CHIEF OF ARMY STAFF - STOP USING OSA ON YOUR JAWAN VETERAN NK DEEP CHAND

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This Petition is in Hindi and English - English part is after Hindi

जांबाज़ सिपाही दीपचंद की बहादुरी को सलाम : उसकी बहादुरी को मत कुचलो

तीन युद्धों में अपनी बहादुरी दिखा चुके नायक दीपचंद (सेवानिवृत्त) एक व्हि‍सलब्लोअर हैं. उनका मकसद सेना में सहायक सिस्टम की आड़ में किए जा रहे अत्याचारों को उजागर करना है. उनकी एकमात्र गलती थी कि वह अपने साथी जवानों की बदहाली पर आंख मूंद नहीं सके. दीपचंद 'ऑपरेशन विजय', 'ऑपरेशन रक्षक' और 'ऑपरेशन पराक्रम' में शामिल हो चुके हैं.

 समर्पित और वफादार सैनिक दीपचंद ने अक्टूबर, 1994 में बतौर गनर इंडियन आर्मी के 1889 लाइट रेजीमेंट को ज्वाइन किया था. एक बम ब्लास्ट में दीपचंद ने अपना दोनों पैर और एक हाथ गंवा दिया, जिसके कारण आर्मी में उनका करियर छोटा ही रह गया. देवलाली में दीपचंद एक आइकॉन हैं, जिन्हें बहादुरी की जिंदा मिसाल के तौर पर देखा जाता है. उन्होंने शारीरिक विकलांगता को कभी अपने जीवन में बाधा नहीं बनने दी. दीपचंद एक ऐसी शख्सियत ,हैं जिन्हें देवलाली में सर्विस करने वाले और रिटायर्ड, दोनों तरह के लोग अच्छी तरह जानते हैं और उनका सम्मान करते हैं.

 रक्षा मामले पर संसद की स्टैंडिंग कमेटी, 2008 ने सहायक सिस्‍टम से जुड़े दीपचंद के मामले पर विचार किया था. कमेटी ने अपनी 31वीं रिपोर्ट में कहा था:

कमेटी को इस बात पर जोर देने की जरूरत नहीं है कि जवानों को देश की सेवा के लिए भर्ती किया जाता है, न कि अधिकारियों के परिवारवालों के घर के काम के लिए, जो कि बेहद अपमानजनक है. कमेटी इस शर्मनाक प्रथा को बेहद गंभीरता से देखती है, जिसे आजाद भारत में कोई जगह नहीं देना चाहिए था.   कमेटी रक्षा मंत्रालय से उम्‍मीद करती है कि इस व्यवस्था से, जिससे जवानों के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचता है, उसे तुरंत बंद करने के निर्देश जारी किए जाएंगे. निर्देश का उल्लंघन करने वाले किसी भी अधिकारी से गंभीरता से निपटा जाना चाहिए. पैरा सैन्य संगठनों और दूसरे संगठनों के लिए गृह मंत्रालय को भी इसी प्रकार की कार्रवाई करनी चाहिए.''

 सहायक सिस्टम को खत्म करने के लिए 24 फरवरी को ऑनलाइन न्यूज पोर्टल द क्विंट ने एक स्टिंग ऑपरेशन वीडियो जारी किया था. इसमें देवलाली कैंटोनमेंट में सहायक सिस्टम के बुरे असर के बारे में दिखाया गया था.

 कुछ दिनों बाद रॉय मैथ्यू नाम के जवान की संदिग्ध हालात में मौत हो गई. जवान की मौत के बाद एक अन्‍य जवान ने सेना के ही इशारे पर पुलिस में औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज की. इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने खुदकुशी, अतिक्रमण और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (धारा 3 और 7) समेत कई आरोपों में द क्विंट की पत्रकार एसोसिएट एडिटर पूनम अग्रवाल और दीपचंद के खिलाफ मुकदमा दायर किया.

 वीडियो में एक जवान इसे साबित भी कर रहा है. जवान ने कहा, ''अरे हम बताएंगे ना कोई बात, तो वो हो जाती है, अरे हां यार ये तो सिक्योरिटी लीक कर दी'' (अगर हम आपको कुछ बताएंगे, तो हमें कहा जाएगा कि हमने सिक्योरिटी लीक कर दी)

 हर बार जब किसी जवान ने सहायक सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की, तो उसकी आवाज को दबा दिया गया. इस बार भी एक ऐसी ही कोशिश की जा रही है. एक ऐसे दिग्गज की आवाज दबाई जा रही है, जिसने युद्ध में अपने तीन अंगों का बलिदान कर दिया.

