JUSTICE FOR VETERAN RAJESH SINGH,SBI BRANCH MANAGER SUPOUL DIST SAHARSA BIHAR

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सुपौलकेस्टेटबैंकमैनेजरराजेशकु.सिंह :हत्याकीसाजिशकीअंतहीनतादास्तांl- 27 अप्रैल 20l8--- सुपौल के स्टेट बैंक की निर्मली शाखा के मैनेजर राजेश कुमार सिंह की हत्या की साजिश के ऊपर से धीरे-धीरे पर्दा उठ रहा है।सबूतो' के आधार पर पुख्तातौर पर कहा जा सकता है कि राजेश की हत्या के पहले भी गहरी साजिश हुई और बाद में भी। इस साजिश कीअंतहीन कहानी है।
जिस गिरोह ने अपनी राह का रोड़ा राजेश को मान लिया था। उस गिरोह ने उन्हें ऊपर भेजने का निश्चय किया था। तंग -हार कर। राजेश के कर्तव्य परायणता के ईमानदार आचरण के कारण। राजेश उनकी आंखों की किरकिरी बने थे। वह भी करीब दो-तीनमहीनेकीअल्पावधिमें। उनके वहां पदस्थापन के समय से ही। तंग- हारकर ही राजेश ने स्टेट बैंकऑफइंडिया के सहरसा स्थित क्षेत्रीय प्रबंधक को अनेक बार मौखिक एवं मोबाइल से अपनी वेदना सुनाई थी।फिरभीराजेशकीशिकायत पर क्षेत्रीय प्रबंधक प्रशांत वारीयार ने कोई ध्यान नहीं दिया?तबसाजिशकर्ता गिरोह के खौफ से तंग आकर राजेश ने 20 अप्रैल 2018 को अपनी मोबाइल से मैसेज करके उनसे अपनी तकलीफ सुनाने का मौका मांगा। फिर भी मौका नहीं मिला? फिर राजेश ने 21 अप्रैल, 2018 को अपना इस्तीफालेकर छेत्री प्रबंधक क्षेत्रीय प्रबंधक प्रशांत वारीयार के पास गए। अभी तक यह तो पता नहीं चला है कि उस दिन क्षेत्रीय प्रबंधक प्रशांत वरीयार को राजेश ने अपनाइस्तीफापत्रदिया अथवा नहीं? इस यातनापूर्ण प्रसंग की कथा खुद क्षेत्रीय प्रबंधक प्रशांत वरीयार ही सुनाएंगे? लेकिन उनकी उदासीनता भी राजेश की हत्या की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने में मददगार जरूर बनी है। यह लापरवाही क्षेत्रीय प्रबंधक ने जानबूझकर की अथवा विकृत कार्य संस्कृति की वजहसे। इसका पता तो गहराई से जांच के बाद ही चलेगा।
लेकिन, घटनाक्रम की तफसील में सिंहावलोकन करने से इस हत्या की साजिश का पुख्ता सबूत उजागर तो होता ही है। राजेश की हत्या की योजना पहले से गिरोह ने जैसे और जिस रुप में बनाई थी ,उसका पता तो नहीं है। बेशक, लोक अदालत से निकलने के बाद गिरोह ने राजेश को जबरन शहर के 11 नंबर वार्ड के जिस बिल्डिंग में ले गए और बुरी तरह मारा- पीटा तथा छत से जबरन धक्का देकर गिराया। इससेउनकी हत्या करने की साजिश का पर्दाफास होता है। क्योंकि, घटना के घटित होने के तुरंत बाद साजिश में लगे गिरोह ने जो गलत सूचनाएं दी, उससे हत्या की साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश होता है। मीडिया तथा सोशल मीडिया में खबर दी गई कि "राजेश ने तीन मंजिला घर, जिसमें राजेश रहते थे, ने कूदकर आत्महत्या करने का गंभीर प्रयास किया है।" यहां साजिश का पहला सबूत मिलता है। 