Remove Sheeshambara Trunching Ground cum Solid Waste Management Plant

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यह 8 से 10 महीने पहले की कहानी है हम सभी सेलाकुई वासी एक बहुत ही ताजा और स्वस्थ जीवन जी रहे थे.. आप लोग सेलाकुई क्षेत्र को उत्तराखंड के इंडस्ट्रियल क्षेत्र तथा शैक्षणिक केंद्र के नाम से भी जानते होंगे। क्योंकि इस क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध कॉलेज हैं, ज़ी हिमगिरी विश्वविद्यालय, डून बिजनेस स्कूल, आईसीएफएआई विश्वविद्यालय आदि तथा बहुत प्रसिद्ध इंडस्ट्रीज तथा फार्म कम्पनीज हैं। जहाँ लगभग 80000 वर्कर्स काम करते हैं।।

8 महीने aprroxx से पहले हमें पता चला कि नगर निगम देहरादून, सेलाकुई के शीशमबाडा क्षेत्र में ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र बनाने की योजना बना रहा है। असल में यह सहस्त्रधारा रोड ट्रंचिंग ग्राउंड को सेलाकुई के शीशमबाडा में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया थी। जब हमें यह खबर मिली तो हमने इसके खिलाफ विरोध किया ।। लेकिन सरकार और नगर निगम के द्वारा यह आश्वावश्तन दिया गया कि यह एक ठोस अपशिष्ट संयंत्र होगा जो भारत में अपने प्रकार का पहला होगा। और इससे नििकलने वाली गैस और बदबू इस प्लांट के बाहर नहीं जाएगी। काफी मीटिंग्स के बाद निगम समझाने में कामयाब रहा की ये प्लांट बनने से कोई भी परेशानी आम लोगों को नहीं होगी।।

जब जनवरी 2018 में सम्माननीय मुख्यमंत्री श्री टीएस रावत ने इस प्लांट का उद्घाटन किया था तो हमने उनसे कहा था कि हम सभी छेत्रवासी वास्तव में इस प्लांट की गंध के कारण एक बड़ी परेशानी में हैं और हम खुली हवा में सांस भी नहीं ले पा रहे हैं । तब माननीय मुख्यमंत्री जी ने आश्वाशन दिया की इस समस्या के निस्तारण जल्द ही होगा।। उस दिन से लेकर आज तक हम स्थानीय शाशन प्रशाशन, एसडीएम और सभी जिम्मेदार अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि हम यहां बहुत बुरे अवस्था में रह रहे हैं लेकिन कोई भी हमें गंभीरता से नहीं सुन रहा है।

जिस दिन से यह संचालन में आया था, हमने पाया कि यह केवल एक कूड़ाघर है जो एनजीटी के मानदंडों को पूरा नहीं कर रहा है। हम सभी छेत्रवासी इस प्लांट के खिलाफ लगातार विरोध कर रहे हैं और इस संयंत्र की मालिक कंपनी रमकी कंपनी (यह वही कंपनी है जिसने देहरादून आईएसबीटी की परियोजना को पूरा किया है, और हम सभी इस कंपनी की कार्यक्षमता के बारे में जानते ही हैं) है।

चर्चाओं और बैठकों की श्रृंखला के परिणामस्वरूप 30 जुलाई को निगम ने इस बुरी गंध को रोकने के लिए प्लांट के चारों तरफ एक बाउंडरी वॉल बनाने का निर्देश दिया, जिस पर लागत आएगी 25 लाख रूपए, और अधिकारियों को बहुत यकीन है कि यह गंध को रोकने का अंतिम समाधान होगा।

हम केवल इस संयंत्र को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए सरकार को पुन: प्रार्थना करते हैं की इसको ऐसी जगह स्थान्तरित किया जाये जहाँ जहां यह किसी भी इंसान के जीवन को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। हम इसकी मांग कर रहे हैं क्योंकि हमे भी ताजा हवा में जीने का हक़ है।।

