Declare Jind a Union Territory (जींद को केंद्र शाषित क्षेत्र घोषित करो)

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100 साइन के बाद इस पेटीशन को लोकप्रिय पेटीशनों में फीचर किए जाने की संभावना बढ़ सकेगी!

Text in English (हिंदी में पड़ने के लिए निचे स्क्रॉल करे)

Jind district is considered political and geographical heartland of Haryana yet it remains one of the most backward district of Haryana. As per reports, Its per capita income is about half of avg per capita income of Haryana state (Read:- Part of three constituencies, Jind still fares worst). Despite being in center of Haryana no industry , no proper roads, no education hub , poor medical facilities plagues Jind. Why? 

Jind tried all political parties , all sort of leaders but everyone failed Jind, everyone ignored Jind. Now Jind want freedom from abject neglect that sucessive state govts of past 73 years and its leaders have inflicted upon Jind. Jind is not just for political rallies and fake promises. We want our share of progress. Jind was promised sports university , where is it?? jind was promised medical collage in 2014, where is it, till date its just a promise? Jind is only city in haryana which does not have any town park, jind has worst huda sectors. Jind was divided in 3 lok sabha constituencies in a way that now Jind district is not a priority for any of 3 M.P's. See list of brazen fake promises Rs 10,000 crore for road projects in Haryana where are 10000 crore? Big promises were made during jind by-elections , once won Jind was neglected again. One can not blame any single party for neglect of jind as Successive Haryana govts since 1966 have failed to bring developement to Jind district.

Having lost faith in Haryana Govt , be it by any party only solution remains is to be governed directly by Center i.e Govt of India. 

We the people of Jind request Prime Minister of India and its parliament to please declare Jind as Union Territory and free us from 70 years neglect. You are our only hope.

जींद जिला न सिर्फ भौगोलिक दृस्टि से एवं राजनितिक दृस्टि से भी हरियाणा का केंद्र माना जाता रहा है परन्तु फिर भी ये हरियाणा के सबसे पिछड़े जिलों में से एक है। जींद की प्रति व्यक्ति आय हरियाणा की औसत प्रति व्यक्ति आय की आधी है। (पढ़े:- 3 लोक सभा क्षेत्र का हिस्सा फिर भी जींद पिछड़ा हुआ) हरियाणा के मध्ये में स्तिथ होने के बावजूद न यहाँ सड़के है, न शिक्षा के केंद्र, न ही स्वास्थय सुविधाएं, न ही किसी प्रकार के रोजगार के साधन, न ही उद्योग। ऐसा क्यों ?

जींद जिला ने सभी राजनीतिक पार्टियों को परखा , सबको मौका दिया , सब तरह के नेताओ को जिताया लेकिन सब ने जींद के साथ अन्याय ही किया। पिछले 73 साल से जींद को सिर्फ उपेक्षा ही मिली है परन्तु अब जींद जिला इस उपेक्षा से मुक्ति चाहता है। जींद जिला की जनता ये बताना चाहती है के जींद सिर्फ एक रैली का मैदान नहीं है , जींद सिर्फ झूठे वादों के लिए नहीं है। हमें अपने हिस्से का विकास चाहिए । लेकिन अब हमारा हरियाणा सरकार से विशवास उठ चुका है , चाहे वो किसी भी पार्टी की सरकार हो। जींद जिला को स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का सपना दिखाया गया लेकिन आज तक नहीं बानी, 2014 में मेडिकल कॉलेज का सपना दिखाया आज तक नहीं बना , उल्टा जींद जिला को 3 अलग अलग लोक सभा क्षेत्रों में बाँट दिया गया और अब जींद जिला किसी भी सांसद के लिए प्राथमिकता नहीं रहा। जींद इकलौता शहर होगा हरियाणा का जहा एक ढ़ग का पार्क तक नहीं है , यहाँ के हुडा सेक्टर्स सब से ख़राब है। जींद नरवाना उचाना सफीदों जुलना सब का बुरा हाल है। राजनीत्तिक पार्टियों के झूट के शर्मनाक पुलंदे देखिये https://www.financialexpress.com/archive/rs-10000-crore-for-road-projects-in-haryana/957646/ कहाँ है 10000 करोड़ ? जींद उप चुनाव के वक़्त भी बड़े बड़े वादे किये गए , चुनाव जीतने के बाद दूध में से मखी के जैसे निकाल फेंका गया। किसी एक राजनीतिक पार्टी को दोष नहीं दे सकते क्योंकि 1966 से ही सिलसिलेवार सभी हरियाणा सरकारों ने जींद को उपेक्षित किया है . इसी लिए जींद की जनता को अब किसी भी राजनीतिक पार्टी या हरियाणा सरकार से कोई उम्मीद नहीं नहीं बची 

अब जींद जिला को इस उपेक्षा से मुक्ति चाहिए एवं इसका एक ही समाधान है वो है सीधा केंद्र शाशन मतलब भारत सरकार।

इसी लिए हम जींद जिले के निवासी, माननिये प्रधान मंत्री एवं भारत की संसद से अनुरोध करते है की जींद को केंद शाषित प्रदेश घोशित करे एवं हमें इस 73 साल (19 + 54 साल ) की उपेक्षा एवं तिरस्कार से मुक्ति दिलवाये। अब आप ही हमारी आखिरी उम्मीद है।