Justice for teachers... Nation Builders...

Reasons for signing

See why other supporters are signing, why this petition is important to them, and share your reason for signing (this will mean a lot to the starter of the petition).

Thanks for adding your voice.

Saroj Jalan
Aug 12, 2020
For justice .

Thanks for adding your voice.

Hetal Desai
Jul 29, 2020
even teachers are working hard this days and they too have to run their family so this decision of no school no fees is not at all feasible

Thanks for adding your voice.

Vishal Pareek
Jul 29, 2020
vishal

Thanks for adding your voice.

Smita Chudhury
Jul 28, 2020
It is a Just Cause.

Thanks for adding your voice.

Sarah Varghese
Jul 28, 2020
Yes

Thanks for adding your voice.

Deepmala P​.​duhan Duhan
Jul 28, 2020
Justice For TEACHERS

Thanks for adding your voice.

Nitesh Dhruva Mudgal
Jul 27, 2020
हाँ मे एक प्राइवेट टीचर हू
प्लीज एक बार पढे जरुर प्राइवेट स्कूल के टीचर पर इस समय क्या बित रही हैं या तो वो खुद जानता है या ऊपर वाला ही जानता है *मै एक प्राइवेट टीचर हूं*।इस देश को बनाने में मेरा योगदान भी उतना ही है जितना एक किसान का है, मेरे पेशे का सम्मान आज भी उतना ही है जितना एक सीमा पर रक्षा करने वाले एक शूरवीर जवान का है। मैं हर रोज नए मानकों पर परखा जाता हूँ। जितने सवालों के जवाब सरकारें पूरे कार्यकाल में नहीं देती उतने जवाब मैं रोज देता हूँ। मुझसे सवाल पूछने पर मैं अनदेखा नहीं कर सकता , मुझे जवाब देना ही पड़ता है ओर सही जवाब ही देना पड़ता है।
हर रोज मेरी परीक्षा होती है , मेरी प्रतिष्ठा हर रोज दांव पर होती है , मुझे परखे जाने के जितने मापदंड है उतने शायद किसी को परखे जाने की नहीं ,
मैं .... जी हां ... मैं एक प्राइवेट शिक्षक हूँ। मैं सबके लिए जवाब देह हूँ , अभिवावक हो या बच्चे हो , प्रिंसिपल हो या डायरेक्टर हो , या कोई मैनेजमेंट वाले हो ... सब सवाल मेरी तरफ होते हैं।
जब बच्चों के टेस्ट लें तो बच्चों से ज्यादा मुझे टेंशन होती है , कि नम्बर कम आएंगे तो मैनेजमेंट को क्या बताऊंगा ? बच्चे खुद के रिजल्ट के लिए दुआ करे न करे पर प्राइवेट शिक्षक को रोज करनी पड़ती है। रिजल्ट वाले दिन बच्चों और उनके शिक्षकों की धड़कने राग मिलाती है।
खैर परीक्षा तो हमारी रोज ही होती है कभी एंटरटेनर बनकर , कभी धमका कर , कभी समझाकर तो कभी कभी जोकर की तरह हंसाकर बस इस कोशिश में रहते हैं कि बच्चे अच्छे से सब समझ जाए... बस।
आजकल हमारा सम्मान कम होने लगा है , हमें छोटी छोटी बातों पर भी खिसिया के यह सुनना पड़ जाता है कि पैसे किस बात के लेते हो ...
बाजारू हो गए हैं हम , अपमान सम्मान भूल चुके हैं। लेकिन कोरोना के इस लोकडाउन काल ने हमें सोचने को मज़बूर कर दिया है। न हम बीपीएल वाले हैं , न ही खाद्य सुरक्षा में हमने नाम लिखवाया क्योंकि हम स्वयं समाज के आदर्श हैं , गरीबो की योजना का फायदा गरीबो को मिले तो ही ठीक , हम स्वस्थ है ना , कमा सकते हैं ...फिर सरकार ओर देश पर बोझ क्यों बने ?? इसलिए बड़े बड़े सपनो को लिए हुए , इन छोटे मोटे चक्करों में हम पड़ते ही नहीं।