यह 8 से 10 महीने पहले की कहानी है हम सभी सेलाकुई वासी एक बहुत ही ताजा और स्वस्थ जीवन जी रहे थे.. आप लोग सेलाकुई क्षेत्र को उत्तराखंड के इंडस्ट्रियल क्षेत्र तथा शैक्षणिक केंद्र के नाम से भी जानते होंगे। क्योंकि इस क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध कॉलेज हैं, ज़ी हिमगिरी विश्वविद्यालय, डून बिजनेस स्कूल, आईसीएफएआई विश्वविद्यालय आदि तथा बहुत प्रसिद्ध इंडस्ट्रीज तथा फार्म कम्पनीज हैं। जहाँ लगभग 80000 वर्कर्स काम करते हैं।।

8 महीने aprroxx से पहले हमें पता चला कि नगर निगम देहरादून, सेलाकुई के शीशमबाडा क्षेत्र में ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र बनाने की योजना बना रहा है। असल में यह सहस्त्रधारा रोड ट्रंचिंग ग्राउंड को सेलाकुई के शीशमबाडा में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया थी। जब हमें यह खबर मिली तो हमने इसके खिलाफ विरोध किया ।। लेकिन सरकार और नगर निगम के द्वारा यह आश्वावश्तन दिया गया कि यह एक ठोस अपशिष्ट संयंत्र होगा जो भारत में अपने प्रकार का पहला होगा। और इससे नििकलने वाली गैस और बदबू इस प्लांट के बाहर नहीं जाएगी। काफी मीटिंग्स के बाद निगम समझाने में कामयाब रहा की ये प्लांट बनने से कोई भी परेशानी आम लोगों को नहीं होगी।।

जब जनवरी 2018 में सम्माननीय मुख्यमंत्री श्री टीएस रावत ने इस प्लांट का उद्घाटन किया था तो हमने उनसे कहा था कि हम सभी छेत्रवासी वास्तव में इस प्लांट की गंध के कारण एक बड़ी परेशानी में हैं और हम खुली हवा में सांस भी नहीं ले पा रहे हैं । तब माननीय मुख्यमंत्री जी ने आश्वाशन दिया की इस समस्या के निस्तारण जल्द ही होगा।। उस दिन से लेकर आज तक हम स्थानीय शाशन प्रशाशन, एसडीएम और सभी जिम्मेदार अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि हम यहां बहुत बुरे अवस्था में रह रहे हैं लेकिन कोई भी हमें गंभीरता से नहीं सुन रहा है।

जिस दिन से यह संचालन में आया था, हमने पाया कि यह केवल एक कूड़ाघर है जो एनजीटी के मानदंडों को पूरा नहीं कर रहा है। हम सभी छेत्रवासी इस प्लांट के खिलाफ लगातार विरोध कर रहे हैं और इस संयंत्र की मालिक कंपनी रमकी कंपनी (यह वही कंपनी है जिसने देहरादून आईएसबीटी की परियोजना को पूरा किया है, और हम सभी इस कंपनी की कार्यक्षमता के बारे में जानते ही हैं) है।

चर्चाओं और बैठकों की श्रृंखला के परिणामस्वरूप 30 जुलाई को निगम ने इस बुरी गंध को रोकने के लिए प्लांट के चारों तरफ एक बाउंडरी वॉल बनाने का निर्देश दिया, जिस पर लागत आएगी 25 लाख रूपए, और अधिकारियों को बहुत यकीन है कि यह गंध को रोकने का अंतिम समाधान होगा।

हम केवल इस संयंत्र को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए सरकार को पुन: प्रार्थना करते हैं की इसको ऐसी जगह स्थान्तरित किया जाये जहाँ जहां यह किसी भी इंसान के जीवन को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। हम इसकी मांग कर रहे हैं क्योंकि हमे भी ताजा हवा में जीने का हक़ है।।