निजी शिक्षण संस्थानो द्वारा खुलेआम लूट जारी प्रशासन बेहाल

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शासन-प्रशासन स्तर पर रिक्शा व आटो चालको का किराया तय किया जाता है,परन्तु प्राइवेट स्कूलो के मनमाने फीस वसूली पर जो बुनियादी व समाज प्रेरक शिक्षा प्रदान करने का कार्य करते है,उनके मनमाने फीस वसूली पर लगाम लगाने व जवाब देने को कोई भी तैयार नहीं जिस कारण गरीब व मध्यम वर्गीय लोगो को खुलेआम लूटा जा रहा है। प्राइवेट स्कूलो में ड्रेस व अन्य प्रोजेक्ट व कार्यक्रमो के नामो पर मध्यम वर्गीय परिवार के लोगो से मनमाने ढंग से खुलेआम उनकी जेबो पर डाके डाल कर उनको लूटा व खसोटा जा रहा है जिसके लिए गरीब व मध्यम वर्गीय लोग कर्ज में लगातार डूबते जा रहे है,जिस पर लगाम लगाने व मानक तय करने की पहल आखिर क्यों नहीं की जा रही है? यह सिलसिला व्यापार से मनबड़ाई के मार्ग पर निरंतर बढता जा रहा है। सरकार के सारे कार्यक्रम बालिका शिक्षा, अनिवार्य शिक्षा व अन्य वायदे खोखले से प्रतीत हो रहे है। प्राईवेट स्कूल व संस्थाओ के आका खुलेआम सरकारी नीतियो की धज्जिया उड़ाते हुए समाज में खुलेआम अपनी शिक्षा नामक दूकान को खोलकर गरीब व मध्यम वर्गीय लोगो के ज़ेबो को जबरिया काटकर अपनी तिजोरी को भर रहे है। आखिर इन पर लगाम या अंकुश क्यों नहीं लगाया जा रहा है ! इनका फीस वसूली मानक क्यों नहीं तय किया जा रहा है ? कही न कही ये सरकारी तंत्र की तरफदारी नहीं प्रतीत हो रही है