11नंबर वार्ड में, जिस बिल्डिंग का हवाला दिया गया है ,जिस बिल्डिंग में uco बैंक चलता है, वहां उसी बिल्डिंग में राजेश का डेरा बताया गया ,जहां उनका रहना बताया गया। पता नहीं यह झूठी कहानी कैसे गड़ी गई? उस बिल्डिंग में राजेश को पहली बार ले जाया गया। हकीकत तो यह है कि उनका डेरा शहर के वार्ड नंबर 14 में अवस्थित था। परंतु, उनके डेरा को 11 नंबर वार्ड में बता कर साजिश का सबूत तो दे ही दिया गया है।
सबूत तो घटना के उपरांत अनेको दृष्टिगोचर होते हैं। गिरोह ने घटना के बाद पुलिस को सूचना तो जरूर भेजी लेकिन पुलिस के आने के पहले ही वे लोग बुरी तरह घायल राजेश को लेकर dmch लहरियासराय (दरभंगा) के लिए चलदिए थे, जहां उन्हें रेफर किया गया था। लेकिन गिरोह ने उन्हें dmch की जगह बगल में स्थित "पारस ग्लोबल हॉस्पिटल" में भर्ती कराया, जहां पारस अस्पताल ने राजेश को मृत घोषित कियाऔरपोस्टमार्टम में भेज दिया। साजिश की यहां दूसरी सबूत मिलती है। गिरोह शायद, राजेश की मृत्यु की सुनिश्चिता की इंतजार में था। इसीलिए यहां हॉस्पिटल की हेरा फेरी की गई। शुक्र कहिए कि पारस अस्पताल ने कागज में स्पष्ट रुप से कहा है कि" मेरे यहां कोई इलाज नहीं हुआ। वे 4:00 बजकर 25 मिनट पर भर्ती हुए तथा 4:00 बजकर 33मिनट पर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए dmch भेज दिया।" यहां भी घटनाक्रम के तारतम्यसे राजेश की हत्याऔरउसकीअंतिम परिणति पर पहुंचाने के साजिशाना -सबूत का स्पष्ट रुप से का पता चलता है।
बैंक मैनेजर राजेश की साजिशाना हत्या के प्रमाण तो कदम कदम पर है। लेकिन, गिरोह की साजिश के शातिराना षड्यंत्र की शुरुआत भी भ्रामक कहानी के रूप में हुई और अंत भी। हत्या की पुष्टि होने के बाद राजेश की हत्या का केसउसकेपिताअवकाशप्राप्तप्रधानाध्यापक रामाश्रयसिंह के कथित लिखित बयान के आधार पर किया गया। युवा बेटे बैंक मैनेजर राजेश की हत्या से बदहबास पिता ने जो बयान दिया और जिस पुलिस अधिकारी ने बयान लिया। उसमें भी खूब हेरा फेरी की गई। उन्होंने बोला कुछ और लिखा गया कुछ। हत्या की साजिश का यह तीसरा पहलू है। गहरी आवश्यक जांच का विषय भी। सुपौल पुलिस से बचने के लिए भागा गया तथालहरियासराय (दरभंगा) पुलिस को प्रभाव में लेकर जबानी बयान को लिखकर उस पर राजेश केपितारामाश्रय सिंह का हस्ताक्षर कराया गया। यहां गिरोह की साजिश का पता इससे चलता है कि उसने बेताओ पी के बयान लेने वाले अधिकारी को प्रभाव में लेकर बयान के तथ्यों की हेरा फेरी कराई गई। रामाश्रय सिंह ने राजेश की रहस्यमई मौत बोला था और लिखा गया संदेहआत्मक मौत। उन्होंने राजेश का डेरा वार्ड नंबर 14 में बतलाया, लेकिन लिखा गया वार्ड नंबर 11 में। सुपौल से दरभंगा तक हत्या की साजिश में कौन लोग लगे थे ?इसकी पकड़ से हत्या की साजिश से पूरी तरह पर्दा उठ जाएगा?-



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