो रहा है।

मै इस कानून का पूर्णतया विरोध करता हुँ।

99.99% महिलाएं कभी भी ऐसे कानून को सही नही कहेगी। क्यू कि महिलाए भी इज्जत को बड़ा गहना मानती हैं।

कुछ पुरुष और महिला की खुशी के लिये यह कानून हो सकता है किन्तु सभ्य इनको स्वीकार नही करेगा।

इस कानून से पुरुष और भी आजाद होगा ! वह अपनी बीवी को धमकी ही देगा कि मैं भी किसी के साथ जा सकता हूँ उसमे कानून अड़चन नही करेगा तब उस महिला को भी ठेस पहुँचेगी।

ये कानून महिला और पुरुष दोनो के लिए हानिकारक हैं।

कृपया नीचे ��� दी गई लिंक पर क्लिक कर अपना नाम और Email डालकर इस याचिका का समर्थन कर अपने नागरिक अधिकार का पालन करें। आप का नाम जाहिर करने न करने की स्वतंत्रता आपकी है।