petition against sc/st act and cast based reservation system

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सेवा में ,
श्रीमान् आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय
श्री नरेन्द्र मोदी
प्रधनमंत्री (भारत )

विषय - sc/st एक्ट में सुधार के सम्बन्ध में .

महाशय, फ़िलहाल में आपने जो सर्वोच्च न्यायलय के आदेश की अवहेलना करते हुए sc/st एक्ट को पारित किया है इससे पूरा सवर्ण समाज दुखित है , आप मुझे ये बताएँगे कि इस इक्कीसवीं सदी में कितने दलित हैं जिन्हें दबाया जा रहा है , जिनका शोषण किया जा रहा है, आप हमेशा कहते है कि आप पिछड़ी जाति से हैं और देश के प्रधानमंत्री हैं, अगर सच में दलित और पिछड़ी जाति को दबाया और शोषण किया जा रहा होता तो न आप इस देश के प्रधानमंत्री होते और न ही श्री रामनाथ कोविंद जी भारत के राष्ट्रपति होते. छुआछुत और सामाजिक असामनता बहुत पहले ही खत्म हो चुकी है और अगर कहीं है भी लोगो की मानसिकता अच्छी नहीं है. और इस मानसिकता के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ अच्छी शिक्षा का नहीं होना है. आपकी नजर में क्या सवर्ण गरीब नहीं होता? दलित शोषित उस ज़माने में थे जब जमींदारी प्रथा थी लेकिन अब तो एस तरह की व्यवस्था नहीं है तो फिर समाज के एक करने के बाजय आप जातिवाद की राजनीति कर रहे हैं.

आरक्षण किसको चाहिए ? आरक्षण से कितने जरुरतमंद को फायदा मिल रहा है ? कभी इसके बारे में सोचा है आपने,.

ये कैसा कानून है जिसमे एक विशेष जाति का आदमी किसी अन्य जाति के आदमी पर झूठा आरोप लगा दे तो बिना किसी जाँच पड़ताल के तुरंत उसको जेल में दाल दिया जाएगा .

अगर एक दलित ,एक सवर्ण को उसकी जाति से संबोधित करे तो कोई दिक्कत नही है और और वहीँ दूसरी तरफ अगर कोई सवर्ण ,दलित को उसकी जाति से संबोधित करे तो बिना कुछ सोचे समझे जेल में डाल दो.

इस क़ानून का कितना दुरुपयोग हो रहा है शायद आपको इसका अंदाजा नहीं है.

धिक्कार है ,देश के प्रधानमंत्री की ऐसी सोच पर. राजा के लिए सभी प्रजा एक समान होती है ,किसी विशेष वर्ग के लिए राजा नही होता.

आपने obc आरक्षण लागू किया . जरा मुझे बताएँगे कितने obc पिछड़े हैं , भारत का पुरा व्यापार obc वर्ग ही चलाता हैं और आप उसे पिछड़ा कह रहे है.

कल को अगर मायावती कहें कि मोदी जी ने मुझे दलित कहा है है तो फिर तो आप भी बिना किसी जांच के तुरंत जेल में चले जायेंगे और मायावती आपको कहाँ से गरीब लगती हैं .

गरीबी जाति देखकर नहीं आती प्रधानमंत्री जी , कृपया कर इसपर विचार करें.
उत्तर प्रदेश और बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में जाकर देखिये कैसे शिक्षक पढ़ा रहे है? जिनको शुद्ध से अपना नाम तक नही लिखना आता.

नौकरी के फॉर्म से लेकर आ ई आ ई टी तक हर जगह समान्य वर्ग के साथ भेद भाव होता है चाहे वो कॉलेज में नामांकन के लिए ही क्यों न हो.
सच से मत भागिए महोदय, संविधान समानता की बात करता है मगर मुझे तो लगता ही नही , सरकार के आरक्षण और अब sc/st एक्ट के तहत तो अब ऐसा लगता है की सामान्य वर्ग ही सबसे ज्यादा शोषित हो गया है .

आपसे नम्र निवेदन है की सरकार sc/st एक्ट पर एक बार फिर से विचार करे और आरक्षण सिर्फ आर्थिक आधार पर ही हो अन्यथा देश गर्त में चला जायेगा.

धन्यवाद
मयंक कुमार श्रीवास्तवा



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