याचिका बंद हो गई

Defaulters No Exit,Sorry

यह मुद्दा 13 हस्ताक्षर जुट गये


सभी लोग इस बात को जानते है की , बैंक्स के NPA ( Non-Performing Asset) बहुत ज़्यादा बडे हुए है ,बहुत ज़्यादा तादात मे ऐसे लोन्स है जो चुकता नहीं हो रहे है ,जबकि लोन लेने वाले या तो देश से भाग रहे है और उनकी अपनी ज़िन्दगी पर कोई फ़र्क नहीं पढता ,वोह अपनी अय्याश ज़िन्दगी जी रहे है , ताज़ा उद्धरण विजय माल्लिया का है ,सब वाकिफ है की उसमे किया हुआ और डूबते हुए बैंक्स को बचने के लिए सरकार नए नए तरीके निकल रही है ,ऐसे तरीके जिनसे आम आदमी का बोझ बड रहा है,आमिर लुटेरों के लूट की भरपाई आम जनता से की जा रही है। कभी मिनिमम बॅलन्स तो कभी 3 -4 बार से ज्यादा ATM विड्रॉअल पर फीस तो कभी किसी और तरीके से गरीब आम जनता की कमर तोड़ी जा रही है। मुझे लगता है की एक और तरीका हो सकता है जिसके ज़रिये आम जनता पर बोझ डाले बिना बैंक्स डूबते मे तिनके का सहारा तलाश सकती है।
मे सरकार को और फाइनेंस मिनिस्ट्री को एक तरीका बताने जा रहा हूँ ,अगर सरकार और फाइनेंस मिनिस्ट्री मेरे बताये इस तरीके पर काम करेगी इसे लागु करेगी तो उम्मीद है की बहुत तेज़ी के साथ NPA ( Non-Performing Asset) मे कमी आएगी और NPA ( Non-Performing Asset) बहुत तेज़ी के साथ(Performing Asset) मे बदलते हुए नज़र आयेगें ,अगर यह सिस्टम लागु हो जाता है तो यह सिस्टम लोन ना चुकाने वालो और डिफाल्टर्स के अंदर एक दहशत पैदा करेगा । इस सिस्टम पर काम करने के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री को फॉरिन मिनिस्ट्री के साथ एक प्रोग्राम एक सॉफ्टवेयर डवलप करना पड़ेगा। सिस्टम कुछ ऐसा है की , जितने भी बैंक्स है उन सब बैंक्स को एक सॉफ्टवेयर के ज़रिये फॉरिन मनिस्ट्री के इमिग्रेशन डिपार्टमेंट से जोड़ी जाये , जिस किसी के भी लोन की 5-6 क़िस्त ड्राप होती है , तो बैंक डिफाल्टर ( loanee) के नाम एक ब्लैक नोटिस जारी करे. यह ब्लैक नोटिस बैंक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के जरिये इमिग्रेशन डिपार्टमेंट को भेज दे और इमिग्रेशन डिपार्टमेंट इस ब्लैक नोटिस को हिंदुस्तान के सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर इमिग्रेशन डेस्क पर भेज दे,ताकि इमीग्रेशन पर डिफाल्टर ( loanee) को आउट आँफ कंट्री जाने से रोका जा सके, डिफाल्टर ( loanee) को एक्सिट ना मिले और उसे वापिस अपने शहर अपने घर आना पडेगा , इस मे किसी तरह की कोई पुलिस कारवाही या गिरफतारी नहीं होगी.इमीग्रेशन डेस्क डिफाल्टर ( loanee) को एक्सिट नहीं देगी उसे बता दिया जायेगा की उसके नाम लोन है जिसकी किस्ते जमा नहीं है और ब्लैक नोटिस निकला हुआ है , पहले बैंक जाकर अपने लोन का हिसाब करे तभी देश के बहार जाने दिया जायेगा , चाहे डिफाल्टर ( loanee) किसी भी वजह से हॉलिडे या कोई और वजह से आउट ऑफ कंट्री जाना चाहता हो तो वोह तब तक नहीं जा सकेगा जब तक की अपने लोन का कुछ हिसाब नहीं करदेता ,कंपनी और फर्म्स जो बडे बडे लोन हज़म कर जाती है उनमे कंपनी CEO और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को पार्टी बना कर उनके नाम से ब्लैक नोटिस जारी किया जाये। ताकि किसी भी तरह से कोई दूसरा माललिया देश की जनता का टैक्स का पैसा हज़म करके विदेश मैं अय्याशी न करता फिरे। इस सिस्टम को लागु करने मे कोई बहुत ज़ियादा मेहनत नहीं करनी है , ऐसा ही सिस्टम सुरक्षा एजेंसीज इस्तेमाल करती है जिसके जरिये मुजरिमो को देश के बहार जाने से रोका जाता है। इस सिस्टम मे करना यह है की बैंक्स और इमिग्रेशन डिपार्टमंट को जोड़ना है ,इसके और कई पहलुओं पर बात की जा सकती है , विचार विमर्श किया जा सकता है और एक पुख्ता सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जैसा की यह सिस्टम बैंक्स के लिए बहुत फायदेमंद होगा तो गोवेर्मेंट बैंक से यह सुविधा देने के लिए एक सालाना फीस भी तये कर सकती है। लेकिन मुझे लगता है की यह एक बहुत कामयाब तरीका हो सकता है इसके दबाओ मे लोन हज़म करने वालो मे एक खौफ बैठेगा , कोई पुलिस कार्यावाही या रिपोर्ट या गिरफ़्तारी के झमेलों की ज़रूरत नहीं है. बस एक ऐसा सिस्टम की बैंक डिफाल्टर की सुचना डायरेक्ट इमिग्रेशन डिपार्टमेंट को देदे और इमिग्रेशन डिपार्टमेंट डिफाल्टर को एक्सिट ना दे। डिफाल्टर बैंक आये अपने लोन का हिसाब करे और उसी वक़्त बैंक ब्लैक नोटिस को विड्रॉअल कर ले। उसके बाद डिफाल्टर को इमिग्रेशन डिपार्टमेंट एग्जिट दे।
मे फाइनैंस मिनिस्ट्री से गुज़ारिश करता हूँ की इस बात पर , इस विचार पर एक बार गौर ज़रूर करे।



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