 जिस तेजी से एफआईआर दायर की गई थी, उससे संदेह होता है. ऐसा लगता है कि पुलिस पर दबाव है और इस मामले को वो खुदकुशी के ओपन एंड शट केस की तरह ट्रीट कर रही है, जो एक बड़ी गलती है. इस मामले में ढिलाई बरती जा रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए. कोर्ट की निगरानी में ऐसी जांच होनी चाहिए, जिससे हर पहलू और तथ्य सामने आ सकें.

 हम सेना प्रमुख से आग्रह करते हैं कि दीपचंद और दूसरे जवानों का उत्पीड़न तुरंत बंद किया जाए और फर्जी एफआईआर भी दर्ज नहीं कराई जाए. हमें भारतीय सेना पर गर्व है, लेकिन सेना प्रमुख को जवानों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होगा, साथ ही उनकी प्रतिष्ठा पर ठेस लगने से भी रोकना होगा.

Salute the spirit of braveheart Jawan Deepchand. Don’t crush it.

 Naik Deepchand (Retired) is a triple amputee war veteran who acted as a whistleblower, with the intention of bringing to light the atrocities carried under the guise of the Sahayak (buddy) system. His only fault was he could not turn a blind eye to the plight of his fellow jawans (soldier). He is a veteran of Operation Vijay, Operation Rakshak and Operation Parakram. A dedicated and a loyal soldier, Deepchand was enrolled in the Indian Army in October 1994 as a Gunner in 1889 Light Regiment. This brave soldier’s bright career was cruelly cut short when he lost both his legs and one hand in a bomb blast. He is an icon in Deolali and a living embodiment of bravery. He has never let his disabilities get in the way of his zest for life. He is someone who is well known and respected in the Deolali serving and retired community.

 The Parliamentary Standing Committee on Defence, 2008 shared Deepchand’s aversion to Sahayaks doing menial jobs and in their 31st Report stated, “The Committee hardly need to stress that Jawans are recruited for serving the nation and not to serve the family members of officers in household work which is demeaning and humiliating. The Committee take a very serious view of the shameful practice which should have no place in the independent India. The Committee expect the Ministry of Defence to issue instructions to stop forthwith the practice, which lowers the self-esteem of Jawan. Any officer found to be violating the instruction in this regard be dealt with severely. Similar action needs to be taken by the Ministry of Home Affairs in respect of para military organisations and other organisations.

 To this end, on February 24th, online news portal The Quint, released a sting operation video on the abusive Sahayak system shot within the confines of Deolali cantonment. In the ensuing aftermath a soldier by the name of Roy Mathews died under mysterious circumstances. Following the death of the Jawan, a jawan at the behest of the army filed a formal complaint with the police, aided by a quasi-military group by the name of Citizens 4 Forces. Based on the complaint, the police booked journalist Poonam Agarwal, Associate Editor, Investigations of The Quint and Deepchand, on multiple charges including abetment to suicide, trespassing and Officials Secrets Act (sections 3 and 7 which include spying).

 One of the jawans in the video proved prophetic when he said, “Arre hum batayenge na koi baat to woh ho jaati hai, arre haan yaar yeh to security leak kar di” (If we tell anything, we will be told that we did a security leak). Every time a jawan has tried to raise his voice against the Sahayak system, his voice has been suppressed. This time too an attempt is being made to suppress a war veterans voice, one who has sacrificed three limbs for the country.

 The speed with which the FIR (first information report) was filed makes it suspect. It appears that the police have acted under duress and are treating it as an open and shut case of suicide, which is a grave mistake. There are many loose ends in the story all which must be investigated. What is required is a court monitored investigation to discover and establish all the relevant facts.

 We urge the Army Chief to immediately stop the harassment of Deepchand and other jawans and not to register bogus FIRs. We have pride in the Indian Army but the Army Chief has to assure the safety and dignity of his jawans and not besmirch their reputations.

Veteran Jawans

31वीं रिपोर्ट 

द क्विंट 

31st Report 

The Quint



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