GST मुक्त कपड़ा उद्योग

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कपड़ा इंसान की मूलभूत आवश्यकता है। आजादी के बाद से ही इस पर किसी तरह का अप्रत्यक्ष कर नही लगाया गया लेकिन इस बार की सरकार ने GST रूपी मकड़जाल हमारे पे थोप दिया।

हो सकता है कि #GST कर-सुधार की दिशा में एक अच्छी theory हो लेकिन इससे कर-प्रणाली आसान होगी , फ़िलहाल ऐसा नहीं लगता। व्यापारियों और उद्योगों को कई पंजीकरण कराने होंगे , विभिन्न रिटर्न्स भरने होंगे। GST की पेचीदगियाँ विविध कर-दरों के कारण और ज़्यादा बढ़ जायेंगी। महँगे accountants , CA के bills , कंप्यूटर और नेट कनेक्शन की व्यवस्था , अफ़सरशाही का डर , और पता नहीं क्या-क्या ! Accountant रख कर भी क्या व्यापारी उनके भरोसे झंझट-भरी कागज़ी कार्यवाहियों को छोड़ कर व्यापार करने को निश्चिन्त हो जायेंगे !
#नोटबंदी के क्रियान्वयन की असफलताओं को देखते हुए सबसे बड़ी आशंका यह भी कि क्या सरकार ने इस बार समुचित तैयारी कर ली है , क्योंकि यह नोटबंदी से भी कई गुना बड़ा परिवर्तन है ! पेड़ पर चढ़ कर मोबाइल नेटवर्क तलाश रहे केन्द्रीय वित्तराज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के प्रसंग के बीच क्या सरकार आश्वस्त है कि वह इसी नेटवर्किंग के भरोसे इतने बड़े पैमाने पर registrations , "e-way" bills , returns , tax credit या debit आदि करवा पायेगी ! कहीं ये पूरी व्यवस्था किसी #ज़िद्द की भेंट तो नहीं चढ़ जायेगी !
नोटबंदी के क्रियान्वयन की विफ़लता किसी राजनीतिक विरोध का विषय नहीं बल्कि एक स्पष्टतः दृष्टिगोचर और लगभग सर्वमान्य सी स्थिति थी ! सभी आशंकाओं को दर-किनार कर देश की संपूर्ण व्यापारिक गतिविधियों में आमूल-चूल परिवर्तन को "ट्रायल & एरर" नहीं बनाया जा सकता !

हम सभी व्यापारी टेक्सटाइल पर GST का विरोध करते है और सरकार से याचना करते की इस उद्योग को राहत प्रदान करें।



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