आजतक हमने बस जवाब ही दिए हैं , सवाल किसी से नहीं पूछा ... आज पूछते हैं

सरकार किसानों , जवानों , मज़दूरों , बीपीएल परिवारों , गरीबों के लिए ही है क्या ? मैं दावे से कह सकता हूँ कि इस देश में सबसे ज्यादा कोई प्राइवेट कर्मचारी है , तो वो प्राइवेट शिक्षक है। क्या सबको जवाब देने वालों के हक़ में सवाल पूछने वाला कोई नहीं है?? 6 महीने से हम घर बैठे हैं , कोई सब्सिडी नहीं , कोई सहायता नहीं , सहायता तो बहुत दूर की बात है किये गए काम का भी यहाँ पेमेंट नहीं हो रहा है बहुत सी संस्थाओं में ...........

आजकल शिक्षकों के अखबार , केबल कनेक्शन बन्द है , रिचार्ज एक ही फोन में रहता है जिसके वाईफाई का घी की तरह उपयोग किया जा रहा है क्योंकि रसोई में घी नहीं बचा है। पकवान की बजाय केवल भूख दूर करने की जद्दोजहद है। दूध दो टाइम की बजाय एक टाइम आ रहा है वो भी कम होता जा रहा है आखिर उधार का दूध कब तक पियेंगे। राशन वालों की दुकानें बदली जा रही है , दुकानदारों से प्राणप्रिय भाई की तरह व्यवहार किया जा रहा है , उनके बच्चों को फ्री में पढ़ाया जा रहा है ताकि वो उधार चुकाने की जल्दी न करें। सबसे उधार मांगकर हम #ना पहले ही सुन चुके हैं , आजकल भगवान से प्रार्थना भी यही रहने लगी है कि आज मकान मालिक किराया मांगने न आये....., बच्चे बिस्किट चॉकलेट की जिद करना भी छोड़ चुके हैं , कभी कभी उनको देखकर आंसू भी निकल जाते हैं , किसी की बीवी प्रेग्नेंट है तो कोई महिला शिक्षिका स्वयं प्रेगनेंसी से गुज़र रही है , आने वाली नन्ही सी नई जिंदगी को कैसी जिंदगी दे पाएंगे ये चिंता सोने नहीं देती , किसी के घर में बुजुर्ग बीमार रहते हैं , तो कोई शिक्षक स्वयं बीपी शुगर का मरीज है , नाममात्र की तनख्वाह में जैसे तैसे एक शिक्षक एक परिवार और उसकी उम्मीदों को पालता है , लेकिन अब उसे सपना भी आ जाए कि घर में कोई बीमार हो गया है तो सब धराशायी . . उम्मीदें टूट सी रही है , लेकिन हम कैसे टूटे .. हमने तो हर रोज सिखाया है , चॉक डस्टर से बनाया और मिटाया है , सबको बताया है कि "हिम्मत नही हारनी चाहिए"
लेकिन सरकारों की अनदेखी कहीं हमें हरा न दे ... कहीं शिक्षक टूट न जाए ... हम खुद जानते हैं की हम कोई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ नहीं जिसके टूटने पर बवाल होगा , या क्रांति होगी ....एक शिक्षक इतनी शांति से टूटता है की अखबारों और शोसल मीडिया पर आवाज तक नहीं होती।

मैं यह नहीं कहता कि हम शिक्षकों ने समाज पर अहसान किया है , मैं आपसे बदले में कोई आर्थिक सहायता भी नहीं मांग रहा हूँ। न ही मेरा कोई राजनैतिक स्वार्थ या एजेंडा है , मैं सीधा साधा आदमी हूँ , मुझे आंदोलन , हैश टैग , सरकार पर दबाव , धरना , हड़ताल भी नहीं आते हैं। मैं बस ईमानदारी से पढ़ाना मात्र जानता हूँ , इसलिए अगर किसी भी प्राइवेट टीचर से थोड़ी भी हमदर्दी है तो इसे शेयर करें । *दर्द को महसूस करें*** *सहयोग करें, साथ दें*।
धन्यवाद


Thanks for adding your voice.

Tarush Shah
Jul 27, 2020
Vaibhavi shah

Thanks for adding your voice.

Patel Ramesh
Jul 27, 2020
Judgtish for teacher

Thanks for adding your voice.

Saroj Bhandari
Jul 26, 2020
Teachers job is important and also for some this must there earning mode