No reopening of school upto class 12th until covid cases in the State is zero

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जिस तरह का करोना का संक्रमण संपूर्ण भारत में फैलता जा रहा है ऐसे समय में प्राथमिक शिक्षा लेने वाले छोटे बच्चों से लेकर  12वीं क्लास तक के बच्चों की आनलाइन क्लास ही होती रहनी चाहिए जब तक कि करोना के संक्रमण में गिरावट न आ जाएं या करोना वायरस की दवा नहीं मिल जाता या प्रॉपर वैक्सीन नहीं बन जाती है। संभव है कि कुछ अभिभावक इस बात से सहमत ना हो और कुछ अभिभावक अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने में असमर्थ हो, ऐसे समय में बीच का रास्ता ही हर समस्याओं का हल होना चाहिए। स्कूलों में एक ही समय पर लाइव क्लास के साथ ऑनलाइन क्लास की सुविधा भी हो । अभिभावक को यह तय करने का अधिकार हो कि उनके बच्चे के लिए कौन सा विकल्प सही है ।
जो बच्चे स्कूल में आकर पढ़ना चाहें उन्हें स्कूल बुलाया जाए और जो बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हो उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा जारी रखी जाए, इस तरह स्कूलों में सोशल दूरी भी बनी रहेगी और टीचर पर भी बच्चों की देखरेख का कम दबाव रहेगा, ऐसे समय में थोड़े ही अभिभावक होंगे जो अपने बच्चे को स्कूल भेजना पसंद करेंगे।
बच्चे छोटे हो या बड़े उनके लिए अपने दोस्तों के बीच सोशल दूरी का पालन संभव नहीं है इस अपरिपक्व उम्र यह अपेक्षा करना कि दोस्तों के बीच रहकर उनसे बात ना करें और दूर रहे ,उन पर मानसिक दबाव डालने जैसा है। कुछ बच्चे एलर्जी और अन्य बीमारियों से ग्रसित होते हैं तो ऐसे में उनका करोना संक्रमण से बचाव कैसे हो पाएगा।
कुछ देश के आंकड़े यह साबित करते हैं कि बच्चे संक्रमित होकर स्वस्थ हो जा रहे हैं परंतु अगर यह संक्रमण उनसे घर तक आता है और घर के किसी भी सदस्य को संक्रमण हो जाता है संपूर्ण परिवार ही अस्थिर हो जाएगा।
कुछ देशों का उदाहरण भी दिया जाता है कि उन्होंने स्कूल खोल दिए हैं लेकिन क्या हमारे स्कूलों के पास वही आधारभूत संरचनाएं हैं? सामान्य दिनों में बच्चे फ्लू, वायरल फीवर, कॉमन कोल्ड, यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन जैसे अन्य कई बीमारियों से ग्रसित होते हैं क्योंकि प्रॉपर हाइजीन की व्यवस्था की कमी आज भी हमारे प्राइवेट स्कूल हो या सरकारी स्कूलों में है। आज भी कई ऐसे स्कूल है जहां पर अभिभावकों की शिकायत को नजरअंदाज किया जाता है ऐसी परिस्थिति में कई ऐसे अभिभावक है जो बच्चों को भगवान भरोसे नहीं छोड़ सकते । हम लोगोंं को अपने बच्चों की सुरक्षाा के लिए एक आवाज बनकर सामने आना है।

Stand with us, as we raise our voices for the safety of our children. Sign and share this petition asking for no school for children.

VOICE OF THOUSANDS OF PARENTS