मुंबई के तट की रक्षा। विकास हो, पर, ज़िम्मेदारी के साथ।

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मुंबई की जान - विकास हो पर ज़िम्मेदारी के साथ


बीएमसी (BMC) ने मुंबई में 9.8 किलोमीटर लंबे एक तटवर्ती (Coastal) रोड की योजना स्वीकार की है, जिसकी लागत करीब 12,700 करोड़ रुपए के आसपास होगी। ये रोड प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाईओवर से वर्ली सी लिंक तक बनेगा।


1200 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर वाला ये रोड, अब तक हमारे देश में बनने वाला सबसे महंगा रोड होगा।


एक शहर जहाँ की लोकल ट्रेनों और बसों में लोग बोरियों की तरह ठुसकर काम पर जाते हों, जहाँ की सड़कों पर गड्ढों के कारण हादसे होते हैं, ज़रा सी बारिश शहर की रफ्तार थाम देती है और लोग करंट लगने से मर जाते हैं, ऐसे शहर में 12,700 करोड़ का ये रोड मुंबई के निवासियों के साथ एक भद्दा मज़ाक है।


महाराष्ट्र के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, प्रदेश का एक बहुत बड़ा हिस्सा सूखे की मार झेल रहा है, महाराष्ट्र सरकार ने स्वयं सूखे के लिए केंद्र से 8,000 करोड़ रुपए मांगे हैं, ऐसे समय में देश की जनता के पैसे को एक रोड में झोंक देना कहां की समझदारी है?


मौजूदा योजना के अनुसार ये तटवर्ती रोड मुंबईवासियों के लिए राहत कम, समस्या ज्यादा होगा। इसलिए मुंबई के नागरिक, जनता के पैसों की इस खुलेआम बर्बादी को रोकने की अपील करते हैं और रोड के काम को तब तक रोकने की मांग करते हैं जबतक निम्नलिखित चीज़ें साफ नहीं हो जातीं:


1. बीएमसी ने माना है कि इस रोड और सुरंग के मिलान की जानकारी अभी सार्वजनिक करने कि लिए उपलब्ध नहीं है। इस लिहाज़ से बिना जन-सुनवाई के इसका काम आगे नहीं बढ़ना चाहिए। ये MRTP ACT का एक वैधानिक प्रावधान भी है।


2. रोड के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले असर जिसमें जलवायु परिवर्तन, समुद्र का बढ़ता स्तर, नाला प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, इत्यादि सभी स्टेकहोल्डर से शेयर की जानी चाहिए। बीमसी ने सार्वजनिक बातचीत में माना है कि मौजूदा निर्माण से NOC में दिए गए मानकों से ज्यादा प्रदूषण हो रहा है।


3. मुंबई में हर साल बाढ़ जैसी स्थिति होती है, ये रोड एक तरह से बांध का काम करेगा जिससे पानी की निकासी में दिक्कतें आएंगी, जिससे शहर में और भयानक बाढ़ आएगी। मीठी नदी हादसा इसका एक उदाहरण है।


4. तटवर्ती रोड के कारण पहले से जाम की मार झेल रहे भूलाभाई देसाई रोड, नेपियनसी रोड, हाजी अली जंक्शन पर ट्राफिक की  समस्या बढ़ जाएगी। 12,700 करोड़ क्यों खर्च करना अगर आम आदमी को आधी ज़िंदगी जाम में ही गुज़ारनी है?


5. डर है कि ग्रीन स्पेस के नाम पर ली गई 220 एकड़ ज़मीन को प्राइवेट बिल्डरों को बेच दिया जाएगा या उसका व्यवसायिक इस्तेमाल होगा।


6. मुंबई के कोली मछवारों पर इसका बुरा असर पड़ेगा। मछवारों के लिए शेलफिश, इत्यादि मछलियों का स्त्रोत छिन जाएगा और उनका रोज़गार भी।


जनता की भलाई के लिए हम सारे मुंबईवासी तटवर्ती रोड के निर्माण पर रोक की मांग करते हैं जबतक उपरोक्त बिंदुओं पर सरकार का पक्ष साफ ना हो।


हमारा साथ दें, पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें।


सेव द कोस्ट - डेवलप रेंसपांसिबली कमेटी


संपर्क- saveourcoast2019@gmail.com


हस्ताक्षर किया:


साइरस गुज़दर

बिट्टू सहगल

सुसीबेन शाह

राहुल काद्री

रितु देसाई

जय सिसोदिया

ज़िया सूद

दिन्यार मदन

कशरू श्रॉफ

दिलिप गोंडालिया

ममता मंगलदास

राधिका सबावाला

नयनतारा सबावाला

सूनी तारापोरवाला

नीरजा शाह

नसरीन फज़लभॉय