WANTS PROPER COUNSELLING FOR STUDENTS IN JNV, IN KOTA WHO'S SUICIDE NUMBER IS INCREASING

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मैं संतोष राठौर वर्ष 2005 से 2012 तक जवाहर नवोदय विद्यालय मानपुर, जौरा मुरैना (म.प्र.) से कक्षा 6वीं से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में इंदौर (म.प्र.) में निवासरत होकर नवोदय विद्यालय के हितों में कार्य कर रहा हूँ।

Jawahar Navodaya Vidyalayas (JNVs) are a system of alternate schools for gifted students in India. They are run by Navodaya Vidyalaya Samiti, New Delhi, an autonomous organization under the Department of School Education and Literacy, Ministry of Human Resource Development, Government of India. JNVs are fully residential and co-educational schools affiliated to Central Board of Secondary Education (CBSE), New Delhi, with classes from VI to XII standard. JNVs are specifically tasked with finding talented children in rural areas of India and providing them with an education equivalent to the best residential school system, without regard to their families' socio-economic condition.

The Navodaya Vidyalaya system is a unique experiment unparalleled in the annals of school education in India and elsewhere. Its significance lies in the selection of talented rural children as the target group and the attempt to provide them with quality education comparable to the best in a residential school system. Such children are found in all sections of society, and in all areas including the most backward.

JNVs exist all over India, with the exception of Tamil Nadu, where anti Hindi movements were widespread during past times. There are approximately 598 JNVs across India as of 2015-16 academic year.

स्कूलिंग के दौरान ही मुझे व मेरे दोस्तों को काउन्सलिंग की आवश्यकता महसूस हुई। स्कूल में कोई स्ट्रेस काउन्सलर नहीं होता है। जिसकी वजह से अनेक बार बहुत सारे बच्चे छोटी छोटी बातों को लेकर अनावश्यक तनाव में चले जाते हैं। जिनकी समय रहते पहचान नहीं की जा पाती है जिससे छात्र/ छात्राओं के मानसिक व शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है।

नवोदय विद्यालय में प्रायः एक शिक्षक ही काउन्सलर की भूमिका निभाता है। मैंने देखा कि हमारे नवोदय विद्यालय में शिक्षक दिनरात  मेहनत करते हैं जिनके ऊपर शिक्षण कार्य के अलावा हाउस मास्टर, एमओडी जैसे विभिन्न दायित्व हैं जिनका वो बखूबी पालन कर रहें हैं किन्तु उनकी भी सीमितता है। 

दिनांक 25.12.18 को इंडियन एक्सप्रेस अखबार से ने प्रमुखता से प्रकाशित किया कि "NAVODAYA SUICIDES: Overworked Teachers, No counsellers"   " Suicides in Navodaya schools:49 in 5 years" in which 11 in 11th class and 15 in 12th class. जिसको पढकर लगा कि स्थिति काफी दयनीय है। हमें इस बात को एनवीएस दिल्ली के सामने विधिवत रखनी चाहिये कि बच्चों की काउन्सलिंग के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करें। 

उसी प्रकार दिनांक 27.12.18 को हिंदी अखबार पत्रिका ने प्रकाशित किया कि  "कोटा में छात्रों की आत्महत्या पर सरकार चितिंत" "देश में हर रोज चार स्कूली छात्रों ने की खुदकुशी"  परीक्षाओं का दबाव एक वजह। 

पिछले कई वर्षों से निरंतर जवाहर नवोदय विद्यालय समिति से जुडे विभिन्न सामाजिक कल्याण संस्थाओं, शिक्षकों के संगठनों तथा अन्य एनजीओ ने उक्त आत्महत्याओं के संबंध में विस्तृत जांच की जाकर इस बच्चों में पनपती आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने हेतु आवश्यक कदम उठाने हेतु आवाज उठाई गई किन्तु विभिन्न विद्यालयों में हुई इन आत्महत्याओं की घटना की फौरी तौर पर जांच की जाकर स्थानीय स्तर पर ही किसी अधिकारी/ कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर अपने कर्त्वयों की इतिश्री कर ली जबकि ये स्थानीय स्तर की समस्या न होकर राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय स्तर की समस्या है। उनकी उस पुकार को किसी ने गंभीरतापूर्वक नहीं सुना और समस्या इतनी विकराल हो गई कि इंडियन एक्सप्रेस न्यूज पेपर की फर्स्ट पेज की हैडिंग के रुप में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। 

नवोदय विद्यालय में बच्चों का चयन एक उच्च स्तरीय परीक्षा के बाद  किया जाता है। नवोदय विद्यालय में बच्चे अपने माता पिता से दूर रहकर शिक्षा प्राप्त करते हैं ऐसे परिस्थितियों में ये स्कूल का दायित्व हो जाता है कि उन्हें मानसिक तनाव से दूर रखा जावे।

सीबीएसई के द्वारा भी कहा गया है कि माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर प्रत्येक छात्रों को मनौवैज्ञानिक परामर्श प्रदान किये जाने की आवश्यकता है। बोर्ड ने बच्चों की स्कूली शिक्षा के दौरान सभी स्तरों पर पूर्णकालिक काउन्सलर की आवश्यकता पर जोर दिया है। 

अतः मेरा संबंधित से निवेदन है कि 

1. तत्काल प्रभाव से पूर्णकालिक काउन्सलर की व्यवस्था की जावे ताकि बच्चों में बढते तनाव तथा आत्महत्या जैसी आत्मघाती सोच को बढने से रोका जा सके।