Need Compulsory Nationalist Education System for All

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प्यारे देशवासी,

मैं यह पिटिशन अगर कोशिश करुं तो अंग्रेजी में लिख सकता था, लेकिन दो कारण से राष्ट्रभाषा में लिख रहा हुं। एक तो, मैं मेरी बात सही ढंग से रख पाउंगा, और दुसरा, मेरी बात ज्यादा लोगों तक पहुंचा पाउंगा। मैंने इसी विषय पर कुछ साल पहले पिटिशन कि थी, लेकिन वह गुजराती भाषा में होने के कारण ज्यादा रिस्पोन्स नहीं मिला।

खेर, तो मैं यह पिटिशन शिक्षा के विषय के लिए कर रहा हुं। पिटिशन के तीन प्रमुख आशय है, (1) देश के सभी बच्चों को कम-से-कम 12 वी कक्षा तक शिक्षा मिलनी चाहिए - लेकिन (2) यह शिक्षा हमारी भारतीय परंपरा और सही सही भारतीय संस्कृति एवं इतिहास के साथे होनी चाहिए। (3) शिक्षकों को शिक्षा के अलावा दूसरे काम न दिए जाए।

12 वी तक सभी बच्चों को शिक्षा मिलेगी तो मुझे लगता है कि देश के विकास के लिए अपनेआप रास्ते खूलते जाएंगे।

दुर्भाग्य से अब तक ज्यादातर शिक्षा साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित छद्म इतिहासकारों अथवा इस्लामिक इतिहासकारों द्वारा लिखा गया गलत इतिहास ही पढाया जाता है। हमारे देश में जिस तरह की साम्यवादी शक्तियां सनातन परंपराओं को नष्ट कर रही है, और उसके सामने कथित रूप पे पढे लिखे लोग सही ढंग से प्रतिकार नहीं कर पा रहे है उससे यह बात साबित होती है कि भारत विखंडन का एजंडा काम कर रहा है और भारतवर्ष कि एकता पर खतरा है।

एसी स्थिति में सिर्फ पौराणिक भारतीय परंपरा और इतिहास के आधार पर लिखी गईं पुस्तके ही पाठ्यक्रम में होनी चाहिए ऐसा मैं स्पष्ट मानता हुं।

एक तीसरा और बहुत ही महत्त्वपूर्ण मुद्दा हमारे शिक्षको - गुरुओं के सम्मान से जुडा है। मैं इस पिटिशन के माध्यम से सरकार से आग्रह करना चाहता हुं कि शिक्षा को सुद्रढ बनाने के लिए, शिक्षा के माध्यम से हमारे देश का चारित्र्य सुद्रढ बनाने के लिए आवश्यक है कि हमारे सभी सम्माननीय शिक्षकों को शिक्षा के कार्य के लिए पूरा वक्त मिले।

मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि, शिक्षकों को शिक्षा के अलावा दी जा रही कामगीरी, जैसे जनगणना, मतदार यादी तैयार करना, टीके लगाना या फिर ऐसे कामों मे लगाना बंद नहीं तो कम तो कर ही देना चाहिए। ऐसा करने से शिक्षकों को पढाने के लिए सही वक्त मिल पाएगा जो आगे जाके हमारे देश को ही लाभ पहुंचाएगा।

पीछले कुछ दसक से शिक्षा और शिक्षकों का मान घट रहा है, और यही वजह है कि अच्छे और सच्चे लोग शिक्षा के क्षेत्र में आना नहीं चाहते। सही लोगों की यह उदासी ही हमारी शिक्षा प्रणाली को कमजोर कर रही है, उसे फिर मजबूत करने कि जरूरत है।

इसीलिए मुजे लगता है कि, मेरे इन तीनों मुद्दो पर पूरी गंभीरता से विचार किया जाय और उसे हो सके उतना जल्दी लागु किया जाए। जयहिंद।



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