छोटी नदियों के लिये न्याय का अभियान

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छोटी नदियां बचाओ अभियान

छोटी नदियों के लिए हमारा तात्कालिक एजेंडा
* छोटी नदियों के बिना मैदान में गंगा के वृहद स्वरूप की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसके लिए गंगा की सहायक नदियों के नाम के साथ गंगा जोड़ा जाए- जैसे पाण्डु गंगा।

*छोटी नदियों की गणना कराई जाए।
* नदी की जमीन का ऐलान किया जाए।
* ताल-तैलायों का पानी नदी में जाने के रास्ते खोले जाएं।
* बारिश का पानी रोके जाने के लिए नदी के किनारे जहां जगह जो वहा बड़े ताल बना दिये जायें।
* पेड़ पौधे लगें और नदी के पूरे कैचमेंट एरिया को संरक्षित किया जाए ।
* नदी के अंदर शहर और ग्रामीण क्षेत्र के नालों का किसी भी तरह का पानी जाने से रोका जाए।
*नदी के अंदर जलीय जीव जंतु रह सकें, ऐसा पानी रखना तय किया जाए।
*नदी के अंदर खनन नियंत्रित किया जाए और ईको बैलेंस बचाते हुए सिल्ट निकली जाए।
* पेड़ पौधों से ही नदी के किनारे परिंदे रह पाएंगे
जैव विविधता बचेगी, नदी किनारे पौधरोपण हो। फलदार पेड़ लगें।
*नदी की जमीन का चिन्हांकन आबादी के आसपास जरूर किया जाए।
* जिला मुख्यालय, ब्लाक मुख्यालय, पंचायतों में जिले की सभी नदियों का उल्लेख किया जाए।
*राज्य अपनी राज्य नदी घोषित करे, जिला पंचायत अपनी जिले की नदी यानी जनपद नदी घोषित करे।
नदी वे अतिक्रमण करने वालों पर आपराधिक मुकदमे चलाये जाएं।
* नदी के किनारे जो वन लगें, वो नदी की सम्पदा हों और जल संसाधन विभाग/ पंचायतें उसकी साझीदार हों न कि वन विभाग। नदी के वन और अन्य वनों में फर्क किया जाए।
* जिला पंचायतों में नदी- ताल, झील के संरक्षण का अलग प्रकोष्ठ बने।

पानी बचाओ... किसानी बचाओ...गांव की जवानी बचाओ..

देश और दुनिया के सामने जल संकट बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ा है। धरती के ऊपर और धरती के पेट के अंदर (भूगर्भ) पानी खत्म हो रहा है। तेजी से पेड़ कट रहे हैं। इसलिए ग्लोबल वार्मिंग शुरू हो गई है। जलवायु परिवर्तन का बड़ा खतरा सामने है, खेती और किसान की हालत बदतर हो गई है। इसके पीछे एक बड़ा कारण है देश की छोटी नदियां और ताल तलइयों का सूख जाना, मर जाना और नदियों के अंदर सीवर भर दिया जाना। छोटी नदियों से ही मैदान में गंगा विशाल रूप लेती थीं और पूरे उत्तर भारत को समृद्ध करती थीं। मगर आज गंगा मइया मैला ढोने वाली मालगाड़ी बन गई है। उनको जल देने वाली छोटी नदियाँ मृतप्राय हैं। जब छोटी नदियां बचेंगी, तभी गंगा बचेगी। तभी देश का किसान और जवान खुशहाल होगा।
इसी मकसद के साथ 2003 से छोटी नदी बचाओ अभियान शुरू किया गया। इसके तत्वावधान में कन्नौज से निकलने वाली गंगा की सहायक नदी पाण्डु के अंदर नाले गिराने और उसकी जमीन पर कब्जा कर लिए जाने, पनकी के थर्मल पार प्लांट की राख नदी में भर दिए जाने के खिलाफ लड़ाई और जन जागरूकता शुरू की गई और एक एक करके प्रदेश और देश की अन्य नदियों के हक में आवाज उठाने का सिलसिला शुरू हुआ। वर्ष 2012 में इलाहाबाद में देश भर की नदियों के कार्यकर्ता और सरकार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में नदी पुनर्जीवन सम्मेलन करके नदियों के लिए वृहद कार्ययोजनाएं बनाई गईं, मगर इसे सरकारों ने लागू नहीं किया। पाण्डु नदी से आगे बढ़ते हुए यह लड़ाई उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की ससुर खडेरी नदी , मध्य प्रदेश में रीवा जिले की बिछिया नदी और महाराष्ट्र की मीठी नदी समेत अन्य तमाम नदियों तक पहुचीं। जैसे राजस्थान में जल बिरादरी ने मिलकर 9 नदियों को पुनर्जीवित किया, जैसे पंजाब में नदी के अंदर गन्दगी सफाई का जन अभियान शुरू हुआ, उसी तरह एक एक नदी में यह काम शुरू होना चाहिए। इसके लिए जल कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में ससुरखडेरी नदी की खुदाई शुरू कराई, सरकार भी आगे आई मगर नदी पुनर्जीवन का काम अधूरा रह गया। इसलिए कुम्भ 2019 के मौके पर देश की छोटी नदियों को न्याय दिलाने के लिए, उन्हें बचाने के लिए एक वृहद अभियान शुरू किया गया है। 23 जनवरी को यूपी के कानपुर की पाण्डु नदी से नदी न्याय यात्रा शुरू की गई और देश के अलग अलग हिस्सों से लोग इस यात्रा में भागीदार हुए। कुल 108 नदियों की मिट्टी पानी लेकर छोटी नदियों को बचाने के लिए कुम्भ मेला में जन जागरण अभियान शुरू किया गया।

