Stop Eviction, Implement Street Vendor Act 2014 in Pan India

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Footpathi : Running the Nation

फूटपाथ दुकानदारों की रोज़ी – रोटी का स्ट्रीट वेंडिंग ही एकमात्र जरिया है लेकिन उन्हें आये दिन अवैध उजाडीकरण और अनैतिक व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है जो सर्वथा अनुचित है,और फूटपाथ दुकानदारों के लिए 2014 में बने केन्द्रीय क़ानून एवं 9 सितम्बर 2013 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पुनर्वसन आदेश के विरुद्ध है |

फूटपाथ दुकानदार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग हैं, लेकिन बावजूद इसके फूटपाथ दुकानदारों का शहरी अर्थव्यवस्था की मजबूती में एक बड़ा योगदान है क्यूंकि देश के फूटपाथ दुकानदारों का डेली टर्न ओवर 8 हज़ार करोड़ से भी ज्यादा का है जो लो सर्किट इकॉनमी को बड़ी मजबूती प्रदान करता है, साथ ही साथ यह शहरी गरीबी को कम करता है |

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अर्जुन सेनगुप्ता की रिपोर्ट के आधार पर देश की 77% जनता की अर्थात देश की लगभग 80 करोड़ जनता की प्रति व्यक्ति खरीदी क्षमता मात्र 20 रुपये रोजाना है, अर्थात देश की 80 करोड़ आबादी की जरुरत की चीजें ये लोग इतनी कम कीमत में उपलब्ध करवाते हैं, साथ ही इनके द्वारा बेचे जानेवालो उत्पादों के उत्पादनकर्त्ता जो लाखों की संख्या में किसान, घरेलु उद्योग, कुटीर उद्योग हैं वो सिर्फ इसी बाज़ार पर निर्भर करते है इसी बाज़ार के कारण उनका और उनके साथ जुड़े लोग और उनके परिवारों के करोड़ों लोगों का भरण – पोषण होता है | समाज के प्रति इनका इतना अधिक और महत्वपूर्ण योगदान होने के बावजूद बदले में इन्हें सिर्फ गालियाँ, लाठियां, दुर्व्यवहार ही मिलता है जबकि देश के 93% रोज़गार इसी असंगठित क्षेत्र में है और देश की GDP का 63% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है |

रोज़ कमाना रोज़ खाना वाली आज के समय में उन्हें पिछले लगभग दो महीने से जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है उसे समझना आपके लिए मुश्किल नही है |

आर्थिक दृष्टि से कमजोर इस वर्ग की बची खुची पूंजी जिस दिन ख़त्म हो जाएगी, जिस दिन ये अपने बच्चों के मुंह में खाना नही दे पायेंगे आप समझ सकते हैं उस दिन इस वर्ग का मासूम चेहरा कितना बदल जाएगा कोई आत्महत्या का रास्ता चुनेगा कोई असामजिक तत्व बनेगा इसके अलावा इनके पास कोई रास्ता नही बचेगा |

 

हमें तो आश्चर्य इस बात का है की Protection of Livelihood & Regulating of Street Vendor 2014 के अनुसार इनके जीविका को सुरक्षित करने की जिनकी जिम्मेवारी थी उन्होंने ही इन्हें इनके अधिकार से वंचित कर रखा है, आपको जानकर आश्चर्य होगा की 1 नवम्बर 2017 को मुंबई हाई कोर्ट के आदेश में भी सर्वप्रथम इनका सर्वे करना और टाउन वेंडिंग कमिटी बनाने का आदेश हुआ है और जहाँ भी सर्वे नही हुआ है वहां सबसे पहला कार्य डिजिटल सर्वे करना है, ऐसे में जब दुकानदार ही नही होंगे तो सर्वे का कार्य कैसे संभव होगा |

इन्ही परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अब यह अति आवश्यक हो गया है की आप यानि देश की जनता इसमें अपनी पूर्ण सहभागिता दे क्यूंकि हम फेरीवाले दिन – रात, ठंडी, गर्मी, बरसात कैसी भी परिस्थिति में आपको कम से कम कीमत में बेहतर सेवा प्रदान करते हैं, अगर आपको लगता है की हम आपके लिए जरुरी है तो हमारी इस अत्यंत दयनीय परिस्थति में आपका अमूल्य सहयोग दें|

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