सैनिको को शहीद का दर्जा मिलना ही चाहिए?

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लोकसभा में गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने 22 दिसंबर 2015 को कहा कि इंडियन आर्म्ड फ़ोर्स के साथ-साथ सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स और असम राइफल्स के सभी सैनिक अगर किसी ऑपरेशन या ड्यूटी के दौरान मारे जाते हैं तो उनको शहीद नहीं कहा जायेगा. उनके नाम के आगे 'शहीद' शब्द नहीं लगाया जायेगा.

पुलवामा में सीआरपीएफ के 44 सैनिक जो मारे गए, उनको हम भारतीय भले शहीद कह कर पुकारें लेकिन हमारी अपनी सरकार के नजर में वो सभी शहीद नहीं हुए हैं.

मुझे लगता है कि सरकार को अपना ये फैसला बदलना चाहिए. जो हमारे लिए जान दे रहे हैं उनको हम शहीद का दर्जा भी नहीं दे सकते! इसमें एक बात गौर करने वाली है कि सेना, नौ सेना और वायु सेना के सैनिको को ड्यूटी के दौरान मौत होने पर शहीद का दर्जा दिया जाता है.

ये मांग मेरे जैसे नागरिकों के अलावा 7वीं पे कमीशन ने भी सरकार के समक्ष रखा था.

मैं भारत के सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि हम भारत सरकार से उन सैनिकों के बदले उनके हक की लड़ाई लड़ें, जो हमारे लिए सरहद पर लड़ते हैं.