सन्तों, श्रद्धालुओं को बता रहे नदी का सच
छोटी नदियां बचाओ अभियान के कार्यकर्ता कुम्भ में जुटे देश के लोगों को कुम्भ का असली मकसद बताते हुए घूम रहे है कि कुम्भ सदियों से नदी के साथ न्याय के लिए होता आया है। कुम्भ सिर्फ स्नान का पर्व नहीं। इसमें अच्छे और बुरे का फर्क करने की शिक्षा दी जाती रही है। नदियों के साथ समाज का व्यवहार कैसा हो, यह तय किया जाता रहा है। इस दौरान बताया जा रहा है कि छोटी नदियों में शहरों का मलबा और मैला डाला जा रहा है। यही मैला गंगा में मिलकर उनको दूषित करता है। इसलिए सबसे पहले छोटी नदियों का अस्तित्व बचाना जरूरी है। छोटी नदियां नाले की तरह बहती है। न उसमें ऑक्सीजन है, न जलीय जीव जंतु। फैक्ट्रियों की गंदगी, सीवर मिलाकर नदी की हत्या की गई है। उसकी धारा पर कब्जा किया गया है। इससे आसपास की खेती बेकार हुई, बीमारियां फैली हैं।


हम क्या चाहते हैं और क्या है खतरा?
छोटी नदियां बचाओ अभियान की मांग है कि अब सरकार नदियों की गणना शुरू कराके नदियों की जमीन का चिन्हांकन शुरू कराए।
जिलों में नदियों को राजस्व अभिलेखों में नाला, बरसाती नाला दिखाकर उनकी जमीन पर कब्जा करने के षड्यंत्र हो रहे हैं, उसे रोका जाए। फैक्ट्रियों का कचरा, गन्दा पानी, सीवर और इलेक्ट्रानिक कचरा, थर्मल पावर प्लांट की खतरनाक राख छोटी नदियों में उड़ेलने का अपराध बन्द किया जाए। नदियों के कैचमेंट एरिया के जंगल काटे जा रहे हैं, इसी से नदियां मृतप्राय हैं, यही नदियां गंगा और यमुना में गन्दा पानी लेकर उसकी धारा को भी भीषण गन्दा कर रही हैं।

कुम्भ 2019 में हमारी कोशिशें
सरकार को चेताने, आमजन को जगाने और जिम्मेदारी निभाने के लिए कुम्भ नगर के सेक्टर 6 में अनन्त माधव मार्ग (पीपा पुल 16 के पास) छोटी नदियां बचाओ अभियान के तहत शिविर लगाया गया। यहां नदियों के संरक्षण की योजनाएं बनाई गईं और मेला में जुटे 20 लाख कल्पवासियों को छोटी नदियों- ताल तलैय्या बचाने के अभियान में सक्रिय रूप से जोड़ने की कोशिश हुई है।

विश्व के चित्रकारों का मिला समर्थन
छोटी नदियों की न्याय यात्रा को विश्व के मशहूर चित्रकारों का स्वयंमेव समर्थन मिला है। कुम्भ 2013 में छोटी नदियों के लिए हमारे संघर्ष को देखकर विश्व के 11 देशों के चित्रकार समूह 'वसुधैव कुटुम्बकम' ने रिवर डेमोक्रेसी के हमारे लक्ष्य को समर्थन दिया था। कई चित्रकार इस यात्रा और कुम्भ में साथ हैं। छोटी नदियों का सन्तों को, सरकार को और देश-विदेश के चित्रकारों/ साहित्यकारों को सौंपकर छोटी नदियों का सही दर्शन कराया जा रहा है। यह इसलिए ताकि उनकी व्यथा-कथा दुनिया के सामने आए।

नदी दर्शन और जल कथाएं
छोटी नदी बचाओ अभियान के विधिक दल ने वस्तुस्थिति की तथ्यात्मक रिपोर्ट, सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की रिपोर्ट माननीय कोर्ट को देने की तैयारी की है। गांव गांव जल संकट है। प्रत्येक नागरिक की जल संकट पैदा करने और जल संकट से उबारने में क्या भूमिका है? यह कथाएं शुरू की जाएंगी। स्कूली पाठ्यक्रम में नदियों की पढ़ाई शुरू की जाए। इसके लिए पुस्तक लेखन भी शुरू कराया गया है। हम देश भर में कह रहे हैं कि अब पानी के नाम पर राजनीति न हो। पानी की राजनीति की जाए। राजनीतिक दलों को पानी पर समग्र और अलग घोषणा पत्र लाना चाहिए।

 

कृपया इस अभियान से जुड़िये।

सम्पर्क सूत्र-

छोटी नदियां बचाओ अभियान
अनन्त माधव मार्ग, पीपा पुल 16 के निकट, सेक्टर 6 कुम्भ मेला 2019 (4 मार्च 2019 तक)

छोटी नदियां बचाओ अभियान-
कानपुर:-
एचआईजी 33, विवेकानन्द विहार डब्ल्यू 2 जूही,
कानपुर ( शिवाजी इंटर कालेज के पास नहर पट्टी पर)

प्रयागराज:-
फ्लैट नम्बर 404, सत्यम ब्लॉक, अम्बेडकर विहार आवासीय योजना, चौफटका, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

मेल-patrakarparisad@gmail.com

(छोटी नदियां बचाओ अभियान के लिए संयोजक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह 9532174093 की तरफ से जनहित में जारी)