#GSTHatao : दिव्यांगों की व्हीलचेयर और अन्य उपकरणों पर GST समाप्त किया जाए

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मेरा नाम मेहान दोशी है और मैं 11 साल का हूँ। मैं मुंबई के हिल स्प्रिंग इंटरनेशनल स्कूल में 5वीं क्लास में पढ़ता हूँ। मैं हाल ही में निपुण मल्होत्रा जी से मिला था, जो मेरे लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं।

दिव्यांगों के लिए उनके उपकरण जैसे—व्हीलचेयर, बैसाखी, कान की मशीन इत्यादि बहुत ज़रूरी होती हैं। इतनी ज़रूरी कि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी इन उपकरणों पर निर्भर करती है। दुर्भागय से आज भी इन उपकरणों पर टैक्स लगता है, जिसके कारण दिव्यांगों को अपने रोज़मर्रा के जीवन को जीने के लिए भी अपनी जेब से और ज्यादा पैसे देने होते हैं।

आज भी दिव्यांगों के अधिकतर उपकरणों 5% जीएसटी (GST) के दायरे में आते हैं। इसलिए मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूँ कि दिव्यांगों के लिए इस टैक्स को 5% से 0% किया जाए। उनके रोज़मर्रा के जीवन को आसान बनाने के लिए सरकार इतना तो कर ही सकती है।

मैं अपने एक्जीबिशन के लिए एक प्रोजेक्ट कर रहा हूँ, जो 5वीं क्लास का मेरा फाइनल एग्ज़ाम है। इसमें हम सबको एक विषय चुनना था। जिसमें मैंने दिव्यांगों के साथ होने वाले भेदभाव को विषय के रूप में चुना। मैं इस विषय को लेकर कुछ स्कूलों में भी गया और मैंने निपुण मलहोत्रा जी और डॉ केतन मेहता जी से भी बात की और इस मुद्दे के बारे में और जानकारी जुटाई।

मैं जानता हूँ कि भारत सरकार ने पहले ही दिव्यांग व्यक्तियों के उपकरणों के लिए जीएसटी (GST) को 18% से 5% कर दिया है। और ये निसंदेह एक बहुत अच्छा और सराहनीय कदम है। पर अगर इसको पूरी तरह खत्म कर दिया जाता तो देश के दिव्यांग लोगों का जीवन और बेहतर हो जाता। वो हकीकत में अपने लिए आसानी से और कम कीमत में उपकरण खरीद सकते।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और मेरा साथ दें ताकि हम दिव्यांगों के लिए ये बड़ा बदलाव ला सकें।